आपके अंदर का नायक:-
हम सभी के अंदर एक नायक होता है। यहाँ नायक का मतलब है  वो व्यक्ति जिसने जीवन मे कोई उल्लेखनीय कार्य किया हो जिससे ना केवल उसका अपितु अन्य का भी भला हुआ हो।
नायक बनने के लिए सबसे पहले अपने आस पास के लोगों के प्रति विनम्रता का भाव अपने अंदर जागृत करना होगा। पर ये ध्यान रखने योग्य है कि आप दूसरों के प्रति तब तक विनम्र नहीं हो सकते ,जब तक कि आप अपने प्रति विनम्र नहीं होंगे। गाँधी जी के शब्दों में ,एक चरित्रवान और सिद्धांतवान व्यक्ति ही परिस्थितयों को सभी के फायदे के लिए बदल सकने की आशा रख सकता है। जैसा कि हम कहते हैं कि प्रभावशाली होना अच्छी बात है लेकित उससे भी जरूरी और अच्छी बात है विनम्र होना।
लेयर्ड हैमिलटन ने ये साफ़ कर दिया है ,”आप मेरी माँ से कह सकते हैं कि मैं इस मैगज़ीन के मुख्य पृष्ठ पर हूँ  या मैंने ये प्राप्त किया है ,और वो कहेंगी बहुत अच्छा ,किन्तु आप लोगों से कैसा व्यवहार करते हैं?
हरेक को अपने किये हुए कार्यों के परिणामों के बारे में जागरूक रहना चाहिए। जो कुछ भी आप करते हैं एक चिन्ह छोड़ देता है-अच्छा या बुरा। और जो व्यक्ति कार्यों के परिणामों की चिंता नहीं करता उसके जीवन से शान्ति और ख़ुशी चली जाती है।
केवल दयालु हो कर और सत्कर्म कर के ही कोई व्यक्ति नायक बनने की दिशा में सही यात्रा शुरू कर सकता है। ये एक छोटे कदम के रूप में शुरू हो सकता है और धीरे-धीरे वो एक कदम हमें उस नायक वाली सफलता की ओर ले जाता है। जैसे -जैसे हम इस रास्ते पर बढ़ते हैं ,वक्त के साथ साथ  महान कार्य होने लगते हैं और कभी कभी तो ऐसे चमत्कार हो जाते हैं जिनकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते। पर याद रखें ,चमत्कार अपने आप नहीं होते  बल्कि ये हमारी निरन्तर खोज के पुरूस्कार के समान है।
हम सभी के अंदर वीरोचित तेज़ है जिसे बाहर निकालने की जरूरत है। पर हम मे से अधिकाँश अपनी आदतों ,अज्ञानता  या सरासर आलस्य की वजह से कभी भी अपने अंदर छुपी नायक बनने की संभावना का लाभ नहीं उठाते।