दिव्य सन्देश:

यदि समस्याएं आने पर आप घबरा जाते हैं तो इससे आपके दिमाग का सन्तुलन बिगड़ जाएगा।

अर्थात् कभी भी समस्याएँ आने पर घबराएँ नहीं क्योंकि यदि हम घबराएंगे तो हमारी सोचने,समझने की शक्ति ख़त्म हो जायेगी,हमारे दिमाग की काम करने की शक्ति क्षीण हो जायेगी और हम हड़बड़ी में कुछ ऐसा कर जायेंगे जो हमारी समस्याओं को और बढ़ा देगा।इसलिए पूरी शक्ति के साथ और आत्मविश्वास के साथ हमें प्रत्येक समस्या का सामना करना चाहिए।

अगर आप हर कार्य ख़ुशी से करें तो कोई भी कार्य मुश्किल नहीं लगेगा।

अर्थात् चाहे काम आसान हो या मुश्किल यदि हम रोते-रोते करेंगे या बेमन से करेंगे तो छोटे से छोटा काम भी हमें पहाड़ जैसा लगने लगेगा और इसके ठीक विपरीत यदि हम अपने सारे काम मन लगा कर ,पूरी मेहनत के साथ करेंगे अर्थात् ख़ुशी-ख़ुशी करेंगे तो भारी से भारी काम भी ऐसे हो जाएगा जैसे फूंक मार कर तिनके को उडाना।इसलिए सारे काम हँसी-ख़ुशी करने चाहिए,जिससे काम भी आसान लगेगा और काम बेहतर तरीके से पूरा भी हो जाएगा।

जो भविष्य था वह अब हो रहा है ,जो अब हो रहा है वह अतीत बनता जा रहा है तो चिंता किसलिए की जाये।

अर्थात् हमें केवल वर्तमान की सोचनी चाहिए और जो कार्य हाथ में हैं उन्हें पूरे मन और ताकत से पूरा करने का प्रयत्न करना चाहिए।क्योंकि जो काम हो चुका है वो अतीत बन जाता है और नया काम जिसे हम भविष्य कहते हैं आ कर वर्तमान बन जाता है।इसलिए न तो अतीत की चिंता करो और न ही भविष्य की ,क्योंकि अतीत हो चुका है और भविष्य का किसी को पता नहीं,केवल वर्तमान को सुधारो,हमारा बनने वाला अतीत और भविष्य दोनों सुधर जायेंगे।

यदि हम अपने प्रयासों का फल प्राप्त करने के लिए बेचैन हैं तो यह कच्चा फल खाने की इच्छा समान है। 

अर्थात् पेड़ पर फल को पकने में भी समय लगता है।यदि हम समय से पूर्व उस फल को तोड़ लेंगे तो वो कच्चा ही होगा उसी प्रकार जब हम किसी कार्य के लिए प्रयास करते हैं तो हमें इन्तजार करना चाहिए कि वह कार्य सफलता पूर्वक पूरा हो जाए।यदि हम अधीर हो कर बीच में ही सोचेंगे कि हमें उस कार्य का परिणाम मिल जाए तो वो कच्चे फल खाने के समान ही है।जब हम पूरी मेहनत करेंगे तब ही तो हमें उस का मीठा फल मिलेगा।इसलिए हमें कोई भी कार्य करते समय सब्र से काम लेना चाहिए।तब ही तो कहा गया है कि सब्र का फल मीठा होता है।

ईमानदार व्यक्ति स्वयं भी संतुष्ट रहता है तथा दूसरे भी उससे संतुष्ट रहते हैं। 

अर्थात् ईमानदार व्यक्ति जो भी कार्य करता है पूरे मन से करता है और उसका फल भी केवल उतना ही चाहता है जितना उस ने किया होता है।अपना काम समय पर ख़त्म करता है और अच्छी तरह से करता है इसलिए वह अपने आप से भी संतुष्ट रहता है कि उसने अपना काम सुचारू रूप से किया है।दूसरे भी अपना कार्य समय पर होता देख कर ,ईमानदारी से होता देख कर ईमानदार व्यक्ति से बहुत खुश और संतुष्ट रहते हैं।