दिव्य विचार -संसार के कण कण से प्यार:-

हमेशा प्यार से ,सच्चा और मीठा बोलो। ऐसा कारण मे कोई पैसा नहीं लगता। दूसरों के प्रति प्यार और दया रखना भी परोपकार है। यदि कोई तुमसे क्रोध से बोले उसका जवाब हमेशा प्यार से देना चाहिए। प्यार के दो बोल बड़ी से बड़ी गुस्से की आग को भी ठंडा कर सकती है।

प्यार का एक शब्द ,दो बोल दुःख ,परेशानी मे डुबे मन को ठंडक प्रदान कर सकता है। अतः प्यार से बोलें । जितना ज्यादा हम प्यार देते हैं उतना ज्यादा हमें प्यार मिलता है। जब हमें ज्यादा प्यार मिलता है तो उसे देना और भी आसान हो जाता है। कभी भी इस बात की आशा न करो की कोई तुम्हे प्यार देगा और तुम्हारा घ्यान रखेगा। पर इसके स्थान पर दूसरों को प्यार दो और उनका ध्यान रखो। जब ऐसा होगा तो हर कोई एक दुसरे का ध्यान रखेगा और एक दूसरे से प्यार करेगा।

 प्यार का एक आंसू सच्चे मोती के समान है। ये हमारी आत्मा तक पवित्र कर सकता है। जब हम किसी से प्यार करते हैं तो उस जैसा बनने का सोचते हैं। इसलिए भगवान् से जरूर प्यार करो ताकि उन जैसे बन सको। जब हम किसी से जलते हैं,घृणा करते हैं तो हमारी ख़ुशी ख़त्म हो जाती है। जबकि प्यार और दुसरे के प्रति अच्छी भावना हमारे सब दुःख हर लेते हैं।

जब हम किसी काम को गुस्से की भावना से करते हैं तो उसमे कम सफल होते हैं जबकि वही काम प्यार की भावना से करते हैं तो उसमे सफलता की शतप्रतिशत गारंटी है। जब प्यार मे किसी को नुक्सान पहुँचाया जाए तो वह प्यार नहीं है बल्कि जूनून  और मनो विकृति है। भगवान् से प्रेम करना मतलब प्राणी मात्र से प्रेम करना।

 जब हम अपने शत्रुओं से प्रेम करने लगते हैं तो धीरे -धीरे वो भी हमारे दोस्त बन जाते हैं। भगवान् ने हमें मानव जन्म दिया है ताकि हम ,प्रेम ,विश्वास ,ख़ुशी और सहयोग की भावना फैला सकें। दूसरों को प्यार करने से पहले अपने से प्यार करना सीखें। किसी के द्वारा दिल की गहराइयों तक चाहे जाने का एहसास हमें ताकत देता है। जिस प्रकार एक फूल सुगंघ के बिना अधूरा है उसी प्रकार एक मानव प्रेम के बिना अधूरा है। प्यार जिंदगी है। जब हमारे जीवन मे प्यार नहीं होगा तो उसमे जीवन कहाँ है। प्यार एक ऐसा एहसास है जिसमे दुसरे की ख़ुशी अपनी ख़ुशी से ज्यादा मायने रखती है और हमें एक अच्छा इंसान बनने मे मदद करता है।