खुश रहें-लम्बा जीयें :-

ख़ुशी हमारे जीवन का अंतिम लक्ष्य है। ये हमारे शरीर को आराम और हमारी आत्मा को शांति प्रदान करता है। ये ख़ुशी हमारी आत्मा और शरीर मे ही विद्धमान है ,इसलिए इसे बाहर खोजने की जरूरत नहीं है। ये हमें सांसारिक सम्पति मे नहीं मिलेगी।

अपने अंदर गहरे छुपी हुई इस ख़ुशी को पहचानने और महसूस करने की जरूरत है। ख़ुशी हमारे मष्तिष्क की मनोदशा है। ख़ुशी हमें जीने की इच्छा प्रदान करती है। पर ये हमारी अक्ल पर निर्भर है। आनंदित व्यक्ति एक लम्बी और स्वस्थ जिंदगी जीते हैं। उनको बीमारियां भी कम होती हैं। उनको गठिया,मधुमेह  और दिल सम्बन्धी बीमारियां कम होती हैं। उनको शरीर मे कम प्रदाह की शिकायत होती है जिससे उनको चिरकालिक (क्रोनिक)बीमारियों का खतरा भी कम होता है।

ये सब हमें हमेशा रहने वाली ख़ुशी (चिरकालिक ख़ुशी) से ही मिल सकता है। ये हमें अपना काम संतोषजनक रूप से या समाज की मदद कर के ही मिल सकती है। विभ्भिन अध्ययन बताते हैं की नकारात्मक सोच रखने वाले,सदा दुखी रहने वाले ,निराशावादी व्यक्ति कम उम्र मे ही मर जाते हैं क्यूंकि उनको बीमारियों का खतरा ज्यादा होता है।

खुश रहने से हमारा इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली ) मजबूत होती है जिससे असंख्य बीमारियाँ हमसे दूर रहती हैं। हमारी मनोदशा के हिसाब से ही हमारे अंदर शारीरिक परिवर्तन होते हैं। पता चला है कि हमारी भावनाएँ ,कैंसर ,एच आई वी ,दिल सम्बन्धी बीमारियों की बढ़ोतरी मे सहायक हैं। ख़ुशी हमारी प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है और साथ ही साथ हमारी प्रोडक्टिविटी और क्रिएटिविटी को भी बढ़ाता  है।

किसी की प्यार की झप्पी हमारी प्रतिरोधक क्षमता  और वायरस एवं अन्य बीमारियों से लड़ने की हमारी क्षमता को बढ़ा कर ,जादू की झप्पी का काम कर सकती है।

जब हम ध्यान लगाते हैं और रिलैक्स महसूस करते हैं तो हमारे मष्तिष्क के बाहिने (लेफ्ट)प्रीफ्रंटल लोब  की गतिविधि बढ़ जाती है। इसलिए हमारे दिमाग के इस हिस्से को हैप्पी ब्रेन भी कह सकते हैं। खुश रहना हमारे दिमाग की अन्य गतिविधियों को भी प्रभावित करता है।

जब हम तनावग्रष्त होते हैं तो समस्याओं को सुलझाने की हमारी शक्ति कम हो जाती है जबकि इसके विपरीत ख़ुशी की अवस्था मे हम समस्याओं को चटकी बजाते ही सुलझा सकते हैं। खुश रहने से नकारात्मक विचार ,डर और गुस्सा आदि भावनाएं कम होती हैं। खुश रहने पर वही परिस्थितियां हमें अच्छी  और आशा जनक लगने लगती हैं जो हमें आशारहित और फीकी लगती हैं।

खुश रहने से दिल की धड़कन सामान्य होती है ,ब्लड प्रेशर ठीक होता है और हमारा कार्डियोवैस्कुलर  सिस्टम  ढंग से काम करता है।

खुश रहने के उपाय :

  1. नियमित व्यायाम : यह हमारी शारीरिक और मानसिक सेहत बनाता है। हम खुश और संतुष्ट महसूस करते हैं। और हम काम बीमार पड़ते हैं। कम से कम सवेरे उठ कर घूमना तो जरूर चाहिए।
  2. सकारात्मक रहें  :हमेशा आशावादी रहे और अपने दिमाग के अंदर निराशाजनक विचार न आने दें। ऐसे लोगों की संगत से दूर रहे जो निराशावादी हैं और हमेशा ऐसा ही बोलते भी हैं। हमेशा खुश रहे और वक्त वक्त पर अपने खुशनुमा इतिहास को याद करते रहे, जब भी आप उदास महसूस करें
  3. हर दिन का आनंद लें :दिन की छोटी से छोटी बातों और घटनाओं का आनंद लें और बड़ी ख़ुशी का इन्तजार न करें। सभी उत्सव ,जन्मदिन  और अपनी उपलब्धि  अपने परिवारजनो के साथ  मनाएं।एक एक साथ भोजन बनाएं और साथ आनंद ले के खाएं।
  4.  गहरी नींद :हर रोज कम से कम ७-८ घंटे की   गहरी नींद लें।  सभी परेशानियों को त्याग कर सोएं। कम नींद लेने से नकारात्मक विचार ,तनाव ,खराब मूड  पैदा होते हैं जबकि अच्छी और गहरी नींद सकारात्मक सोच और ख़ुशी पैदा करती है।
  5. उदार बनें :हमेशा दूसरों की मदद करें ,पैसे से ,वक्त से या सलाह दे कर। दूसरों को ख़ुशी दे कर जो ख़ुशी हासिल होती है वह हमेशा रहती है।

अतः अपने कार्य ,अपने जीवन ,अपने समाज मे अपनी दिलचस्पी पैदा करें। ज्यादा से ज्यादा दूसरों की मदद करें और खुश रहें।