वचनामृत:१

मनुष्य के लिए जीवन में सफलता का रहस्य हर आने वाले अवसर के लिए तैयार रहना है।डिजरायली

अर्थात् हमें हर वक्त अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए तैयार रहना चाहिए।मनुष्य जीवन में अवसर आते ही रहते हैं।पर अक्सर हम उन्हें पहचान नहीं पाते या उस अवसर को भुना नहीं पाते।पर यदि हम अवसर आने की प्रतीक्षा करने की बजाय हमेशा अपने आप को तैयार रखें तो जब अवसर आएगा तो न केवल हम उस अवसर को पहचान पायेंगे बल्कि उस अवसर का फायदा भी उठा पायेंगे और सफलता का स्वाद चखेंगे।

हम दूसरों पर दोषारोपण तभी करते हैं,जब हमारी ही मनोवृति दूषित होती है।आनंद कुमार

अर्थात् जब हमारी मनोवृति दूषित होगी तो हमारा देखने का नजरिया भी दूषित होगा और हमें प्रत्येक व्यक्ति में खोट दिखाई देगा।हम खुद के दोषों के लिए भी दूसरों पर दोषारोपण करेंगे।इसलिए हमेशा अपने अन्दर से विकारों को बाहर करने का सतत प्रयास करना चाहिए ताकि हम पवित्र नज़रिये से दुनिया को देख सकें।

विद्या का अंतिम लक्ष्य चरित्र निर्माण होना चाहिए।महात्मा गांधी

अर्थात् ये देखना बहुत ही जरूरी है कि हम खुद को प्राप्त विद्धया का कैसे प्रयोग करते हैं।जब हम इस विद्धया का इस्तेमाल अपने सद्गुणों को बढाने के लिए करते हैं ,सदा अच्छा सोचते हैं ,लोगों की भलाई के लिए सोचते हैं तो हमारे अन्दर सच्चाई,शान्ति ,प्रेम ,संतुष्टि का संचार होने लगता है।हमें भले-बुरे का ज्ञान होने लगता है और हमारे चरित्र में दृढ़ता आती है।वहीँ यदि हम इसे गलत कामों में लगाते हैं तो हमारे चरित्र का हनन होता है।इसलिए सोच विचार कर विद्धया का इस्तेमाल करना चाहिए।      

आनंद का मूल संतोष है। –मनु 

अर्थात् जब हमें कुछ प्राप्त होता है तो हम और चाहने लगते हैं ,जब हमें थोडा और मिलता है तो थोडा और की लालसा हो जाती है।इस प्रकार ये लालसा बढती ही जाती है और हम अपना सुख चैन और ख़ुशी खो देते हैं।न तो हम जो हमारे पास है उस का आनंद ले पाते हैं और न और मिलने की ही कोई ख़ुशी होती है।पर जब हम उस में संतुष्ट होते हैं ,जो हमारे पास है और अधिक प्राप्ति की लालसा नहीं करते तो हम हमेशा प्रसन्न और आनंदित रहते हैं और जीवन के प्रत्येक पल का मजा ले पाते हैं।इसलिए हमेशा संतुष्ट रहना चाहिए।

विशाल हृदय वालों के लिए दूर वाले भी निकट हो जाते हैं। –मैक्सिम गोर्की 

अर्थात् जब हम तन से-मन से लोगों के सुख दुःख में काम आते हैं ,उनके साथ हर पल प्यार और स्नेह का व्यवहार करते हैं तो इसका अर्थ ये है कि हम विशाल हृदय हैं।जब हम किसी के काम आते हैं तो वो हमें दिल से आदर ,सम्मान करने लगता है और हमारे निकट आ जाता है।कौन नहीं चाहता ऐसे व्यक्ति के सानिध्य में रहना जो उनकी हर तकलीफ अपनी समझे,उनकी हर ख़ुशी अपनी समझे?इसलिए विशाल हृदय बनिये और समस्त संसार को अपने भीतर संजो लीजिये।