जीवन कैसे जीयें:७

उद्देश्यवान रहें और प्रत्येक चुनौती का सामना गरिमा और योग्यरूप से करें :-

हम जो कुछ भी जीवन में करते हैं या करना चाहते हैं,उस पर हमारा नियंत्रण होना बहुत आवश्यक है।इसी प्रकार हमारी भावनात्मक जिन्दगी में भी नियंत्रण का होना बहुत आवश्यक है।जिन्दगी की दौड़ में,किसी का अनुसरण करना,किसी की अगुवाई करना अथवा किसी को अपने साथ ले कर चलना बहुत आनंददायक लगता है।पर इस दौड़ में कभी कोई हमसे आगे निकल सकता है या कोई हमसे पीछे रह सकता है।पर किसी भी हालत में हमें अपने उद्देश्य से भटकना नहीं है और अपना विश्वास बनाए रखना है।

भगवान् ने हमें बनाया है ताकि हम उसे जान सकें,उसे प्यार कर सकें,उस के साथ न केवल इस जीवन में अपितु हमेशा खुश रह सकें।हालांकि हम अपने चारों ओर बुराइयों और शैतानियत को देखते हैं जिसकी वजह से हमें भुगतना भी पड़ता है।ऐसे समय में कुछ व्यक्ति जब पाते हैं कि जीना मुश्किल हो रहा है तो उन्हें जीवन उद्देश्य हीन लगने लगता है।

वहीँ कुछ व्यक्ति जानते हैं कि इन कष्टों से कैसे निबटना है।वे जानते हैं कि “जब सब कुछ मुश्किल हो जाता है,तो भी दृढ व्यक्ति बढ़ता जाता है।अर्थात् उनके लिए जीवन और उनसे जुडी समस्याएं एक चुनौती मात्र हैं और उनसे निबटना इन्हें खूब आता है।

जीवन का अर्थ है–सहना और बने रहने का अर्थात् जीवित रहने का अर्थ है इन कष्टों का प्रयोजन ढूंढना।यदि जीवन का कोई न कोई उद्देश्य है तो कष्टों में भी कोई न कोई उद्देश्य जरूर छुपा होगा।पर कोई अन्य ये नहीं बता सकता कि हमारे जीवन में इन कष्टों का क्या उद्देश्य है।ये हमें स्वयं खोजना होगा और जो उत्तर हम पायेंगे,उस की जिम्मेदारी भी हमारी ही होगी।

कठिन कष्टों में लोग अक्सर अपना आपा खो बैठते हैं और जीवन के उद्देश्य से भटक जाते हैं,पर हमें जीवन के कष्टों और चुनौतियों का गरिमामय हो कर और योग्यरूप से सामना करना चाहिए।लेखक अगाथा क्रिस्टी ने एक बार कहा था “आपके जीवन में जो सबसे भाग्यशाली बात हो सकती है वो है एक खुशहाल बचपन”।अर्थात् प्रत्येक व्यक्ति का बचपन उसके जीवन का सबसे खुशहाल वक्त होता है।क्योंकि उस समय न भूत की और न ही भविष्य की चिंता होती है।उस समय व्यक्ति केवल वर्तमान का आनंद ले रहा होता है।

पर जीवन में अर्थात् बचपन के किसी मोड़ पर ऐसा वक्त भी आता है जब भविष्य के रूप में चिंताएं और चुनौतियां व्यक्ति के जीवन में प्रवेश कर जाती हैं।व्यक्ति भविष्य को लेकर और उन से जुडी चुनौतियों को लेकर चिंताग्रस्त होने लगता है।

वहीँ बुढापे में व्यक्ति भूतकाल की बातों को याद करता है और दुखी रहता है।कहने का अर्थ ये है कि जैसे-जैसे हम जीवन यात्रा पर आगे बढ़ते हैं वैसे-वैसे कदम-कदम पर हमारे सामने चुनौतियाँ आती रहती हैं।कभी-कभी हम इनसे घबरा कर निराश हो जाते हैं।पर यदि हम आने वाली चुनौतियों का झुक कर स्वागत करेंगे तो वही चुनौतियाँ हमें चुनौतियाँ महसूस नहीं होंगी,बल्कि सीखने का जरिया लगेंगी और हम अपे उद्देश्यों से भटकेंगे नहीं।

पर साथ ही साथ हमें इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि ध्येय प्राप्ति की अपनी यात्रा में हमें सावधानीपूर्वक आगे बढ़ना होगा,क्योंकि हमारी थोड़ी सी भी असावधानी,लक्ष्य प्राप्ति के हमारे उद्देश्य को नुक्सान अथवा नष्ट कर सकती है।आजकल की उन्मादी चूहा दौड़ में,एक छोटी सी भी लापरवाही,सफलता को असफलता में बदल सकती है।

लापरवाही का कारण,हमारा अत्यधिक आत्मविश्वास या प्रेरणा की कमी हो सकता है,जो आज नहीं तो कल हमें लक्ष्य प्राप्ति के रास्ते से गिरा सकता है।जीवन इतना कीमती है कि इसकी महान यात्रा,लापरवाह हो कर नष्ट करने के लिए नहीं है।

इसलिए सतर्क रहें और जो भी ध्येय आप जीवन में ले कर चल रहे हों,उसके लिए पूरे मन से प्रयत्न करें क्योंकि ऐसा करना कभी भी आपको आपके लक्ष्य और उद्देश्यों को प्राप्त करने के मिशन से गिराएगा नहीं।…………………………….. क्रमशः