वचनामृत:२

धमकी देनेवाला सदा कायर होता है।शक्तिवान पुरूष कभी धमकी नहीं देता,वह तो जो चाहता है वह करके दिखा देता है।बर्नार्ड शॉ 

अर्थात् जिस प्रकार गरजने वाले बादल बरसते नहीं ,या ये कहावत है कि थोथा चना बाजे घना अर्थात् जिस में दम नहीं होता वो ही ज्यादा आवाज करता है।इसी प्रकार जो धमकियां देते रहते हैं ,उन में उस धमकी को कर दिखाने का साहस नहीं होता।वह कायर के समान केवल बोलता ही रहता है जबकि जिस मनुष्य में साहस होता है वह धमकियां नहीं देता अपितु ठोस हथोड़े की तरह चोट कर देता है और जो सामने वाले से कराना चाहता है करा लेता है।

आलस्य जीवित मानव की कब्र है।कूपर

अर्थात् कभी भी आलस्य नहीं करना चाहिए।आलस्य करने वाला व्यक्ति जीवन में कभी सफल नहीं हो सकता क्योंकि वो कभी भी अपना काम वक्त पर नहीं कर सकेगा और जीवन में हमेशा पिछड़ता ही रहेगा।आलस्य करने वाले व्यक्ति के शरीर के अंग –प्रत्यंग भी सुचारू रूप से काम करना बंद कर देते हैं।ऐसे व्यक्ति का किसी भी काम में मन नहीं लगता और वह जीवित होते हुए भी मृत सामान हो जाता है।

मनुष्य के कर्म ही उसके विचारों की सबसे अच्छी व्याख्या है।लाफ

अर्थात् यदि किसी के मन में खोट है तो वो खोटे काम ही करेगा,किसी की चोरी की भावना है तो वो चोरी ही करेगा।किसी को लड़ने मरने में ही मजा आता है और हमेशा सब से लड़ता ही रहता है।वहीँ कोई किसी के काम आना चाहता है और सब की सेवा करता रहता है।कोई जो मिला है उस में संतुष्ट है।कोई सदा मधुर वचन बोलता है क्योंकि उसका हृदय ही ऐसा है।इसलिए हमारे कर्म ही बताते हैं कि हम किस प्रकार सोचते हैं।इसलिए अच्छे कार्य करिए ताकि सोच अच्छी हो जाए या सोच अच्छी रखिये कि हम सदा अच्छे कार्य करें।          

गिरने में हानि नहीं है,गिरकर पड़े रहने में हानि होती है।आनंद कुमार 

अर्थात् प्रत्येक मनुष्य जीवन में कभी न कभी असफलता का स्वाद चखता है।उन में से कुछ इस असफलता से हताश हो जाते हैं और या तो उस काम को करना ही छोड देते हैं या कुछ भी नहीं करते।पर यदि अपनी असफलता से घबरा कर हाथ पर हाथ धर कर बैठ गए तो कुछ ही दूरी पर खड़ी सफलता का स्वाद कैसे चखेंगे।बार-बार गिर कर ही कोई कुशल घुड़सवार बन सकता है।इसलिए कभी भी गिरने से घबराएँ नहीं बल्कि दुगने जोश से उठें और आगे बढ़ें ताकि आप हानि के शिकार न हों और सफल व्यक्ति कहलायें।

काम करने से पूर्व सोचना बुद्धिमत्ता है,काम करते समय सोचना सतर्कता है,काम कर चुकने के बाद सोचना मूर्खता है।स्वामी शिवानंद सरस्वती 

अर्थात् हमेशा सभी काम सोच विचार कर करने चाहियें क्योंकि अगर हम बिना विचारे कोई काम करेंगे तो हो सकता है कि वो काम बिगड़ जाए।यदि हम काम हो चुकने के बाद सोचेंगे तो उसका कोई फायदा नहीं क्योंकि तब तक वो काम तो हो ही चुका होगा।इसलिए सतर्कता पूर्वक काम करते हुए आनेवाली हर समस्या के लिए तैयार रहें अपितु यदि हम काम शुरू करने से पूर्व ही उसके सभी पहलुओं पर विचार कर लें तो इससे बेहतर बात कोई नहीं हो सकती।