जीवन केवल हमारे द्वारा  ही सर्वोत्कृष्ट रचना बन सकता  है :-

जीवन जीना और उसे सुधारना सबसे बड़ा चमत्कार है :

चमत्कार बनाये नहीं जाते ,वो होते हैं।किसी को भी एक एकल घटना की आवश्यकता नहीं होती जिसे चमत्कार कहा जा सके क्योंकि हमारी पूरी जिन्दगी ही एक चमत्कार से कम नहीं है।

ये निर्भर करता है कि हम जिन्दगी को किस प्रकार से लेते हैं और किस प्रकार से समझते हैं।हम पैदा होते हैं,हमारी अच्छी तरह से परवरिश होती है,हमें पूरी तरह से शिक्षित किया जाता है,हमारे पास रहने के लिए घर ,खाने के लिए खाना है और हमें हमारे परिवार और मित्रों द्वारा प्यार मिलता है।

कहने का तात्पर्य ये है कि हम क्यों हमारी जिन्दगी को बदलने के लिए ,किसी चमत्कार का इन्तजार करते हैं जबकि हमारी पूरी जिन्दगी ही एक चमत्कार है।पैदा होना ही अपने आप में एक चमत्कार है लेकिन जीवन जीना और जिन्दगी का उसके उतार-चड़ाव के साथ आनंद लेना एक बहुत बड़ा चमत्कार है।

हम क्यूँ अपनी और दूसरों की जिन्दगी को समान रूप से आलिंगन नहीं करते अर्थात् समान रूप से नहीं देखते? हम मनुष्य हैं ,हम विकसित हो रहे हैं और हम विचारक हैं।तब क्यूँ हम ऐसे कृत्य करते हैं जो हमें पीछे खींचते हैं और हमें गुमनामी में धकेल देते हैं।

हम ,अपनी सोचों और कृत्यों में ,जो हमारी इच्छाओं और मुसीबतों से ग्रसित हैं ,इतने अंधे हो जाते हैं कि हम भूल जाते हैं कि एक मनुष्य के रूप में हम प्रदाता ,पालनकर्ता और संभल रखने वाले हैं।

हम इस ब्रह्माण्ड में अपनी भूमिका भूल गए हैं।हम बुरी ताकतों और घृणा के वशीभूत हो गए हैं।हम स्वार्थी और अमानवीय हो गए हैं।हम साथ रहना भूल गए हैं।हम भूल गए हैं कि हम उस परमपिता द्वारा निर्मित एक चमत्कार ही हैं।

उसने एक बेहतर विश्व निर्माण के लिए हमें बनाया।उसने हमें सोचने की शक्ति दी और विचार दिए। जिनके द्वारा हम सम्पूर्ण मानव जाति का उत्थान कर सकें।पर हम अपनी व्यक्तिगत स्वार्थी जरूरतों में इतने उलझे हुए हैं कि हम घीरज रखना और दयालु होना भूल जाते हैं।हम निस्वार्थ होना भूल जाते हैं।हम मानवीय और विनम्र होना भूल जाते हैं।हम भगवान् का वो चमत्कार बनना भूल जाते हैं।

इसलिए हम सब को मिल कर खुद को उस चमत्कार में परिवर्तित करने का प्रयास करना होगा ,जिसको हम सब खोजते हैं और जिस के बारे में बातें करते हैं।

एक पूर्ण जीवन जीना,छोटे सपनों को जीने से शुरू होता है:

हर कोई एक अच्छी जिन्दगी की चाह रखता है ,जिसमें जीवन की समस्त अच्छी वस्तुएँ बहुतायत में हों।जब तक हम सबसे अच्छे की तलाश नहीं करेंगे तब तक हम उसे प्राप्त कैसे करेंगे।

अन्य शब्दों में हमें मात्र जीवित रहने में संतुष्ट होने की बजाय ,एक पूर्ण जीवन जीने और उसका आनंद लेने के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए।जीवन अत्यधिक उत्साह और असीम क्षमताओं से भरा है ताकि हम जो हम देख सकते हैं या सोच सकते हैं ,उससे परे जा सकें।

जीवन जीना सीखना उतना ही सरल है जितना उसे भूलना।केवल हमें यह देखना होगा कि हमारे पास जो कुछ है ,उसका हम बेहतर इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं।

जो कुछ भी योग्यता हमारे पास है,उसको अपने जुनून के क्षेत्र में कार्यान्वित करने से हम अपने लक्ष्य के और भी करीब हो जाते हैं।धीरे –धीरे हम अपने लक्ष्य को और भी पास और स्पष्ट देख सकते हैं।

हमें ये सुनिश्चित करना चाहिए कि अपने जीवन के अन्तकाल में ये खेद न रहे कि हम वास्तव में जीए ही नहीं।

हर दिन हम सपने देखते हैं ,कुछ शीघ्र ही सच हो जाते हैं और कुछ के लिए कठिन मेहनत और वक्त की जरूरत होती है।हमें जीवन की शुरुआत सरल सपनों को पूरा करने से शुरू करनी चाहिए और धीरे-धीरे हम देखेंगे कि हमारे कठिन सपने भी सच हो जायेंगे।

भगवान् बुद्ध ने कहा था ,”सच्चाई के रास्ते पर व्यक्ति दो गलतियाँ करता है …या तो उसके लिए पूरी तरह से प्रयत्न नहीं करता,या शुरुआत ही नहीं करता।”

इसलिए जो संभव है और जरूरी है उससे शुरुआत करने की जरूरत है ताकि एक लम्बी और रोमांचक यात्रा की शुरुआत हो सके।

हमें अपने लक्ष्य तक शीघ्र और सुरक्षित पहुँचने के लिए शांत रहना चाहिए :

जब हम कहते हैं ‘हमें अपना दिमाग शांत रखना चाहिए ‘तो उसका अर्थ यह होता है कि हम स्वयं को किसी भी प्रकार की नकारात्मक सोच से आजाद और साफ़ रखें,जिससे हम किसी भी हानिकारक स्थिति से बच सकें।

हमारे व्यवहार में जो सबसे महत्वपूर्ण है वो ये है कि हम ऐसा कुछ न करें या बोलें जो न केवल दूसरों को पीड़ा दे बल्कि देर-सवेर हम पर ही पलटवार करे।

हमें खुद को हमेशा यह याद दिलाते रहना होगा कि हम उतने ही अच्छे हैं जैसा हम सोचते या करते हैं।

महात्मा गाँधी ,नेल्सन मंडेला और अन्य ऐतिहासिक व्यक्तियों के बेहद ही शांत दिमाग थे और उन्होंने अपने इस गुण का बेहतरीन इस्तेमाल मनुष्य जाति की सेवा के लिए खुद के आजीवन बलिदान के बाद ,आराध्य व्यक्ति के रूप में बदलने के लिए किया।

वे अन्याय,असमानता और गुलामी को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं कर सकते थे और न ही स्वयं इसमें शामिल हो सकते थे।वे मानते थे कि हम सभी एक अच्छी जिन्दगी और वातावरण,जो हमें हमारे जीवन के विशेष कार्यों को करने में मदद करें,के हकदार हैं।

इसीलिए पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति वूड्रो विल्सन ने ये कहा था,”एक शांत निर्णय जल्दबाजी में की गयीं एक हजार सलाह के बराबर है।जो करने योग्य है वो है प्रकाश की आपूर्ति करना न की गर्मी की।”

केवल वही व्यक्ति जो शांत और स्थिर रह सकता है ,जीवन की किसी भी लड़ाई और सभी परिस्थितियों में औरों का नेतृत्व करने की आशा कर सकता है।

जिस पल हम अपने आप को शांत नही रख सकते,उस पल हम अपने आप से लड़ रहे होते हैं और इस प्रकार हम एक सुअवसर गवां देते हैं।शान्ति किसी भी व्यक्ति को ये सोचने की काबीलियत देती है कि क्या सही है और क्या गलत।

ये हमें हमारे आत्मविश्वास और परिपक्वता  के  निर्माण  में मदद करता है जिसके द्वारा हम समझदारी से कार्य करते है और अपने लक्ष्य तक शीघ्र पहुँच जाते हैं।

शांत दिमाग वाले व्यक्तियों के बारे में ब्रिटिश दार्शनिक जेम्स एलन का कहना था,”मन की शान्ति ,ज्ञान का एक बहुत ही सुन्दर गहना है।”हमारी जीवन यात्रा बेहद सुचारू रूप से चलेगी यदि हम इस गहने को धारण करेंगे।

जीवन में अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए हमें बड़ा सोचना और उच्च उद्देश्य रखना चाहिए :

मानव के रूप में हम अपनी अत्यधिक सोच और पूर्वाग्रहों के कारण,स्वयं की उन्नति को बाधित करते हैं।

हमें उच्च लक्ष्य रखने चाहियें और हमेशा एक बड़ी तस्वीर के बारे में सोचना चाहिए।मनुष्य सफल होने के लिए ही जन्मा है,और जो बात उसे अन्य जीवों से अलग करती है वो है उसकी खुद की वर्तमान स्थिति से खुद के शारीरिक,मानसिक और आध्यात्मिक रूप से उत्थान की काबीलियत।

ऐसा स्पष्ट लक्ष्य और गंतव्य निर्धारित कर के किया जा सकता है।ब्रह्माण्ड किसी व्यक्ति का ध्यान और समर्पण कई तरीकों से आजमाता है।सफलता सीधे अनुपातिक है इस बात से कि हम इसको प्राप्त करने के लिए कितना प्रयास लगाते हैं।और यह बात जीवन के हर क्षेत्र में लागू है।

अत: यदि हम अपने सपनों को पूरा करने के लिये कड़ी मेहनत करते है,तो हम सफलता के पथ पर हैं।तब हम देखेंगे कि किस तरह ब्रह्माण्ड हमारे पक्ष में कार्य करेगा और हमारी हमारे लक्ष्यों को पाने में मदद करेगा।

ब्रह्माण्ड प्रत्येक सकारात्मक या नकारात्मक विचार पर प्रतिक्रिया करता है।हम में से प्रत्येक को अपनी क्षमताओं का अच्छी तरह इस्तेमाल करना चाहिए और जो भी हम करते हैं उसमें अपना शरीर ,मन और आत्मा लगा देनी चाहिए।

यदि हम इस रणनीति का अनुसरण करेंगे तो ब्रह्माण्ड हमारे लिए कार्य करेगा।जैसे-जैसे हम अपने ध्यान को अपने लक्ष्यों की ओर तीव्र करते है,वैसे-वैसे हमारे सकारात्मक विचार और कृत्य ,ब्रह्मांडीय ताकतों को हमारी तरफ आकर्षित करते हैं।इस तरह हमें अपना जीवन पूर्णता से जीने में मदद मिलती है।

हमें अपने पिछले कर्मों को साफ़ करना होगा और उच्च उद्देश्यों के लिए कार्य करना होगा ताकि हमें ब्रह्माण्ड का सम्पूर्ण सहयोग प्राप्त हो।

यदि हमारा लक्ष्य और विचारधारा ,अच्छे कर्मों के द्वारा समर्थित हैं,तो कोई भी हमें उन लक्ष्यों को प्राप्त करने से नहीं रोक सकता ,जो हमनें अपने लिए निर्धारित किये हुए हैं।

हम न केवल अपने आस-पास के व्यक्तियों द्वारा ,अपितु स्वयं की नजरों में भी सम्मान प्राप्त करेंगे।सबसे महत्वपूर्ण है कि हम पहले स्वयं को सिद्ध करें कि हम सबसे बेहतर हैं।

अत: केवल हम ही अपने जीवन को सर्वोत्कृष्ट रचना बना सकते हैं:

हमारी जिन्दगी भगवान् द्वारा दिया गया तोहफ़ा है और जो हम स्वयं को बनाते हैं वो हमारे द्वारा परमात्मा को दिया गया वापसी उपहार है।हमारे विचार,हमारे जीवन निर्माण में,महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।जिस प्रकार एक ही हवा किसी कश्ती को पूर्व दिशा में और किसी को पश्चिम में ले जाती है,उसी प्रकार हमारे विचारों में भी वो ताकत होती है कि वो हमें ऊपर उठा दें या नीचे खींच लें।

किसी व्यक्ति की सफलता ,उसकी इच्छाशक्ति और निष्ठा पर निर्भर करती है।जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है।केवल कठिन मेहनत और दृढ़ता ही किसी मनुष्य को उसके लक्ष्य तक पहुँचने योग्य बनाती है।

हमारी प्रत्येक नकारात्मक सोच हमको सफलता के पथ से दूर ले जाने की क्षमता रखती है। वहीँ हमारी प्रत्येक सकारात्मक सोच,हमको उस प्रत्येक वस्तु और लक्ष्यों के समीप ले जाने की क्षमता रखती है ,जिनको हम पाने की इच्छा रखते हैं।

खुद पर विश्वास,हमको वो बनने में मदद करता है जो बनने का सपना हम देखते हैं।हमें असफलता से डरना नहीं चाहिए।बल्कि सुस्त बनने से डरना चाहिए।

विश्व के कई महान व्यक्तियों ने खुद को दृढ संकल्प,प्रगति और बदलाव का उदाहरण बनाते हुए इतिहास रच दिया।उनकी उपलब्धियाँ आने वाली कई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत्र हैं।

अत: अगली बार जब हम किसी प्रतियोगिता को पास करने या अपने सपने के कैरियर को पाने की अपनी योग्यता पर शक करें तो हमें याद रखना होगा कि कठिन मेहनत और ईमानदारी ही इस यात्रा में हमारे सबसे अच्छे साथी हैं।

जो हम हो सकते हैं या जो हम कर सकते हैं ,उस पर प्रतिबन्ध न लगा कर ,केवल हम ही अपनी जिंदगी को एक सर्वोत्कृष्ट रचना बना सकते हैं।

हमें हमेशा ये ध्यान रखना होगा कि जिन्दगी की लडाइयां हमेशा योजना के हिसाब से नहीं जातीं।देर-सवेर वो व्यक्ति ही जीतता है ,जो सोचता है कि वो कर सकता है।