जीवन कैसे जीयें:२

जीवन की छोटी-छोटी बातों में ख़ुशी खोजें:-

ये कहावत है कि हमारे जीवन की अनेकों समस्याएँ केवल सादा और सरल जीवन जीने से ही हल हो जाती हैं।इसका ये अर्थ कदापि नहीं है कि हम अपनी भौतिक जरूरतों को पूर्ण रूप से त्याग दें और तपस्वियों का जीवन जीना शुरू कर दें।सादा और सरल जीवन जीने से यहाँ अभिप्राय केवल अपनी अनावश्यक जरूरतों को घटाना मात्र है।

हमारे जीवन में ज्यादातर समस्याएँ तब आती हैं जब हम अपनी चादर के बाहर पैर पसारने लगते हैं अर्थात् जितना हमारे पास है उससे ज्यादा खर्च करने लगते हैं और अपनी सामर्थ्य के परे जा कर जीवन जीने की कोशिश करने लगते हैं।

ऐसा तब होता है जब हम अपने सगे-सम्बन्धियों को,अपने मित्रों को,अपने आस-पास के व्यक्तियों को उच्च भौतिक जीवन स्तर जीते हुए देखते हैं और ऐसे जीवन की नक़ल करने के चक्कर में अपनी क्षमता से अधिक खर्च करने लगते हैं और इस की पूर्ति के लिए कर्ज लेकर कर्ज के जाल में फंस जाते हैं।कभी-कभी हम ऐसा अन्यों को प्रभावित करने अथवा स्वयं बेहतर दिखने के लिए भी करते हैं।

जबकि वास्तव में ऐसा करने की कोई आवश्यकता नहीं होती।हमें दूसरों के जीवन स्तर को देख कर उनके जैसा होने की अथवा किसी को प्रभावित करने के लिए या अन्य किसी कारण से,अपनी क्षमता से बाहर जा कर खर्च करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।हम जैसे हैं,वैसे ही अच्छे होते हैं।लोग हमें हमारे गुणों के कारण पसंद करते हैं न कि हमारे रहन-सहन के उच्च स्तर के कारण।

जब हम जीवन की छोटी-छोटी बातों में भी खुश हो सकते हैं,जैसे एक सामान्य और सरल पारिवारिक मिलन में,तो हमें दूसरों को दिखाने के लिए महँगे होटलों में खाना खाने अथवा पारिवारिक समारोहों में फिजूल खर्ची करने की क्या आवश्यकता होती है।

वास्तव में हमें जीवन की छोटी-छोटी बातों में खुश रहना और ख़ुशी खोजना सीखना चाहिए।जीवन में ख़ुशी इस बात से है कि हम अपने परिवार के साथ कितना समय बिताते हैं,अपने सगे सम्बन्धियों की खुशियों में कितना शरीक होते हैं अथवा अपनी छोटी-छोटी उपलब्धियों पर कैसे खुश हो सकते हैं या सबसे महत्वपूर्ण है कि अन्यों की खुशियों और उपलब्धियों में उन के साथ कैसे खुश हो सकते हैं।

न तो हमें दूसरों को देख कर उन जैसा बनने का सोचना चाहिए और न ही उनसे उनकी उपलब्धियों के कारण घृणा और ईर्ष्या ही करनी चाहिए।जब हम छोटी-छोटी बातों में ख़ुशी खोज सकते हैं और जो कुछ भी भगवान् ने हमें आशीर्वाद स्वरुप दिया है,उसमें संतुष्ट रहते हुए अपनी क्षमता अनुसार जरूरतमंदों की मदद कर सकते हैं तो हमें ऐसा ही करना चाहिए क्योंकि इस से बढ़ कर उच्च जीवन कोई ओर नहीं हो सकता।

उच्च भौतिक जीवन जीने से अच्छा है हम,उच्च आदर्शों वाला आध्यात्मिक जीवन जीयें और औरों को खुश रखते हुए जीवन की छोटी-छोटी बातों में खुश रहें।हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि महात्मा गाँधी,लाल बहादुर शास्त्री और ऐ० पी० जे० अब्दुल कलाम जैसे व्यक्ति भी अपने सादा जीवन उच्च विचार वाली सोच के कारण ही महान बन पाए।..…………………………………………………………………………………..क्रमशः