जरूरत से ज्यादा सीधा और मासूम नहीं होना चाहिए :-
चाणक्य कहते हैं जिस प्रकार सीधे खड़े पेड़ काट लिए जाते हैं और टेढ़े खड़े पेड़ बच जाते हैं उसी तरह ज्यादा सीधा साधा होना  ठीक नहीं है। चाणक्य की ये बात आज के सन्दर्भ मे कितनी सही लगती है।आज हर कोई एक दूसरे का फायदा उठा कर आगे निकल जाना चाहता है।लोग एक दूसरे की कमजोरियों का फायदा उठाते हैं और दूसरे को बेवकूफ बनाने का और अपना मतलब पूरा करने का कोई भी मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहते।
सीधे साधे आदमी का फायदा उठाना बहुत ही आसान होता है। वह अपने सीधे सादे व्यवहार के कारण जान ही नहीं पाता की उसका फायदा उठाया जा रहा है ।सब उसका फायदा उठाते हैं और
उसको नुक्सान पहुंचाते हैं।वह अपने सीधेपन में उनके हाथों लुटता ही चला जाता है।इसीलिए चाणक्य  ने कहा है कि सीधे खड़े पेड़ काट लिए जाते हैं।
वहीँ यदि हम टेढ़े हैं अर्थात् थोड़े चालाक हैं तो अति शीघ्र समझ जायेंगे कि सामने वाला हमारे को मुर्ख बना रहा है और अपना उल्लू सीधा करना चाहता है।इस प्रकार वो उनके द्वारा नुक्सान उठाने से बच सकता है।इसलिए हमे कम से कम इतना चालाक तो होना ही चाहिए कि कोई हमारा  नाजायज फायदा न उठा पाये ।
पर चालाक होने का मतलब यह नहीं है कि हम भी चालाकी से दूसरे का फायदा उठाने लग जाएँ।यदि ऐसा होने लग जाएगा तो हर कोई एक दुसरे का फायदा ही उठाता रहेगा।  इस बात को कहने से चाणक्य का केवल यही मतलब था कि हम केवल अपने हितों की रक्षा कर सकें और अपने फायदे नुक्सान के प्रति सज़ग रहें ,न कि दूसरों को बेवकूफ बना कर अपना मकसद पूरा करते रहें।
इसलिए खुद सजग रहते हुए और अपने हितों का ख्याल रखते हुए हमें केवल इतना और करना है कि हम  दूसरे के हितों का भी ख्याल रखें। सच्चे मायनों में तभी धरती स्वर्ग बनेगी।