जरा सोचिये:१

स्वच्छता हमारे जीवन का प्रमुख अंग है।फिर चाहे वो अपने घर की स्वच्छता हो,अपने आस-पास के परिवेश की अथवा स्वयं के भीतर की।स्वच्छ वातावरण में ही शरीर स्वस्थ रह पाता है।

हम नित्य ही अपने घर की सफाई आदि करते हैं।कोई भी दिन ऐसा नहीं जाता जब हम ऐसा न करते हों।सवेरे उठ कर हम अपने शरीर की भी सफाई,मंजन,शौच,नहाने आदि के द्वारा करते हैं।साथ ही साथ हम इस बात का भी पूरा ख्याल रखते हैं कि कोई अथवा हम स्वयं अपने घर में गंदगी न फैलाएं।

पर जब हमारे आस पास के परिवेश की बात आती है तो हम ये सब बातें भूल जाते हैं कि साफ़ सफाई रखना कितना जरूरी है।अक्सर लोग पान खा कर उसकी पीक सड़क पर अथवा यहाँ वहाँ थूक देते हैं।यही बात कचरा फैलाने पर भी लागू होती है।हम खा-पी कर बचा हुआ खाना,चीजों के रेपर आदि यहाँ –वहाँ फैंक देते हैं।

वहीँ हममें से कुछ,पुरानी ऐतिहासिक इमारतों को और हमारे पर्यटन स्थलों को भी गन्दा करने से नहीं चूकते।वे दीवारों पर कुछ न कुछ लिखते रहते हैं और उनको गन्दा करते रहते हैं।लोग यहाँ-वहाँ लघुशंका भी करते हैं और गंदगी फैलाते हैं।

जरा सोचिये!क्या यही सब हम अपने घरों में भी करते हैं?क्या हम अपने घर में भी,दीवारों पर कुछ न कुछ लिख कर उनको गन्दा करते हैं?क्या हम घरों में भी पान खा कर यहाँ-वहाँ थूकते रहते हैं?या क्या हम घरों में भी जगह-जगह कचरा फैलाए रखते हैं?

इसका जवाब है–नहीं।पर ऐसा क्यूँ है? क्या हमारे आस पास का परिवेश हमारा नहीं है?क्या हमारा देश हमारा नहीं है अथवा क्या हम अपनी जिम्मेदारी दूसरों पर डाल कर बचे रहना चाहते हैं?जिस प्रकार हम अपने आस पास के परिवेश की साफ़-सफाई की सम्पूर्ण जिम्मेदारी सरकार पर डाल देते हैं,क्या हम अपने घर की भी सम्पूर्ण सफाई की जिम्मेदारी अपने बड़ों पर डाल देते हैं?नहीं न,हम अपनी चीजों की सफाई स्वयं करते हैं।हाँ ये बात और है कि इसमें हमारे बड़े हमारा हाथ बंटाते हैं और सब मिल-जुल कर अपने घर को साफ़ सुथरा रखते हैं।

फिर क्या हमारा फर्ज नहीं बनता कि हम अपने आस-पास के परिवेश को और अपने इस देश या संसार अर्थात् घर के बड़े रूप को,साफ़ रखने में सरकार की मदद करें?पर ऐसी भावना रखने के लिए हमें स्वयं  को भीतर से भी साफ़ रखना होगा।जब तक हम भीतर से स्वच्छ नहीं होंगे,अपनी कामनाओं को नियंत्रित नहीं करेंगे तो हम बाहर से स्वच्छ कैसे होंगे।यदि हमारी भावना ही ठीक नहीं होगी तो हम आस-पास के परिवेश को कैसे साफ़ रख पायेंगे?

साथ ही साथ क्या हमें ये नहीं विचारना चाहिए कि हम एक घर में रहते हैं,जो एक कॉलोनी में आता है,कॉलोनी एक शहर में और शहर एक राज्य में और राज्य एक देश में आता है और देश इस संसार में।इस प्रकार संसार में रहने वाले प्रत्येक मनुष्य का अर्थात् हमारा,क्या फर्ज नहीं बनता कि अपने घर अर्थात् इस संसार को साफ़ सुथरा और स्वच्छ रखें जिस प्रकार हम इसकी एक इकाई अपने मकान को रखते हैं?

जरा सोचिये…?????????????????????????????????????????