दिव्य सन्देश:७

दूसरों को ख़ुशी देना सबसे बड़ा दान -पुण्य का काम है।

अर्थात् जब हम किसी को दान में धन या कोई वस्तु देते हैं तो ये दान हमेशा के लिए नहीं होता।जैसे ही धन ख़त्म होता है या वस्तु समाप्त होती है ,याचक फिर से मांगने लगता है।पर जब हम किसी को कोई बड़ी ख़ुशी देते हैं या कुछ ऐसा करते हैं कि उसके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है तो ये हमेशा के लिए रह जाती है।साथ ही साथ उसे खुश देख कर हमें जो ख़ुशी मिलती है वो अपना सारा धन देने के बाद भी नहीं मिलती।इसलिए सबसे बड़ा दान का कार्य है कि दूसरों की मदद करते रहो और सब तरफ खुशियाँ बांटते रहो।

उत्साह जिस व्यक्ति के पास है उस का साहस बढ़ाता है और दूसरों के होठों पर मुस्कान लाता है।

अर्थात् हमेशा उत्साहित हो कर काम करना चाहिए क्योंकि जो व्यक्ति उत्साहित हो कर काम करता है उसे अपना कार्य कभी भी नीरस नहीं लगता।जब कार्य नीरस नहीं लगेगा तो उस में मन लगेगा और जब मन लगेगा तो वो कार्य मुश्किल नहीं लगेगा और हमें डराएगा नहीं और हमारा साहस बना रहेगा।वहीँ हमारा उत्साह दूसरों को भी उत्साहित करता रहेगा और उनमें भी साहस की भावना का संचार करेगा।इस प्रकार तनाव हमसे और दूसरों से दूर रहेगा और न केवल हमारे बल्कि दूसरों के होठों पर भी मुस्कान खेलती रहेगी।

एक मुस्कान किसी भी मुश्किल काम को आसान बनाती है।

अर्थात् कार्य कैसा भी क्यूँ न हो अगर हम उसे हँसे-मुस्कुराते हुए करेंगे तो हम तनाव के शिकार नहीं होंगे और अगर तनाव के शिकार नहीं होंगे तो हम सुचारू रूप से सोच पायेंगे।जब हम सुचारू रूप से सोच पायेंगे तो देखेंगे कि मुश्किल से मुश्किल काम भी आसान हो गया है और चुटकी बजाते ही हो गया है।वहीँ यदि हम रोते-शिकायत करते हुए कोई काम करेंगे तो हम पायेंगे कि हमारे लिए छोटे से छोटा काम करना भी मुश्किल हो गया है।इसलिए चेहरे पर मुस्कान बनाए रखें और हँसते-खेलते अपने सभी काम करें।

अगर आप अधिक समय अपने व्यक्तित्व को निखारने में दोगे तो दूसरों की आलोचना  करने के लिए तुम्हारे पास वक्त नहीं बचेगा।

अर्थात् हर वक्त ये सोचना कि दूसरे क्या कर रहे हैं और उन के अन्दर खामी ढूंढते रहना हमारे लिए वक्त की कमी पैदा कर सकता है और हमारे मस्तिष्क को नकारात्मक सोचों से भर सकता है।जब हम जरूरत से ज्यादा किसी बात के बारे में सोचते हैं तो वो हमारे जीवन में उतर जाती है।जब हम दूसरों की खामियों के बारे में ही सोचते रहेंगे ,उनकी आलोचना ही करते रहेंगे तो एक दिन यही खामियां हमारे जीवन का भी हिस्सा बन जायेंगी।इसके बजाय अपने अन्दर की अच्छाइयों को उभारने और कमजोरियों को दूर करने की ओर ध्यान लगाना चाहिए।

जिंदगी की मिठास को चखने के लिए ,तुम्हारे अंदर अपने अतीत को भुलाने की शक्ति होनी चाहिए।

अर्थात् यदि हम अपने अतीत को पकडे रहेंगे तो अतीत की गलतियाँ,परेशानियाँ और दुःख के बारे में ही सोचते रहेंगे और सोच सोच कर खुद को उन्ही परेशानियों और दुःख में डूबा हुआ पायेंगे।पर जब हम अतीत को भुला कर वर्तमान में जीयेंगे तो आज की छोटी-छोटी खुशियों के पल हमारे जीवन में मिठास भर सकते हैं।अतीत को तो हम बदल नहीं सकते पर हम उस को भुला कर आज की अच्छी यादों के साथ हर पल को सुखद बना सकते हैं।