अपने सपनों को प्राप्त करने के लिए :-

अपने सुविधा क्षेत्र से बाहर निकलें :

अपने व्यक्तिगत विकास के लिए ये बहुत आवश्यक है कि हम अपने सुविधा क्षेत्र से बाहर आयें।अन्यथा कैसे हम ये उम्मीद रख सकते हैं कि हम अपने पेशे में आगे बढ़ेंगे यदि हम अपनी पुरानी आदतों और नियमित कार्यकर्मों से चिपके रहेंगे।

मनुष्य आरामपसंद जीव है।हमारा सुविधा क्षेत्र वहाँ होता है जहाँ तनाव और चिंता न्यूनतम हो,जहाँ हम ये जान सकने में सक्षम होते हैं कि आगे क्या होने वाला है और उस के हिसाब से योजना बना सकें।

अपने सुविधा क्षेत्र में रहने में कोई बुराई नहीं है लेकिन जब हम जरूरत से ज्यादा आरामपरस्त हो जाते हैं और नई चीजों के लिए कोशिश करने से अपने आप को पीछे खींचने लगते हैं,तब हमें ये जानना होगा कि ये वक्त है अपने सुविधा क्षेत्र से बाहर निकलने का और बढ़ने और सीखने का प्रयास करने का क्योंकि यदि जीवन में कोई चुनौती ही नहीं होगी या कोई लक्ष्य ही नहीं होगा,जिसे हम अपने लिए निर्धारित करेंगे,या कुछ ऐसा नहीं होगा जो प्राप्त करना मुश्किल हो,तो हम नयी बातें कैसे सीखेंगे।

कैसे हम आगे तरक्की करेंगे और अपनी जिन्दगी को समृद्ध करेंगे ?सुविधा क्षेत्र एक स्वभाव संबंधी क्षेत्र है जहाँ हमारी गतिविधियाँ और बर्ताव एक नियमित कार्यक्रम और पैटर्न में बंध जाती हैं,जो तनाव और खतरों को न्यूनतम कर देते हैं। हमारे सुविधा क्षेत्र में जान-पहचान की भावना,सुरक्षा की भावना और यकीन की भावना होती है।

थोडा सा बेआराम होना,चाहे वो हमारी पसंद से हो या न हो,हमें ,हमें हमारे लक्ष्यों को,जिनके बारे में हम सोचते हैं कि हम उन्हें प्राप्त नहीं कर सकते,प्राप्त करने की ओर धकेल देता है।

लेकिन ये याद रखना बहुत ही जरूरी है हमें इसके लिए हमेशा खुद को चुनौती देने की या हमेशा उत्पादक बने रहने की आवश्यकता नहीं है।अपने सुविधा क्षेत्र से बाहर निकलना अच्छा है और उसमें फिर से चले जाना भी उतना ही अच्छा है।अपने सुविधा क्षेत्र में बने रहना अविरोधी और स्थिर प्रदर्शन दे सकता है लेकिन इससे बाहर निकलना और एक नए और चुनौतीपूर्ण कार्य को हाथ में लेना अनुकूलतम प्रदर्शन के लिए स्थिति पैदा कर सकता है।

चिंता करना बंद करें और अपने डर को जीतें:

असफलता का डर,पछतावे का डर,समाज का डर –जाने इस प्रकार के कितने डरों से हम जूझते रहते हैं।हम में से कुछ के लिए ये डरावना होता है और जिन्दगी रुक सी जाती है।

हमारा मस्तिष्क असंख्य डरों का निर्माण करता है और इस प्रकार अनेकों डर से दो-चार होता रहता है।जैसे-जैसे जागरूकता बढती जाती है वैसे-वैसे उसकी प्रतिक्रिया भी बढती जाती है।

जब हम अपने डर को अपने निकट आलिंगन कर लेते हैं,अंततः हम अपने सुविधा क्षेत्र में खुद को बाँध लेते हैं।इस प्रकार हम कभी भी,जो हम चाहते हैं,जो हमारे स्वप्न हैं उनके बारे में सोचने की हिम्मत नहीं जुटा पाते।

लेकिन जब हम इन डरों से खुद को मुक्त कर लेते हैं,ऊंची उड़ान भरने लगते हैं।

अपने भय के बारे में लिखना या सोचना बेहद आसान है।दिल की गहराइयों में हर कोई अपनी कमजोरियों के बारे में जानता है,और जानता है कि उनको स्वीकार करने के लिए हिम्मत चाहिए।हम सभी ये जानते हैं कि केवल हमारा डर ही हमें पीछे रोके रखता है,और हिम्मत जुटाना,डर और आत्म -संदेह की जंजीरों को तोड़ने की दिशा में केवल आधे रास्ते तक जाने जैसा है।

पहला कदम है इन जंजीरों से खुद को मुक्त करने का निर्णय लेना।जब हम अपने डर को जीतने का निर्णय ले लेते हैं,तो हम अपने में एक बदलाव महसूस करते हैं।पर यदि हम ऐसा नहीं करते तो हम ताउम्र एक पछतावे के साथ जीते रहेंगे कि हम इतने मजबूत नहीं थे कि हम ये निर्णय ले पाते।

दूसरा कदम है सफलता के रास्ते को पहचानना।हमें अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए एक योजना तैयार करनी होगी और उस पर अमल करना होगा।रास्ते में बहुत सी रुकावटें आएँगी लेकिन हमें अपने सर को ऊँचा रखते हुए,कड़ी मेहनत के साथ अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में बढ़ना चाहिए।

तीसरा कदम है उस वक्त तक प्रयत्न करते रहना जब तक हम उस स्थान तक न पहुँच सकें जहाँ पहुँच कर हम अपने पहले दो क़दमों का फल प्राप्त कर सकें।शायद ये सबसे बढ़िया तोहफ़ा होगा जो हम अपने आप को देंगे।साथ ही साथ हम पायेंगे कि हम ज्यादा आत्म-विश्वासी,निर्णायक हो गए हैं और जीवन को एक नये नजरिये से प्यार करने लगे हैं।यहाँ से एक प्रेरित जीवन की शुरुआत होती है और यकीन मानिए ये सिर्फ शुरुआत है।

अपने सपनों का पालन करने की हिम्मत जुटाएं :

सपने हर तरह की कामना पूर्ति हैं –विवादों को सुलझाने के अचेतन मन के प्रयास।वास्तव में सपने वो नहीं होते जो हम नींद में देखते हैं बल्कि वो होते हैं जो हमें सोने नहीं देते।

आज कल के दौर में हम देखते हैं कि बहुत से लोग होते हैं जो दूसरों के लिए अपने सपने न्योछावर कर चुके होते हैं या कर रहे होते हैं।जबकि हम हमेशा दूसरों की जिन्दगी में मौजूद खालीपन को भरने के लिए आगे नहीं आ सकते।और वास्तव में अपने सपने न्योछावर कर के क्या हम खुश रह सकते हैं ?

देर-सवेर हमें अपने इस निर्णय पर पछतावा जरूर होगा कि हमने अपने सपनों को जीने की बजाय दूसरों के लिए उसे न्योछावर कर दिया।जिन्दगी बहुत ही छोटी है।इसमें पछतावे के लिए कोई जगह नहीं है।अतैव अपने सपनों को कुर्बान करने की बजाय उनका पीछा करें और उनको एक सच्चाई में बदलें और दूसरों को भी उनके सपनों को पूरा करने में मदद करें।इस प्रकार हमें और आनंद की प्राप्ति होगी और हम खुद को अधिक संतुष्ट महसूस करेंगे।

अपने सपनों को प्राप्त कर एक नवीन व्यक्तित्व में उभरें :

यदि हम इतिहास पर नजर डालते हैं तो पाते हैं कि जिन्होंने भी एक बड़ी सफलता हासिल की,वे सभी स्वप्न देखने वाले थे।उन्होंने पहले एक स्वप्न देखा और फिर उस स्वप्न को सच्चाई में बदला।

वे कभी असफलता से नहीं डरे बल्कि उन्होंने अपनी असफलता को ही सीढ़ी बना लिया और उस पर चढ़ कर वे महान ऊँचाइयों तक पहुंचे और इतिहास रच दिया।

मानव इतिहास में सभी महान उपलब्धियाँ एक स्वप्न से ही शुरू हुई हैं और एक बात जो स्वप्न देखने वालों को औरों से अलग करती है वो है उन की अपने सपनों को आगे बढाने की हिम्मत।

जैसा कि वाल्ट डिज्नी ने कहा था,”हमारे सभी सपने सच हो सकते हैं यदि हममें उन्हें आगे बढाने का हौसला हो।”

इसलिए हमें डर को खुद से दूर कर देना चाहिए और स्वप्न देखने शुरू कर देने चाहिए।