एक विशेष बंधन-माँ :-

एक समय की बात है,सरहद पर एक माँ अपने शिशु के साथ रहती थी।उस छोटे लड़के के पिता,जो की सेना में एक सार्जेंट थे,कुछ समय पहले एक युद्ध में शहीद हो गए थे।

एक शाम,माँ को किसी जरूरी काम से घर से बाहर जाना था,इसलिए उन्होंने नहा कर पुत्र को को बिस्तर पर लिटा दिया।जब उन्हें निश्चय हो गया कि उनका बेशकीमती बच्चा गहरी नींद में है तो वे जल्दबाजी में बाहर निकल गयीं।लेकिन अफ़सोस!वे बाहर जाने से पहले लालटेन बंद करना भूल गयी थीं।एक बिल्ली ने उसे धक्का दे कर गिरा दिया और तुरंत ही मेजपोश और गलीचे में आग लग गयी।शीघ्र ही पूरा घर धूं-धूं कर जलने लगा।

एक पडोसी ने धूआँ देख कर शोर मचाया और तुरंत ही सारा पड़ोस आग का मुकाबला कर रहा था।इस समय तक आग फ़ैल गयी थी और हर खिड़की से धूँआ बाहर निकल रहा था।अग्निशामक दल को तलब किया गया पर वे भी उस आग को बुझा पाने में नाकाम रहे।

अचानक,एक कर्णभेदी चीख़ सुनाई दी।”मेरा बच्चा!मेरा बच्चा!”और उस बच्चे की माँ दर्शकों की भीड़ में से जल्दी-जल्दी भाग कर आती दिखाई दीं।वो बहादुर माँ उस क्रूर आग पर धावा बोलना चाहती थी किन्तु फायरमैन ने उन्हें रोक दिया।

वे चिल्लाए,”तुम इस आग में जिन्दा नहीं रह सकोगी।”मुझे जाने दो!मुझे जाने दो!वह चिल्लाई,और एक अलौकिक शक्ति के साथ उन्होंने उस बलिष्ठ फायरमैन को एक तरफ धकेल दिया।एक क्षण के लिए भी अपनी जान की परवाह किये बगैर वे उस घने धुएँ से गुजरते हुए उस उग्र भट्टी में प्रवेश कर गयीं और अपने बच्चे तक पहुँच गयीं।

फायरमैन सही थे,कोई भी उस आग में जिन्दा नहीं रह सकता था,और जब आग ठंडी हुई तो उस माँ को अपने बच्चे को सख्ती से अपनी बाहों में भींचे हुए मृत पाया गया।

माँ का प्यार कटना अद्भुत होता है!क्या हम कल्पना कर सकते हैं किसी ऐसे काम की जो हमारी माँ ने हमारे लिए न किया हो?यदि कभी उन्होंने इनकार भी किया होगा तो केवल हमारे भले के लिए ही।

इसलिए जरा सोचिये,क्या हमें भी अत्यंत उत्साह के साथ वो सब नहीं करना चाहिए जो वो हमसे करने के लिये कहती हैं।वो जरूर इस के लिए हमारी सराहना करेंगी।

माँ का प्यार बहुत ही ताकतवर होता है।इसको कोई भी हरा नहीं सकता।संसार में कुछ भी माँ के समान नहीं है।माँ खुद भूखा रह कर भी अपने बच्चों का पेट भरती है।माँ का दर्जा भगवान् के समान होता है।जिस प्रकार हम भगवान् का आदर-सत्कार करते हैं और उनकी पूजा करते हैं,उसी प्रकार हमें अपनी माँ को भी आदर-सम्मान देना चाहिए और उनकी पूजा करनी चाहिए।