खुश रहने के लिए-२

एक जीवंत सकारात्मक सोच रखें:-

जब हम सकारात्मक सोचते हैं तो हमारे जीवन में सही चीजें,सही लोग और सही परिस्थितियाँ आने लगती हैं।जब हम अपने चारों ओर सकारात्मकता का दबाव बना लेते हैं तो हमारे अन्दर से प्यार,ख़ुशी और प्रकाश का संचार होने लगता है,जो ब्रह्मांड से समान तरह की तरंगों को आकर्षित करता है जो हमें इसी प्रसन्न और प्रकाशित अवस्था में रखने में मदद करती हैं।

हम जानते हैं कि ब्रह्मांड ऊर्जा और तरंगों से मिल कर बना है।हमारे विचार भी केवल तरंगें ही हैं और कुछ नहीं हैं।जब हम अपने विचारों को सकारात्मकता के स्तर तक उठाते हैं तो हमारे विचार चुम्बक की भांति काम करने लगते हैं।इस प्रकार वे ब्रह्मांडीय उर्जा के साथ मिल कर अच्छी चीजों,सही लोगों और अनुकूल परिस्थितियों को आकर्षित करते हैं।यदि हम अपनी भावनाओं को इतना ऊपर उठायें और एक जीवंत सकारात्मक प्रोटोन की तरह सोचें तो हम जीवन की अच्छी बातों और चीजों को आकर्षित कर सकते हैं।

साथ ही साथ ये भी सोचना चाहिए कि केवल वो चाहना जो स्वयं के लिए ही अच्छा हो,पर्याप्त नहीं है क्योंकि इस ब्रह्मांड का प्रत्येक जीव एक दूसरे से किसी न किसी प्रकार से जुडा हुआ है।जब तक हम दूसरों के लिए भी अच्छी बातों की कामना नहीं करेंगे तब तक हम कुछ नहीं पा सकते।वहीँ यदि हम दूसरों के लिए अच्छे की कामना करेंगे तो हमारे अच्छे विचार शीघ्र ही कार्यान्वित हो जायेंगे।दूसरों के जीवन को उठाने में मदद कर हम अपने चारों ओर शीघ्र ही सकारात्मकता की तरंगें पैदा कर लेते हैं।इस प्रकार हमारे अच्छे विचार,अच्छाई को,ख़ुशी को चारों ओर फैलाते हैं जो अंत में लौट कर हमारे पास ही आ जाती हैं।

जो व्यक्ति अपने मित्रों,परिवार के सदस्यों यहाँ तक की अजनबियों की भी मदद करता है वो उन लोगों की अपेक्षा जो ऐसा नहीं करते,ज्यादा प्रसन्नता से भरा जीवन जीता है।दूसरों के प्रति दयालुता हमारे जीवन में एक छोटा किन्तु महत्वपूर्ण सुधार लाती है।जब हम ऐसा करते हैं तो हम न केवल नए दोस्त,रिश्ते बना कर भविष्य के लिए सामाजिक समर्थन प्रणाली को सुदृढ़ करते हैं,बल्कि स्वयं में भी परम आनंद का अनुभव करते हैं।

वस्तुतः हमारा जीवन हमारे हाथों में नहीं अपितु हमारी सोच में है,क्योंकि जैसा हम सोचते हैं वैसा ही ये संसार बन जाता है।इसलिए एक सकारात्मक सोच रखने की जरूरत है ताकि न केवल हम ऐसा कर के अन्यों के जीवन में ख़ुशी भर सकें अपितु स्वयं को भी ख़ुशी दे सकें।

                                                                                         ………………………क्रमशः