खुश रहने के लिए-१

चीजों को स्वीकारें,जैसे वे घटती हैं:-

जो जीवन हम जी रहे हैं वो एक चमत्कार स्वरुप है और अनेकों आकाशगंगाओं से भरा ये ब्रह्मांड इसका सबूत है।हमारी सोच में वो शक्ति होती है जो कुछ भी संभव कर सकती है और जीवन को वो सब दे सकती है जो हम चाहते हैं क्योंकि हम सभी उस परिपेक्ष्य से आते हैं जो पूर्ण जीवन जीने को महत्व देता है।

जीवन,स्वयं हमें अनेकों बातें सिखाता है और जो भी अनुभव हम जीवन से प्राप्त करते हैं,चाहे वो सुखद हों या दुखद ,हमें कुछ-न-कुछ सिखाते हैं।जीवन में जो कुछ भी घटित होता है उसके पीछे कोई-न-कोई कारण होता है।इसलिए व्यक्ति को प्रत्येक परिस्थिति में खुश रहना चाहिए और अच्छा वक्त आने का इन्तजार करना चाहिए।

कभी-कभी जीवन में हम ऐसे व्यक्तियों से भी मिलते हैं जो हमें प्रभावित कर सकते हैं और हमें जीवन के महत्वपूर्ण पाठ पढ़ा सकते हैं।इस प्रकार हमें एक अच्छा इंसान बनने में,वे हमारी मदद कर सकते हैं।

हमें प्रत्येक क्षण को यादगार बनाने की कोशिश करनी चाहिए।हम सभी अपने जीवन को वैसा ढाल सकते हैं जैसा हम ढालना चाहते हैं।केवल हमें अपने मस्तिष्क का आशावाद का बटन ऑन करने की आवश्यकता है ताकि हमारे जीवन में सकारात्मक विचार उपजें,क्योंकि हमारे दिमाग में उपजे विचार ही हमारे जीवन की धारा को निर्धारित करते हैं।

जहाज इसलिए नहीं डूबते कि उनके चारों ओर पानी है अपितु उन के भीतर पानी भर जाने से डूबते हैं।ठीक इसी प्रकार हम भी असफल हो जायेंगे,डूब जायेंगे यदि हम जीवन की विभिन्न घटनाओं को अपने ऊपर हावी होने देंगे।इसलिए कभी भी अपने आस पास घटने वाली घटनाओं को खुद पर हावी नहीं होने देना चाहिए।

जीवन अनेकों चमत्कारों से भरा है,जो हमारे भीतरी संसार से शुरू होते है और हमारे बाहरी संसार में झलकते हैं।यदि अनेकों विषमताओं के बाद भी हम सोचते हैं कि हम कर सकते हैं तो हमें वह करने से कोई भी नहीं रोक सकता।ये दिमाग की ही बात है।जब हम अपने दिमाग को,अपनी सोच को बदल लेते हैं तो हमारा संसार भी बदल जाता है।

यद्यपि जीवन का प्रत्येक क्षण सुन्दर है,जीवन्त रहने का उत्सव है,तद्यपि उसके दूसरी तरफ चुनौतियाँ और विषमताएं हैं।जिस व्यक्ति ने जीवन में कठिनाइयों का,विषमताओं का सामना नहीं किया वो कभी भी सफल नहीं हो सकता और खुश नहीं रह सकता।

जिसने कठिनाइयों और विषमताओं को भी,सुगमताओं की तरह लिया और इस बात को स्वीकार कर लिया कि जीवन में सम-विषम परिस्थितियां तो आती जाती रहती हैं और साथ ही साथ उन्हें उसी रूप में स्वीकार लिया जैसे वे घटती हैं तो उसने उन के लिए दुखित होना छोड दिया।इस प्रकार उसका जीवन सुखमय और आनंदमय हो गया।इसलिए जीवन में आने वाली प्रत्येक घटना को उसी रूप में स्वीकारें जैसे वे घटती हैं और जो हो गया वो हो गया सोच कर बीती घटनों पर दुखित होते हुए उन्हीं पर न अटकें रहें।आगे बढ़ें,आने वाले कल को संवारें और खुश रहें।