जीवन कैसे जीयें:४

जीवन के प्रत्येक क्षण का अनुभव करें,उसे उत्सव की तरह मनाएँ और सम्पूर्णता से जीयें:-

त्यौहार न केवल हमारे आध्यात्मिक विकास के लिए अच्छे होते हैं अपितु ये हमारी जीवन यात्रा को एक उद्देश्य और अर्थ भी प्रदान करते हैं।उत्सव एक माध्यम हैं जो हम में ख़ुशी और आशा का संचार करते हैं,जब हम उन्हें मनाते हैं।किसी भी त्यौहार को मनाना,हमें एक तरह की गहनता देता है और हमारे भीतर ख़ुशी और उम्मीद पैदा करता है।वास्तव में जिस तरह से हम त्योहारों को सफलता से मनाने के लिए कार्य करते हैं,वे हमें हफ़्तों का मनोवैज्ञानिक जीवन प्रदान करते हैं जिससे हम स्वयं को सौभाग्यशाली और प्रसन्न महसूस करते हैं।

साधारणतया हम उत्सव किसी ऐतिहासिक घटना या अपने जीवन के किसी महत्वपूर्ण दिवस या विश्व-शान्ति और सौहार्दता दिवस के रूप में मनाते हैं।उत्सव एक साथ मिलकर काम करने और सम्पूर्ण समाज के कल्याण के लिए एकजुट होने के लिए एक आदर्श मंच तैयार करते हैं।उत्सव न केवल पड़ोसियों को पास लाते हैं अपितु ये रचनात्मकता भी बढाते हैं।साथ ही साथ ये हमारे मानसिक उत्थान के लिए भी जिम्मेदार हैं और इस प्रकार ये समाज को रहने के लिए एक बेहतर जगह बनाते हैं।

जब उत्सव हमारे जीवन में इतने सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं तो क्यों न हम प्रत्येक दिवस को,बल्कि प्रत्येक क्षण को त्यौहार की भांति देखें?इसके लिए हमें इस तरह की मानसिकता को विकसित करने की आवश्यकता है जिसमें हम अपने जीवन में आने वाले प्रत्येक क्षण को उत्सव की भांति देख सकें अर्थात इस के लिए हमें केवल सकारात्मक और आशावादी होने की जरूरत है ताकि हम अपनी इस जीवन यात्रा को सम्पूर्ण रूप से जी सकें और जीवन के प्रत्येक क्षण को अनुभव कर सकें।

जब हम जीवन के प्रत्येक क्षण का अनुभव करते हैं अर्थात् प्रत्येक क्षण का आनंद लेते हैं,उसे उत्सव के रूप में मनाते हैं,तभी हम कह सकते हैं कि हमने अपने जीवन को सम्पूर्णता के साथ जीया है।जीवन में आनेवाली कठिनाइयों और बाधाओं से न घबरा कर आशावादी बने रहने और जीवनपथ पर अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने का अर्थ ही प्रत्येक क्षण को उत्सव की भांति मनाना है और ये ही हमारे जीवन में प्रसन्नता ला कर इसे सार्थक बना सकता है।

जीवन हमें कई बातें सिखाता है,चाहे हम जीवन के अलग-अलग पलों में अलग-अलग काम कर रहे हों।कभी-कभी हम बचकानी हरकतें करते हैं और बाद में वक्त गुजरने के साथ ही या तो हम उन पर हँसते हैं या उन को याद कर गंभीर हो जाते हैं।पर ये सच है कि हम अपने प्रत्येक अनुभव से कुछ-न-कुछ सीखते हैं जिससे हम स्वयं के बारे में क्या पसंद करते हैं,ऐसी सोच विकसित कर सकते हैं।

इस प्रकार जीवन के प्रत्येक क्षण का अनुभव,हमारी आदतों,प्राथमिकताओं,लोगों के साथ हमारे विचार-विमर्श के तरीकों और यहाँ तक कि हमारी समझ को भी आकार देता है।वास्तव में हम सभी,हमारे अनुभवों का ही जोड़ हैं,इसलिए प्रत्येक अनुभव हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और मूल्यवान है।

आज हम जो कुछ भी हैं,वह हमारे अनुभवों और इस बात पर निर्भर करता है कि हम स्वयं को किस रूप में ढालना चाहते हैं।यदि हम अपने अनुभवों द्वारा ठीक से सीखने की प्रक्रिया को ठीक से पोषित करें तो न केवल हम अपने भूतकाल के अनुभवों से सीख कर अपनी गलतियों को सुधार सकते हैं अपितु भूतकाल के रूचिपूर्ण कार्यों  को फिर से कर के तरक्की को प्राप्त कर सकते हैं।इस प्रकार अपने अनुभवों से सीख कर और अपने लक्ष्यों की प्राथमिकता,अपनी क्षमताओं का आंकलन व अपने अनुभवों का मूल्यांकन कर हम अपना लक्ष्य निर्धारित कर पाते हैं।

इस प्रकार हम सीखते हैं कि हम जीवन से क्या चाहते हैं,हमें किस चीज से प्रसन्नता मिलती है और क्या करना हमें सफलता की ओर ले जाता है।वास्तव में अनुभवों से सीखना अर्थात् प्रत्येक अनुभव को उत्सव के रूप में मनाने का अर्थ उन अनुभवों को पुन: अपने जीवन में उतारना है।

जीवन और मृत्यु की सच्चाई जब हमारे समक्ष आती है तब हम और भी व्यवहारिक हो जाते हैं और सोचने लगते हैं कि कैसे,जो भी सीमित समय हमें मिला है,उसे और भी सार्थक बनाया जाए ताकि जीवन में सम्पूर्णता का अनुभव हो सके।

दूसरे शब्दों में मृत्यु का विचार यदि सकारात्मक रूप से लिया जाए तो ये हमें ज्यादा शांत और मृत्यु की निश्चितता पर,कम भयभीत करता है।और ये भी हो सकता है कि हम में से कुछ ,इस स्थिति में हों कि मृत्यु का स्वागत जीवन के अंतिम लक्ष्य अर्थात् मुक्ति और जीवन की सच्चाई की प्राप्ति के रूप में करें।

केवल सोचने के लिए,समय देने की जरूरत है।तब हम पायेंगे कि हम चीजों को कितनी बेहतर तरीके से नियंत्रित करते हैं।इसलिए जब हम जीवन के प्रत्येक क्षण का अनुभव करते हैं,उनसे सीखते हैं,और प्रत्येक क्षण का आनंद,उत्सव रूप में मनाते हैं और मृत्यु से भी भयभीत नही होते,तब हम कह सकते हैं कि हम जीवन को उसकी सम्पूर्णता के साथ जी रहे हैं।वास्तव में जीवन के प्रत्येक क्षण का स्वागत,उसे हँसी-ख़ुशी जीना और उसका अनुभव करना ही जीवन में सम्पूर्णता का अर्थ है।

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