कमियों और गलतियों को आत्मविकास के लिए उपयोग करो :
हम सब भगवान की एक आकर्षक कृति हैं। उसने हमें दो आँखें इस जगत और ब्रह्माण्ड की सुंदरता निहारने के लिए दी हैं। उसने हमें नाक दी है अच्छी वस्तुओं की खुशबू सूंघने के लिए। उसने हमें सुन्दर खाल दी है। सभी ज्ञानेन्द्रियों के अलावा उसने हमें एक अपनी पहचान दी है जो हम सब मे अलग अलग होती है।
इसी के साथ उसने हमें कुछ कमियाँ और दोष भी दिए हैं। ये शारीरिक भी हो सकते हैं और व्यवहारिक और मानसिक भी।  ये हमें हमारी गलतियों,हमारी शारीरिक कमियों और  उन घटनाओं जिन्हे हम भूलना चाहते हैं के बारे मे याद दिलाते रहते हैं  और वक्त बे वक्त हमें शर्मिंदा करते रहते  हैं ।
पर कभी हमने सोचा है की यही दोष हमें एक इंसान के रूप मे बेमिसाल बना सकते हैं। हमारे दोष हमारे लिए वरदान हैं ना की  अभिशाप। यही अपूर्णता या कमी हमें सुन्दर बनाती है।  हमारे दोष हमें हमारी कमियों को सुधारने का मौका देते हैं और हमें ऊंचाईयों को छूने की प्रेरणा देते हैं। ये हमें हमारे अंदर बदलाव लाने  और अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करते हैं।
कोई भी अपने आप मे सम्पूर्ण और त्रुटिहीन नहीं होता। हर किसी मे कोई न कोई कमी होती है जिसको वह झूठ बोल कर  या बहाने बना कर छुपाना चाहता है पर हमें ऐसा नहीं करना चाहिए।  हम जैसा हैं वैसा ही दिखाना चाहिए। क्यूंकि असफलता मे ही सफलता ,अपूर्णता मे ही पूर्णता छुपी होती है।
शारीरिक रूप से अपंग व्यक्ति भी जब तक कुछ नहीं कर सकता जब तक वह अपनी कमी के बारे मे सोच -सोच कर दुखी होता रहेगा। पर जब वह उन कमियों को भूल कर आगे बढ़ता है तो उन्ही कमियों को कमतर करता हुआ उंचाईयों को छूता  है और  वह कमी उसके जीवन की अच्छाई  बन जाती है।  मसलन सूरदास ने  अंधे होते हुए भी कितने अच्छे काव्य की रचना की है।
उसी प्रकार कभी कभी हमारे व्यवहार मे  भी कमी होती है।  हम सामाजिक रूप से प्रैक्टिकल नहीं होते और अक्सर जीवन मे असफलताओं से दो -चार होते रहते हैं।  पर यदि हम अपनी असफलताओं को एक इन्धन के रूप मे अपनी मानसिक ,व्यवहारिक और आंतरिक उन्नति के लिए इस्तमाल करें तो कोई वजह नहीं है की हम सर्वोच्च शिखर पर न पहुँचें।
घाटा होना या किसी काम मे नुक्सान होना हमारे आत्मसम्मान को ,हमारे आत्मविश्वास को ठेस पहुंचा सकता है। हम नकारात्मक विचारों से घिर जाते हैं और सोचते हैं कि हम उन घटनाओं की दया पर निर्भर हैं जिन पर हमारा कोई कंट्रोल नहीं है। हम असहाय ,आशा -हीन ,और ठगा हुआ महसूस करते हैं। कभी कभी तो कुछ लोग इतने अन्धकार मे घिर जाते हैं की इस से बाहर नहीं आ पाते। कुछ आते भी हैं तो अपना आत्म-विश्वास कमजोर पाते हैं और अपने काम करने की क्षमता खो देते हैं। वो जिंदगी को नए सिरे से शुरू करना चाहते हैं पर डरते हैं की वह फिर से असफ़ल न हो जाएँ।
यह असफलता के अनुभव जो हमें डराते रहते हैं यदि हम चाहें तो हम इन्हे अपने फायदे के लिए अपनी सम्पूर्ण विकास के इस्तेमाल कर सकते हैं। किसी रिश्तेदार का खोना ,पैसे का नुक्सान ,सामाजिक रुतबे का कम होना  ,किसी जॉब को खोना या तो हमें गहरे शोक मे डाल  सकता है या फिर हम इन नुकसानों को कम करने के उपाए निकाल सकते हैं।
अक्सर हमारे दुःख हमारी कमियों की वजह से नहीं होते बल्कि इसलिए होते हैं कि हम अपने अहं और न गिने जाने वाली इच्छाओं से जुड़े होते हैं।  जब इच्छाएं पूरी हो जाती हैं और हमारा अहम तुष्ट हो जाता है तब हम उत्साह का अनुभव करते हैं। इसके उलट होता है और हमारी इच्छा पूर्ती नहीं होती तो हम गहरे सदमे मे चले जाते हैं।
यदि हम अपने आप को केवल उत्साह से जोड़ लें (मतलब हर परिस्थिति मे बिना रुके काम करते रहना) और हर परिस्थिति मे उत्साह को खोजें और सदमे से बचने के लिए अपनी कभी न पूरी होने वाली इच्छाओं पर लगाम लगाएं  और अपने अहम को आगे न आने दें तो यह समस्या उत्पन्न ही नहीं होगी। यदि हम अपने मष्तिष्क को इच्छाओं की गैरपूर्ति की तरफ लगाएं तो असफलता भी श्रेष्ठता का वरदान बन सकती है।
कभी न कभी तो जिंदगी मे नुक्सान हो सकता है अतः उसका सामना करना चाहिए और हमें उस वक्त की सभी भावनाओं का पता होना चाहिए। साथ ही साथ हमें उस सर्वशक्तिमान का आभार भी प्रकट करना चाहिए की उसने हमें असफलता दी जिससे हमें उससे लड़ने की ताकत आई और साथ ही साथ जीवन के मोह माया  और उसके क्षणभंगुर होने का आभास कराया ताकि हम उसके मोह -पाश से निकल सकें।
इस प्रकार जब हम यह प्रबुद्ध रवैया अपनाते हुए इच्छापूर्ति और संतुष्टि की अपनी जनूनी इच्छा छोड़ देंगे ,तब नुक्सान  एक नगण्य  घटना बन जायेगी न  कि हमारी जिंदगी को परिभाषित करने वाला नकारात्मक विचार।
धीरे -धीरे हम अपनी तमाम कमियों को दूर करते हुए अभ्यास द्वारा ऐसी मानसिक स्थिति का अनुभव करेंगे जिसमे शाश्वत शान्ति का वास हमारे अंदर होगा। तब बिना अपनी कमियों और उन के द्वारा उत्पनं असफलताओं से विचलित हुए  ,जिंदगी के सकारात्मक और नकारात्मक परिस्थितियों मे सम भाव रखते हुए ,बिना किसी उमंग और निराशा के ,संतुलित और बेळगाव रहेंगे।