आप अपनी जिन्दगी को सरल बनाने के लिए क्या कर रहे हैं :-

अपने जीवन को सरल बनाना ही सफलता ,आनंद और दीप्तिमान दिखने की कुँजी है।अपने जीवन को सरल बनाने का अर्थ ये नहीं है कि आप काम करना ही बंद कर दें।अपनी पुस्तक “अपने जीवन को सरल बनाएं :१०० तरीके, धीमा होने के और उन बातों का आनंद लेने के जो वास्तव में मायने रखती हैं “ में लेखक एलैने सेंट जेम्स ,छोटे विकल्पों को लेने के बारे में लिखती हैं –जैसे छोटे घर में रहना ,छोटी गाडी में ड्राइव करना ,हमेशा फ़ोन का उत्तर न देना ,साधारण फ़ोन रखना आदि –आदि।

पर सरल जीवन जीने का अर्थ यह नहीं है कि आप ओछा जीना शुरू कर दो।इसका अर्थ है ,जीने के पैमाने को कम करना ,सुविधा को बनाये रखते हुए ,जीवन से जटिलताओं को बाहर निकाल देना अर्थात् केवल उतना ही चीजों को लेना जितना उसकी जरूरत हो।

जितना आप व्यस्त होते हैं उतना ही आप अपने जीवन से व्याकुलता को घटाना चाहते हैं।जीवन को सरल बनाने के लिए उसी क्षण में जीयें और जैसा और जो  भी आपके जीवन राह में घटे उसे गले लगाएँ।जीवन में घटित किसी भी परिस्थति का उसी वक्त सामना करें और दुसरे मुद्दे पर बढ़ जाएँ।जीवन में ज्यादतर जटिलताएँ हमारे दिमाग में ही उत्पन्न होती हैं।इसलिए ज्यादा न सोचें।केवल अपना काम करें और चीजों को सरल रखें।कभी भी टेक्नोलॉजी पर निर्भर न रहें।उनका उतना ही इस्तेमाल करें जितना जरूरी हो।

मूल बातों पर केन्द्रित रहें।अपने काम से काम रखें और हमेशा वर्तमान में जीयें।कभी भी भूतकाल और वर्तमान के बीच न भटकें।घर का खाना खाएं,पूरी नींद लें और अपने जीवन को जटिल बनाने वाले विचारों को दूर भगाएं।याद रखें सरलता एक दैनिक चुनाव है जो आप करते हैं।

अपने परिवार के साथ कुछ समय बिताएं।इससे आपके जीवन  में फैली अव्यवस्था दूर हो जायेगी और साथ ही साथ सार्थक वार्तालाप से मष्तिष्क भी खुश और प्रवृत्त रहेगा।खुश रहने के सरल तरीके खोजें और अपने खाली समय में अपनी रुचि वाले काम,या जिस काम के प्रति आप में जूनून हो ,कर सकते हैं ,जिससे आप को व्यस्त जीवन से भी कुछ समय के लिए ब्रेक मिलेगा और आप अपने लक्ष्यों के भी करीब खुद को पायेंगे।इससे आपकी आत्माकांक्षा भी पूरी होगी और आपके विचार भी सरल रहेंगे।

हर वस्तु और गतिविधि को ,जो आपके जीवन पर कब्ज़ा किये हुए है,चुनौती दें।अपने आप से पूछें ,”मैं इसे क्यों कर रहा हूँ और इसकी जरूरत ही न रहे इसके लिए क्या किया जा सकता है।”अपने जीवन को ऐसी बातों ,चीजों से भरें,जिसे करना आप को प्यारा लगता है न कि ऐसी बातों से जो आप करना पसंद करते हैं।किसी भी कार्य पर जरूरत से ज्यादा ध्यान,ताकत और समय नष्ट न करें।ऐसा करने से आप अपने लिए कीमती वक्त निकाल पायेंगे।

ऐसी बातों की लिस्ट बनायें जो आपके जीवन को नहीं बढाती या ज्यादा महत्व नहीं रखती।ऐसे कार्यों  में संलग्न रहें जो आप को फिर से उर्जावान करें।और ऐसे कार्यों को कम करें जो आपके जीवन को सार्थक बनाने में कोई मदद नहीं करते।ऐसी बातों से खुद को अलग करें जो आप को उर्जाहीन करती हैं। जटिलताओं में संलग्न न रहें क्योंकि एक बड़े सरलता के कदम के लिए एक छोटे बदलाव की जरूरत होती है।अपने रिश्तों और वित्त को सरल रखें।बाहरी संसार से पृथक हो कर कुछ समय अपने साथ बिताएं।

हमें बाहरी रूप से सरल रहने के साथ –साथ भीतर से भी सरल रहना सीखना होगा।हम किस प्रकार मष्तिष्क में समाई ,भ्रम ,तनाव ,टकराव और अन्य अनसुलझी बातों को सरल कर सकते हैं।शुद्ध जागरूकता के अतिरिक्त कुछ और सरल नहीं है।जब तक कोई व्यक्ति इस सत्य का प्रत्यक्ष अनुभव नहीं कर लेता तब तक भीतरी जटिलताएँ बार-बार वापस आएँगी।सभी बाहरी जटिलताएँ जिनके बारे में लोग शिकायतें करते हैं ,वो उनके खुद के चुनाव की वजह से हैं,क्योंकि जब जीवन जटिल होता है तब हम खुद को महत्वपूर्ण ,कीमती और उद्विग्न समझते हैं।कर्तव्यों,मांगों और नाटक से परे,तथापि हम एक परेशान  ,भीतरी दुनिया से बच रहे हैं।ये हमेशा से मानवीय दुविधा रही है और इसको सुलझाना जीवन की सबसे जरूरी चुनौती रहेगी।