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जिसके पास धैर्य है,वह जो कुछ इच्छा करता है,प्राप्त कर सकता है–फ्रैंकलिन

अर्थात् सभी कार्य धीरे-धीरे ही संपन्न होते हैं।एक वृक्ष भी पहले एक बीज ही होता है और धीरे –धीरे खाद-पानी आदि पा कर एक दिन सघन वृक्ष बन जाता है।जीवन में व्यक्ति के जीवन में हर क्षण कठिनाईयां आती रहती हैं।जो ऐसे समय में धैर्य बनाये रखता है और बिना रुके जो कुछ भी वह पाना चाहता है उसके लिए प्रयास करता रहता है,वह एक न एक दिन उसे पा ही लेता है।

संकट के समय धैर्य धारण करना मानो आधी लड़ाई जीत लेना है।–प्लाटस

अर्थात् अक्सर संकट के समय व्यक्ति अपना धैर्य खो देता है और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने और आगे बढ़ने के अपने संकल्प को छोड देता है।पर कई बार ऐसा भी होता है कि सफलता उससे एक कदम की दूरी पर होती है जब वो अपना प्रयास छोड़ता है।संकट के समय हिम्मत हार जाने वाले का दिमाग भी काम करना बंद कर देता है और इस तरह वो उस संकट से बाहर आने का उपाय नहीं खोज पाता।वहीँ जो व्यक्ति संकट के समय अपनी हिम्मत बनाये रखता है वो अपने ज्ञान और बुद्धि द्वारा शीघ्र ही उस संकट से बाहर निकलने का उपाय खोज लेता है और अन्तत: सफलता को प्राप्त करता है।इसलिए संकट के समय धैर्य धारण करना मानो आधी लड़ाई जीत लेना है।

धैर्यहीन मनुष्य तेलहीन दीपक की तरह है।–एंड्रूस सेगोविआ

अर्थात् जिस प्रकार तेलहीन दीपक की लो लडखडाती रहती है और शीघ्र ही बुझ जाती है उसी प्रकार धैर्य हीन मनुष्य भी अपना साहस,जल्दी ही कामयाबी न मिलने से खो देता है और प्रयास करना छोड,बैठ जाता है और फिर अपनी नाकामयाबी का रोना रोता रहता है।किसी भी कार्य में सफलता हासिल करने के लिए बहुत मेहनत और प्रयास की जरूरत होती है।कई बार व्यक्ति बार बार असफल भी होता है।ऐसे में धैर्य हीन व्यक्ति कार्य को छोड बैठ जाता है और धैर्य वान व्यक्ति दूगने जोश से प्रयास करता है और अपने धैर्य को बनाए रखते हुए सफलता हासिल करता है।

जिसे धीरज है और जो मेहनत से नहीं घबराता,कामयाबी उसकी दासी है।–दयानन्द सरस्वती

अर्थात् व्यक्ति को ये समझना चाहिए कि कामयाबी कोई व्यंजन नहीं है जो बैठे-बिठाए हमें चखने को मिल जाए,उसके लिए प्रयास करने पड़ते हैं।कई बार व्यक्ति अपने प्रयासों में विफल भी होगा,पर ऐसे में उसे धीरज धरते हुए फिर से प्रयास करना चाहिए।बड़े से बड़ा पत्थर भी मेहनत की हथौड़ी से चूरा हो सकता है।इसलिए जो व्यक्ति धीरज से भरपूर है और मेहनत से नहीं घबराता,कामयाबी हमेशा उसके कदम चूमती है और उसकी गुलाम रहती है।

धैर्य आशा करने की कला है।–वाडवेनराग्युइस

अर्थात् जो व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी नहीं घबराता,बार-बार विफल होने पर भी ये सोचता रहता है कि वो फिर से प्रयास करेगा और एक न एक दिन सफल जरूर होगा,वो व्यक्ति आशावादी होता है।जब व्यक्ति आशावादी हो जाता है तो उसके अन्दर से उतावलेपन की भावना ख़त्म हो जाती है और उसके अन्दर धैर्य की भावना आ जाती है।इसलिए आशा करने का अर्थ धैर्य बनाए रखना है या विपरीत शब्दों में धैर्य आशा करने की कला है।