माँ -एक श्रद्धांजलि:-

माँ धरती पर भगवान् का रूप है। हम भगवान् को प्रत्यक्ष नहीं देख सकते ,वह हर जगह नही हो सकता  इसलिए भगवान् ने माँ बनाई है।माँ का प्यार ही सच्चा  होता है। जब बच्चा रोता   है तो माँ रोती है। जब बच्चा हँसता है तो माँ हंसती है।
माँ हमारी सबसे अच्छी मित्र है। वह हमेशा हमारा साथ देती है। जब हम परेशानियों मे घिर जाते हैं ,जब  मित्र हमारा साथ छोड़ जाते हैं ,जब हम कुछ न सोच पाने की हालत मे होते हैं तब भी माँ हमारे साथ होती है। वो हमें जादू की झप्पी देती है ,हमें समझाती है ,हमें सांत्वना देती है और अपने प्यार से हमें हर अन्धकार से उबार लेती है। हमारे अंदर शांति का संचार करती है।
वो माँ ही है जो हमें तब से प्यार करने लगती है जब हमने जन्म भी नहीं लिया होता। वह हमारे बारे मे दिन रात सोचती रहती है चाहे हम उसके पास हों या न हों।
हम आज जैसे भी हैं उसका सारा श्रेय हमारी माँ को जाता है। वह हमें अच्छे संस्कार देती है। हमें अच्छी अच्छी बातें सिखाती है।  वह खुद भूखा रहती है पर हमें भोजन कराती है।  माँ के रहते हमें कोई चिंता नहीं हो सकती। वह हमारी सभी चिंता अपने ऊपर ले लेती है। महर्षि वेदव्यास जी कहते हैं की जो मनुष्य अपनी माँ को पुकारता हुआ घर मे प्रवेश करता है वो स्वतः ही अन्नपूर्णा के पास चला आता है।
चाहे हम किते ही गलत काम कर लें ,चाहे उसे कितने दुःख दें ,माँ के मुँह से कभी भी बद्दुआ नहीं निकलती। न ही वह कभी हमसे नाराज होती  है। ज्यादा से ज्यादा वह रो कर अपनी नाराजगी जाहिर कर देती है। इस तरह वह हारे पापों को अपने पवित्र आंसुओं से धो देती है।
माँ अपने हिस्से की नींद ,अपने हिस्से का सुख ,अपने हिस्से का भोजन भी अपने बच्चों को  और बदले मे कुछ नहीं मांगती। माँ हमें दुनिया भर की समस्त वस्तुएं देना चाहती है। माँ का दिल शुद्ध सोने की तरह है। माँ की आँखें प्यार से सरोबार रहती हैं।
वस्तुतः जिस घर मे माँ होती है वहां सब कुछ सही रहता है। माँ के क़दमों मे ही जन्नत होती है। कहा जाता है की हम अच्छे काम करेंगे तो मरने के बाद हमें स्वर्ग मिलेगा। पर यदि हम ममतामयी माँ की सच्चे दिल से सेवा करते हैं तो हमें जीते जी स्वर्ग मिल जाता है। अतः  हमें हजमेशा अपनी माँ का ध्यान रखना चाहिए और उसकी पूजा करनी चाहिए।