जीवन कैसे जीयें:१

प्रेम और सौहार्द की राह चुनें:-

इस भौतिक संसार में जहाँ शैतानी और द्रोही ताकतें अपने बाधा पहुंचाने वाले स्वभाव और कृत्यों के साथ चहुँ ओर व्याप्त हैं,वहीँ प्रेम,सौहार्द और शान्ति देने वाली शक्तियाँ भी अपने विभिन्न रूपों में चहुँ ओर विद्यमान हैं।

जहाँ शैतानी ताकतों के लिए प्रेम और सौहार्द अभिशाप है और वो इनको प्रतिक्षण नष्ट करने का प्रयत्न करती रहती हैं,वहीँ दैवीय ताकतें हमें इनसे बचाने और प्रेम,सौहार्द को बनाए रखने की शक्ति प्रदान करती हैं।

भगवान् ने अपनी सभी संतानों को ये शक्ति प्रदान की हुई है कि हम कौन सा रास्ता चुनते हैं।एक रास्ता प्रेम और सौहार्द का है तो दूसरा घृणा ,द्वेष और क्रोध का है।परोपकार करने अथवा किसी का नुक्सान करने,दोनों तरह की ही प्रवृतियाँ,हम सभी में स्वाभाविक रूप से निहित होती हैं।हम सभी अपने विवेक और ज्ञान के स्तर के मुताबिक़ दोनों में से एक निश्चित पथ चुनते हैं।

घृणा,द्वेष,क्रोध,लालसा और भौतिकता का रास्ता लुभावना होता है और इस पर जाना हमें आसान,और हमारी इन्द्रियों को सुखदायी लग सकता है।हम अक्सर भौतिक वस्तुओं में सुख तलाशते हैं और इन्द्रियों का सुख हमें सुख प्रतीत होता है।कभी-कभी विवेकशुन्यता के कारण और ज्ञानीजनों की अल्पभाषिता के कारण भी व्यक्ति सत्य से अनजान रह कर भौतिक सुखों की ओर मुड़ जाता है।

भौतिक वस्तुएँ हमें तुरंत सुख तो प्रदान करती हैं परन्तु ये सुख क्षणिक होता है और चिर-स्थाई नही होता।इस तरह की राह पर चलना आसान लग सकता है पर ये रास्ता अंत में बदनामी की ओर ले जाता है जहाँ हमारी कोई इज्जत नहीं होती और कोई हमें प्रेम नहीं करता।

वहीँ सदाचार,प्रेम,सौहार्द का रास्ता बहुत ही कठिन और चुनौतीपूर्ण होता है।ये हमारी इन्द्रियों को बिलकुल भी नहीं भाता और व्यक्ति इन्द्रियों के वशीभूत हुआ सरल मार्ग पकड़ लेता है जो ऊपर वर्णित किया गया है।

पर ये इन्द्रियाँ हमें गिराने वाली होती हैं।जिन लोगों ने अपनी इन्द्रियों को अपनी आत्मा के काबू में कर लिया और जितेन्द्रिय हो गए,वे व्यक्ति हमेशा कठिन और चुनौतीपूर्ण रास्ता,जो सदाचार,इमानदारी,प्रेम,सौहार्द का है,अपनाते हैं और अंत में प्रतिष्ठा और यश के भागी होते हैं।समस्त संसार उनको याद रखता है और वो मर कर भी अमर ही रहते हैं।

हमें हमेशा ये याद रखना चाहिए कि जिस प्रकार लोहा गर्म हुए बिना और हथोड़े की चोट खाए बिना,एक सुन्दर प्रतिमा में नहीं ढल सकता,उसी प्रकार व्यक्ति यदि इन चुनौतियों और कठिनाईयों का सामना नहीं करेगा और सद्मार्ग पर नहीं चलेगा,तो वह महानता को कैसे प्राप्त होगा।

जीवन का महान उद्देश्य जो जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो कर मोक्ष को प्राप्त करना है,उसे कैसे मिलेगा,यदि वो भौतिकता के जाल में ही उलझा रहेगा और आध्यात्मिकता की ओर नहीं मुड़ेगा।

अमेरिकी कवि एंजेला मॉर्गन कहती हैं कि केवल शक्तिशाली झटकों की चोट और प्रकृति द्वारा बेरहमी-पूर्वक उत्तम बनाए जाने के बाद ही कोई व्यक्ति इतना महान बन कर उभरता है कि समस्त संसार उसकी प्रशंसा करता है।अत: प्रेम,सौहार्द और सचाई का रास्ता चुनें,सद्मार्ग पर चलें क्योंकि दैवीय क़ानून भी यही है कि सच्चाई,प्रेम और सद्गुण बरकरार रहने चाहियें।…………………….क्रमशः