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वे कितने निर्धन हैं जिनके पास धैर्य नहीं है।क्या आज तक कोई घाव बिना धैर्य के ठीक हुआ है।-शेक्सपियर

अर्थात् कोई भी काम धीरे-धीरे ही संपन्न होता है।जिस प्रकार मनुष्य पहले बच्चा होता है और धीरे-धीरे जवान होता है,जिस प्रकार किसी भी घाव को ठीक होने में समय लगता है उसी प्रकार जब हम किसी कार्य को प्रारम्भ करते हैं तो उसे पूरा होने में और हमें सफल होने में वक्त लगता है।जरूरत होती है धैर्य के साथ पूरे आत्मविश्वास और दृढसंकल्प के साथ अपने कार्य को करते जाने की।सफलता तो धीरे-धीरे कदम चूम ही लेती है।पर कई लोग सफलता तुरंत ही चाहते हैं और बिना धैर्य के ही काम को करने लगते हैं।इससे वे उस काम पर पूरा ध्यान नहीं दे पाते और कार्य को खराब कर लेते हैं।ऐसे व्यक्ति कभी सफल नहीं होते और क्षण:-क्षण: गरीब होते जाते हैं।इस प्रकार ऐसे व्यक्ति निर्धन के समान हैं जिनके पास धैर्य नहीं होता।

हमारी रुचि हमारे जीवन की कसौटी है और हमारे मनुष्यत्व की पहचान है।-रस्किन

अर्थात् यदि हम बुरे कामों में रुचि दिखाते हैं तो हम बुरे बन जाते हैं और बुरे व्यक्ति कहलाते हैं।लोग भी हमें बुरा मानते हुए हेय दृष्टि से देखते हैं।पर यदि हम अपनी रुचि अच्छे कार्यों में रखेंगे तो न केवल हम तन-मन से शुद्ध और अच्छे बन जायेंगे अपितु लोग भी हमें पसंद करने लगेंगे।जिस प्रकार की रुचि हम हम रखेंगे वैसा ही जीवन हमारा हो जाएगा।इसलिए हमारी रुचि ही हमारे जीवन की कसौटी है और हमारे मनुष्यत्व की पहचान है।

किसी भी हालत में अपनी ताकत पर घमंड न करो।यह बहुरूपिया आसमान हर घडी हजारों रंग बदलता है।-हाफ़िज

अर्थात् वक्त कभी भी एक समान नहीं रहता।जो आज रंक हैं वो एक दिन राजा  बन जाते हैं और जो राजा होते हैं वो रंक हो जाते हैं।इसलिए यदि आप संपन्न हैं और आपके पास ताकत और बल दोनों हैं तो उस ताकत और बल का कभी भी अभिमान नहीं करना चाहिए।कौन जाने कब ऐसा वक्त आ जाये जब हमारी ताकत किसी काम की न रहे और हमें दूसरों की मदद की जरूरत आन पड़े।

नेक आदमी का बुरा नहीं हो सकता,न तो इस जीवन में न मरने के बाद।-सुकरात

अर्थात् जो हमेशा नेकी के रास्ते पर चलता है,उसका कोई शत्रु नहीं होता।चूंकि वो हमेशा दूसरों की भलाई में लगा रहता है इसलिए सभी उसे पसंद करते हैं।इसलिए सभी उसके भले की ही सोचते हैं और मरने के बाद भी उस भले मनुष्य को याद करते रहते हैं।इसलिए हमेशा नेकी के रास्ते पर चलते रहना चाहिए।

मैं अपने जीवन में बारम्बार असफल हुआ हूँ और और यही कारण है कि मैं सफल हूँ।माइकल जॉर्डन

अर्थात् व्यक्ति को कभी भी अपनी असफलताओं से डर कर बैठ नहीं जाना चाहिए।बल्कि दूने जोश के साथ फिर से प्रयास करना चाहिए।जिस प्रकार बार –बार पानी निकाले जाने से कुँए की मुंडेर पर रस्सी के निशाँ बन जाते हैं उसी प्रकार बार बार प्रयास करने वाला व्यक्ति एक न एक दिन सफल अवश्य हो जाता है।साथ ही साथ असफलताओं से हमें सीखने को मिलता है।इससे हम असफलताओं का सामना करने,धैर्य रखने और असफलताओं से निबटने के उपाय सीखते हैं।इसलिए यहाँ कहा है कि हालांकि माइकल जॉर्डन अपने जीवन में बार बार असफल हुए थे,लेकिन वे इन सब से लड़ कर एक सफल व्यक्ति बने।