जीवन कैसे जीयें:६

ध्यान करें:-

ध्यान जीवन में सकारात्मकता,शान्ति,ख़ुशी लाता है और जीवन के प्रत्येक प्रश्न का उत्तर होता है।हम में से अधिकाँश के लिए ध्यान लगाने का अर्थ है किसी मन्त्र विशेष पर,किसी चिन्ह पर अथवा नाम या तस्वीर पर ध्यान लगाना।जैसे ही हम ध्यान लगाने और केन्द्रित होने की कोशिश करते हैं वैसे ही हमारा मस्तिष्क दूसरी दिशा में भटकने लगता है।

मस्तिष्क के संग समस्या ये है कि जितना ज्यादा हम इसे किसी वस्तु विशेष की ओर केन्द्रित करने की कोशिश करते हैं उतना ज्यादा ये बिखरने लगता है।इस प्रकार मस्तिष्क में एक द्वन्द सा चलने लगता है।पर जब हम बाहर ध्यान केन्द्रित करने की बजाय,अपने भीतर झांकते हैं और खुद को बहुत बारीकी से निहारते हैं तो हमें एक शान्ति का अनुभव होने लगता है।

ध्यान का वास्तविक अर्थ है,स्वयं का अपने मस्तिष्क पर नियंत्रण।अर्थात् अपनी चेतनाओं को केवल एक विचार पर केन्द्रित करना–अपने दिल में बसे उस दिव्य प्रकाश पर।

पहले-पहल जब हम ऐसा करने की कोशिश करेंगे तो अनेकों विचार हमारे मस्तिष्क में आयेंगे।हम उनसे विक्षुब्ध भी हो जायेंगे पर हमें ये स्वीकारना ही होगा कि हमारा मस्तिष्क व्यर्थ के विचारों से भरा होता है और ये विचार हमारे वर्तमान और भूतकाल में भटकते रहते हैं।पर धीरे-धीरे हम ये सीख जायेंगे कि जिस तरह हम चलचित्र को देखते हैं उसी भांति इन विचारों को भी आने –जाने देना है और केवल आते जाते देखना है।

जब हम ऐसा करेंगे तो हम जान जायेंगे कि कैसे शांत रहना है और मस्तिष्क को अवांछित विचारों से दूर रखना है।धीरे-धीरे हम पायेंगे कि हमारे मस्तिष्क में जमा विचारों की धूल छंट जायेगी और हमें एक मौन की ओर ले जायेगी,जहां हमें अपने सभी सवालों के जवाब ,ख़ुशी और शान्ति मिल जायेगी।

ऐसा प्रार्थना और पूजा द्वारा भी संभव है जो हमें ध्यान की अवस्था तक पहुंचाते हैं।जब हम भगवान् से प्रार्थना करते हैं कि हमारी सभी इच्छाएं पूरी हो जाएँ और हमारे दुखों का अंत हो सके,और उस दिव्य प्रकाश पुंज पर ही अपना ध्यान केन्द्रित रखते हैं तो हमारे मस्तिष्क में आने वाले व्यर्थ के विचार स्वयंमेव ही शनैः –शनैः समाप्त होने लगते हैं और हम पाते हैं कि हम अधिक प्रसन्न और उर्जावान हो रहे हैं।

ध्यान द्वारा हम पाते हैं कि हम तनावरहित होने लगे हैं।भगवान् के प्रति हमारी आस्था हमें सकारात्मक और रचनात्मक बनाने लगी है।इस प्रकार ध्यान द्वारा केन्द्रित हुए हम,सकारात्मकता से भरे,शांत और आनन्दित जीवन जी सकते हैं।.क्रमशः