विचारणीय:२५

आपको अपनी समस्याएँ खुद ही सुलझानी होंगी,हर रोज कड़ी मेहनत करो;आपको असली बात पकड़ कर रखनी होगी,इसके अलावा कोई और रास्ता नहीं है।गर्टरूड टी० बकिंघम

अर्थात् हमारा मूल उद्देश्य होता है अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रयत्न करना और सफलता को प्राप्त करना।हालांकि इस उद्देश्य को पूरा करने में कई कठिनाइयां भी आएँगी,पर इन कठिनाईयों और समस्याओं से घबरा कर बैठ जाने से कुछ नहीं होगा।न ही कोई और हमें इन समस्याओं से निजात दिलाने आएगा।यदि हम हौसला रखेंगे और अपना आत्मविश्वास बनाये रखते हुए कड़ी मेहनत करेंगे तो हम स्वयं ही इन समस्याओं से निजात पा सकते हैं।केवल असल बात पकड़ कर रखनी है कि कोई भी लक्ष्य हमारे लिए असंभव नहीं है और हम इसे पा सकते हैं।बस इस के लिए हम को आत्म विश्वास बनाए रखना है और दृढ संकल्प के साथ आगे बढ़ना है।   

मैं हवा की दिशा नहीं परिवर्तित कर सकता लेकिन मैं अपने पाल समायोजित कर सकता हूँ ताकि मैं अपने गंतव्य तक हमेशा पहुंचूं।जिम्मी डीन

अर्थात् हम अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए प्रयत्न करते रहते हैं।पर कोई न कोई समस्या हमारे सामने आ कर खड़ी हो ही जाती है और हम लक्ष्य प्राप्ति के अपने उद्देश्य से भटकने लगते हैं।किन्तु जिस प्रकार विपरीत हवा के चलने पर भी नाविक ये जानते हुए कि वो हवा का रुख तो पलट नहीं सकता,इसलिए नाव के पाल इस हिसाब से समायोजित कर लेता है कि वो किनारे तक पहुँच सके,उसी तरह हमें भी ये समझ लेना चाहिए कि आने वाली समस्याओं को तो हम ख़त्म नहीं कर सकते पर हम उनसे लड़ने का हौसला पैदा कर और लक्ष्य प्राप्ति के अपने तरीकों में परिवर्तन कर,हम अपनी मंजिल को पा सकते हैं।  

हमारे सभी स्वप्न सच हो सकते हैं यदि हममें उन्हें आगे बढ़ाने का हौसला हो।वाल्ट डिज्नी

अर्थात् केवल सपने देखने से कुछ नहीं होता।प्रत्येक मनुष्य सपने देखता है,पर सच कुछ के ही होते हैं।ऐसा इसलिए है कि कुछ व्यक्ति सपने तो देखते हैं पर उन सपनों को पूरा करने की दिशा में जो कठिनाइयाँ और समस्याएँ आने वाली हैं,उन के बारे में सोच कर घबरा जाते हैं और अपना हौसला खो बैठते हैं।इस प्रकार वे सपनों की पूर्ति के लिए प्रयत्न ही नहीं करते।लेकिन व्यक्ति यदि बिना घबराए दृढ संकल्प के साथ सपनों को आगे बढाने के लिए प्रयत्न करे तो समस्याएँ और कठिनाइयाँ पल भर में दूर हो जायेंगी और व्यक्ति के सपने सच हो जायेंगे।

सफलता बनती है उत्साह ख़त्म हुए बिना एक असफलता से दूसरी असफलता तक जाने से।विंस्टन चर्चिल

अर्थात् लक्ष्य प्राप्ति की राह में व्यक्ति के सामने कई समस्याएँ और कठिनाईयां आती हैं।कभी-कभी तो वो इन से डर कर प्रयत्न करना ही छोड देता है और कभी-कभी काफी प्रयत्न करने के बाद भी असफलता ही उस के हाथ लगती है।ऐसे में व्यक्ति उत्साहहीन हो सकता है।पर उसे अपना उत्साह कम नहीं करना चाहिए और दुगने उत्साह के साथ पुन: प्रयास करना चाहिए।हो सकता है फिर से असफलता मिले।यहाँ डरने की जरूरत नहीं है।व्यक्ति पायेगा कि हालांकि उसे फिर से असफलता मिली है लेकिन वो पिछली बार की अपेक्षा इस बार लक्ष्य के और समीप जा कर असफल हुआ है।इस तरह बार-बार प्रयास करने से ही एक दिन वो पायेगा कि उसे सफलता प्राप्त हो गयी है और उसने अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है।

स्वर्ग का राज्य कोई जगह नहीं है अपितु मनोदशा है।जॉन बुर्रौघ्स

अर्थात् जैसी हमारी मनोदशा होती है वैसा ही हम अपने भीतर और बाहर महसूस करते हैं।यदि हम क्रोध में रहेंगे,औरों से जलते रहेंगे और हर समय दूसरे को नुक्सान पहुँचाने और उससे बदला लेने के बारे में सोचते रहेंगे तो हम चिडचिडे हो जाएंगे।अपनी रातों की नींद और दिन का चैन खो देंगे और इस तरह अपने लिए नरक का निर्माण कर लेंगे।वहीँ यदि हम खुश रहेंगे,संतुष्ट रहेंगे,सब की मदद करेंगे तो हम मानसिक शान्ति का अनुभव करेंगे।लोग भी हमारे सद्गुणों की वजह से हमसे प्यार करेंगे।इस प्रकार न केवल हम अपने भीतर अपितु बाहर भी स्वर्ग जैसा माहौल बना लेंगे।इसलिए कहा है कि स्वर्ग का राज्य कोई जगह नहीं है अपितु मनोदशा है।