जीवन कैसे जीयें:३

खुशियों भरा छोटा जीवन भी एक बड़े और स्वार्थी जीवन से बेहतर है।:-

बलूत का पेड़ लम्बे समय तक जीता है और बहुत मजबूत होता है।वह बुरे से बुरे तूफानों और बाढ़ों को भी झेल सकता है।पर वह अपनी पुरानी पत्तियों को आसानी से जाने नहीं देता,जबकि बाकी पेड़ ख़ुशी-ख़ुशी अपनी पुरानी पत्तियों को झड जाने देते हैं ताकि उनकी जगह नईं पत्तियाँ और फूल ले सकें।

हम में से अधिकाँश उस बलूत के पेड़ के ही समान ही करते हैं।हम बलूत के पेड़ की तरह ही अपनी स्वार्थी इच्छाओं से चिपके रहते हैं और इस तरह न केवल स्वयं बल्कि औरों के लिए भी आगे बढ़ना और विकसित होना मुश्किल बना देते हैं।

ज्यादा से ज्यादा ताकतवर और धनवान बनने के लिए,ताकि हम अपना जीवन बेहतर जी सकें और जिस पर हमारी आने वाली पीढ़ी गर्व कर सके,हम भरपूर प्रयास करते हैं।हालांकि ऐसा करना और पैसा कमाना कोई बुरी बात नहीं है।हमें जीवन-यापन के लिए धन की आवश्यकता होती है।पर जरूरत से ज्यादा इकठ्ठा कर के रखना और खासतौर पर तब जब वो स्वयं की महिमागान के लिए हो,एक पाप की तरह ही है।क्योंकि इतने धन की न तो आपको आवश्यकता होती है और न ही आप के पास इकठ्ठा होने के कारण ये धन किसी अन्य के काम आ सकता है।

सच्चाई यही है कि जिस तरह तगड़ा बलूत का पेड़ भी अंत में मर जाता है और एक ठूंठ मात्र रह जाता है,उसी प्रकार हम सभी का अंत भी निश्चित ही है,चाहे हम कितनी भी ताकत पाने और भौतिक वस्तुओं के संचय में और उनकी इच्छाओं में उलझे रहें।बलूत के पेड़ के मुकाबले लिली के फूल का जीवन यद्यपि छोटा होता है और ये केवल एक ही दिन खिलता है और रात होते ही ढल जाता है,फिर भी इस की खूबसूरती को निहारना प्रसन्नता का एक अच्छा जरिया है।

कहने का अर्थ ये है कि एक स्वार्थी जीवन जीने की अपेक्षा,जिसमें हम केवल अपने ही विषय में सोचते हैं दूसरों के बारे में नहीं और ऐसा करने के लिए हम दूसरों को अपने पैरों तले कुचलते हुए आगे बढ़ते जाते हैं,एक ऐसा जीवन जीना जिसमें हम अन्यों के बारे में सोचते हैं,अपने विकास के साथ उनके विकास के बारे में भी सोचते हैं,ज्यादा बेहतर है क्योंकि जहाँ स्वार्थी जीवन अंततः हमें दुनिया से अलग-थलग और एकांकी कर देता है,वहीँ परोपकारी,परमार्थी और सबको साथ ले कर चलने वाला जीवन,हमें सच्ची ख़ुशी प्रदान करता है।एक ऐसी ख़ुशी जो हम सब के साथ साँझा करते हैं।

जीवन का वास्तविक आनंद जीवन की छोटी-छोटी बातों में ख़ुशी खोजना है और ऐसी ख़ुशी तभी आती है जब हम केवल अपने विषय में ही न सोच कर सम्पूर्ण जगत के बारे में सोचते हैं।ऐसा ख़ुशी भरा जीवन,चाहे छोटा भी क्यूँ न हो,उस जीवन से लाख दर्जे बेहतर है जिसमें हम एक बंजर,एकांकी इमारत की तरह,अकेले एक लम्बा जीवन जीते रहते हैं।इसलिए चाहे जितना भी जीवन हम जीयें वह परमार्थ भरा और सब को साथ ले कर चलने वाला होना चाहिए।…………………………………………………………………………………………………………………..क्रमशः