विचारणीय:१२

जो मूर्ख अपनी मूर्खता को जानता है,वह धीरे-धीरे सीख सकता है;पर जो मूर्ख अपने को बुद्धिमान समझता है,उसका रोग असाध्य है।–अरस्तु

अर्थात् यदि हम अपने को बुद्धिमान समझते रहेंगे तो नयी बातों को सीखने से कतराने लगेंगे।हम ये सोचेंगे कि हमें तो सब कुछ आता है और इस प्रकार नए विषयों का ज्ञान प्राप्त करने से चूक जायेंगे।अगर हमें वो विषय आता है तब तो ठीक है अन्यथा यदि हम न जानते हुए भी सोचते हैं और कहते हैं कि हमें आता है तो हमसे बड़ा मूर्ख कोई नहीं होगा।वहीँ जो जानता है कि मैं किसी बात या विषय में मूर्ख हूँ पर उस को सीखने का प्रयत्न करता है वो एक दिन उस विषय में भी पारंगत हो सकता है।

गुलाबों की वर्षा कभी नहीं होगी।अगर हमें अधिक गुलाबों की इच्छा है तो हमें और पौधे लगाने चाहियें।–इलियट

अर्थात् अपने आप से सुख-सुविधाएँ कभी नहीं मिलती।उन के लिए मेहनत करनी पड़ती है।जो जी-जान से अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए लगा रहता है उसे ही गुलाब के फूलों के समान सुख प्राप्त होता है।यदि हमें सुख सुविधा प्राप्त है किन्तु हम और की चाह रखते हैं तो भी केवल अधिक प्रयास,अधिक मेहनत और लगन से ही ऐसा संभव है।

व्यवहार वह दर्पण है,जिसमें प्रत्येक व्यक्ति अपना प्रतिबिम्ब दिखाता है।–गेटे

अर्थात् हम किसी भी व्यक्ति का व्यवहार देख कर उसके बारे में अनुमान लगा सकते हैं कि वह व्यक्ति कैसा होगा।एक अच्छे व्यक्ति का व्यवहार बहुत ही निर्मल होता है।वह सबसे शांत और प्रसन्नचित हो कर बात करता है।हमेशा परोपकार में और दूसरों के हित में अपने मन को लगाए रखता है।ऐसे व्यक्ति को सभी प्यार करते हैं।वहीँ बुरा व्यक्ति हमेशा छल –कपट में लगा रहता है।दूसरों को दुःख देने का वो कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता।उसके मन में ईर्ष्या की भावना भरी रहती है।ऐसे व्यक्ति को कोई पसंद नहीं करता।जिस प्रकार दर्पण देखने से अपना प्रतिबिम्ब दिखाई देता है उसी प्रकार व्यवहार रुपी दर्पण में भी व्यक्ति का प्रतिबिम्ब दिखाई दे जाता है।

सफलता को खो देने का निश्चित तरीका अवसर को खो देना है।–चेसिल्स

अर्थात् हमारे जीवन में अनेकों अवसर आते रहते हैं।हममें से हर एक में आगे बढने और सफलता के शिखर तक पहुँचने की काबीलियत होती है किन्तु जीवन में आने वाले अवसरों को पहचान कर उनका भरपूर उपयोग करने की काबीलियत हर किसी में नहीं होती।अक्सर हम आने वाले अवसरों को चूक जाते हैं और जीवन में सफल होने से वंचित हो जाते हैं।जरूरत है कि हम जीवन में आने वाले अवसरों को पहचान कर उनका उपयोग सफलता प्राप्ति में  करें।

विश्वास उस पक्षी के समान है जो सवेरा होने से पूर्व के अन्धकार में ही प्रकाश का अनुभव करके चहचहाने लगता है।–टैगोर

अर्थात् जिस प्रकार पौ फटते समय सारा वातावरण पक्षियों की चहचाहट से भर जाता है,पक्षी प्रकाश का अनुभव कर ख़ुशी के मारे शोर मचने लगते हैं,ठीक उसी प्रकार जब हमारे अन्दर विश्वास का संचार होता है तो हम स्फूर्ति से भर जाते हैं।हममें एक नयी चेतना का संचार होने लगता है और हम दूने जोश के साथ अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उठ खड़े होते हैं।