दिव्य सन्देश :

मनोविकारों पर विजय प्राप्त करना ही आत्मा की सच्ची स्वतंत्रता है।

अर्थात् हम सब इन्द्रियों के वश में बंधे रहते हैं और परिणाम स्वरुप विभिन्न विकारों के शिकार हो जाते हैं।पर जब हम जितेन्द्रिय हो जाते हैं अर्थात् अपनी इन्द्रियों को वश में कर लेते हैं तो अपने आप इन विकारों पर भी विजय प्राप्त कर लेते हैं।इस प्रकार हमारी आत्मा समस्त विकारों और इन्द्रियों पर विजय प्राप्त कर स्वतंत्र हो जाती है।

दूसरों को ख़ुशी देना सर्वोत्तम दान है। 

अर्थात् जब हम पैसे का या किसी वस्तु का दान देते हैं तो वो क्षणिक होता है क्योंकि उस वस्तु के समाप्त होते ही या उस धन के समाप्त होते ही उस दान का महत्व भी ख़त्म हो जाता है।पर जब हम दूसरों को ख़ुशी देते हैं तो वह ख़ुशी उस व्यक्ति के चेहरे पर हमेशा के लिए रह जाती है।उस व्यक्ति को ख़ुशी दे कर हम भी खुश होते हैं।इसलिए दूसरों को ख़ुशी देना ही सर्वोत्तम दान है।जीवन के माधुर्य का रस लेने के लिए हममें  बीती बातों को भुला देने की शक्ति अवश्य होनी चाहिए।

होठों पर मुस्कान हर मुश्किल कार्य को आसान कर देती है।

अर्थात् यदि हम किसी काम को रोते-रोते या बेमन हो कर करेंगे तो आसान से आसान काम भी हमें बहुत मुश्किल लगेगा ,जबकि यदि हम कोई मुश्किल काम भी हँसते – मुस्कुराते करेंगे तो वही काम हमें बहुत ही सरल लगेगा।साथ ही साथ होठों पर मुस्कान रखने से अन्य लोग भी प्रसन्न रहेंगे और हमारे काम में हर तरह की मदद देने के लिए तैयार रहेंगे।

सन्तुष्टता व ख़ुशी साथ-साथ रहते हैं। इन गुणों से दूसरे आपकी ओर स्वतः आकर्षित होंगे।

अर्थात् जो कुछ भी हमारे पास है हम उसे पर्याप्त  मानते हुए संतुष्ट होते हैं अर्थात् लालसा नही करते तो हम स्वत: ही खुश रहने लगते हैं क्योंकि जहां संतुष्टि है वहाँ और की लालसा नही है इसलिए प्रसन्नता है और यही खासियत दूसरों को हमारी और आकर्षित करती है क्योंकि लोगों को ऐसे व्यक्ति ही अच्छे लगते हैं जो सदा प्रसन्न रहें और लालची न हों।

प्रसन्नता चेहरे का सच्चा सौंदर्य है। चिड़चिड़े स्वभाव का व्यक्ति वास्तव मे कुरूप है।

 अर्थात् तनाव की वजह से हम चिड़चिड़े स्वभाव के  होते हैं और तनाव से हम क्रोध के भी शिकार हो जाते हैं जिससे हमारे चेहरे की माँसपेशियाँ खिंच जाती हैं और हम कुरूप दिखाई देने लगते हैं।वहीँ इसके ठीक विपरीत जब हम प्रसन्नता से भरे रहते हैं तो हमारा चेहरा खिल उठता है।प्रसन्न व्यक्ति के चेहरे की रौनक देखते ही बनती है।इसलिए प्रसन्नता ही चेहरे का असली गहना है जो न केवल पहनने वाले को अपितु देखने वालों को भी सकून देता है।