जीवन में तीन बातों का महत्त्व :-

इस लोक में मनुष्यों को तीन उपाय हैं – १]युद्ध करना-कनिष्ठ ; २]ढोंग फ़ितूर करना –माध्यम और ३]सात्विकता से चलना –उत्तम।

अर्थात् हालांकि हम युद्ध कर के अपने विरोधियों को परास्त कर सकते हैं ,ढोंग कर के ,झूठ बोल कर भी अपना काम चला सकते है लेकिन यदि हम सात्विकता से चलें तो इस सम्पूर्ण जगत को अपना बना सकते हैं ।इसलिए सात्विकता से चलना मनुष्य के लिए सबसे उत्तम उपाय है ।

 ये तीन कर्मवाले मनुष्य तीन प्रकार से गिने जाते हैं – १]उत्तम काम जो करे वो उत्तम पुरूष ; २]सामान्य काम जो करे वो सामान्य पुरूष और ३]नीच काम जो करे वो नीच पुरूष।

अर्थात् हमें कभी भी नीच काम या सामान्य काम नहीं करने चाहियें क्योंकि मनुष्य जन्म मोक्ष प्राप्ति के लिए और परोपकार के लिए हुआ है। इसलिए हमेशा उत्तम काम केते रहना चाहिए ताकि हम एक उत्तम पुरूष कहलाये जाएँ और सम्मान के हकदार हों ।

ये तीन निर्धन हैं क्योंकि ये जिसके होते हैं वो इनके संचय किये द्रव्य का मालिक होता है – १]स्त्री ;२]पुत्र और ३]गुलाम।

अर्थात् पूरी मेहनत कर के भी और अपना सम्पूर्ण देने के बाद भी जो कुछ इन्होने किया होता है उसका श्रेय इन्हें नहीं मिलता अपितु पति ,पिता या मालिक को ही मिलता है।

ये तीनों अपराध अपना ही नाश करने वाले हैं – १]दूसरे का द्रव्य हर लेना ;२]दूसरे की स्त्री को स्पर्श करना और ३] इष्ट मित्र को छोड देना।

अर्थात् जो दूसरे के पैसे पर नजर रखता  है या उसकी स्त्री पर बुरी दृष्टि डालता  है वो मृत समान है और ऐसा कर के वो शत्रुता ही मोल ले रहा है जो अंत में उसके नाश का कारण बनती है ।इष्ट मित्र वे हैं जो हर दुःख-सुख में हमारे साथ हैं ।हमेशा वो हमें सहारा देते हैं और हमारी मदद करते रहते हैं।यदि हम ऐसे मित्रों को छोड देंगे तो कौन  हमारी सहायता करेगा ।हमारा तो नाश निश्चित ही है।

ये तीन अनर्थ में डालने वाले हैं इस वास्ते इन तीनों को छोड देना चाहिए – १]काम ; २]क्रोध और ३]लोभ।

अर्थात् जो व्यक्ति काम और लोभ के चक्कर में पड जाता है वो गलत तरीके से धन अर्जन करने में या गलत तरीके से जीवन यापन करने लगता है।वो व्यसनों का आदि हो जाता है और अनर्थ को प्राप्त करता है।क्रोध हमारी सोचने समझने की शक्ति को नष्ट कर हमें अनर्थ की ओर धकेल देता है।

ये तीन लाभ हैं – १]देवता से मिला वरदान ; २]राज्य,पुत्रादि लाभ और ३]शत्रु को संकट में से छुडाना यह सबसे बड़ा लाभ है।

अर्थात् जब हम कोई शुभ काम करते हैं तो देवता गण प्रसन्न हो कर हमें आशीर्वाद देते हैं उसी प्रकार पुत्र का होना वो भी सुपुत्र का होना बहुत बड़ा लाभ है क्योंकि वो हमारे नाम को रोशन कर सकता है ।इसी प्रकार शत्रु को संकट से  छुड़ा कर हम अपने मित्रों में इजाफा करते हैं और ये सबसे बड़ा लाभ बन जाता है।

ये तीन आचरण वाले पुरूष विश्वासी हैं – १]जो मुश्किल से ही कोई अपराध करे ; २]जो ऐसे  अपराधी को जो क्षमा योग्य है,क्षमा करे और ३]बिना किसी अपराध के दंड न दे।

अर्थात् जो कोई अपराध ही नहीं करता उससे हमें कोई डर नहीं होता और हम उस पर विश्वास कर सकते हैं ,उसी प्रकार जो हमारे अपराधों को क्षमा कर सके और अपने मन में न रखे उस पर भी हम विश्वास कर सकते हैं क्योंकि जब उसके मन में हमारे लिए कोई कटु भावना नहीं होगी तो वो हमें नुक्सान नहीं पहुंचाएगा।