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माता का हृदय बच्चे की पाठशाला है।-बीचर

अर्थात् बच्चा ज्यादातर वक्त माता के साथ ही बिताता है,इसलिए बच्चा वही सब कुछ सीखता है जो उसकी माँ उसे सिखाना चाहती है अथवा जिस प्रकार का माँ का हृदय होता है।माँ की दयालुता से बच्चा दयालु होना सीखता है।माँ की ममता से बच्चा सब से ममत्व से पेश आना सीखता है।माँ केअन्दर यदि सदगुण हैं तो बच्चा सदगुण और यदि अवगुण हैं तो अवगुण सीखता है।बच्चा वही बनता है जैसे संस्कार माँ उसे देती है इसलिए कहा गया है कि माँ का हृदय बच्चे की पाठशाला है।

बच्चे का भाग्य सदैव उसकी माँ की कृति है।-नेपोलियन

अर्थात् बच्चा वही बनता है जैसे संस्कार माँ उसे देती है।बच्चे का भाग्य इस बात पर निर्भर करता है कि वो माँ से सदगुण सीखता है अथवा दुर्गुण।यदि बच्चा माँ से दुर्गुण सीखता है तो बड़ा हो कर वो चोर –डाकू आदि ही बनेगा और आपराधिक काम ही करगा और अंतत: क़ानून के शिकंजे में आ कर अपना भविष्य नष्ट कर लेगा।वहीं माँ से सदगुण पाया हुआ बच्चा बड़ा हो कर महान कार्य करगा और महान व्यक्ति बनेगा।इसलिए जिस प्रकार कुम्हार द्वारा बनाये घड़े वैसे ही बनते हैं जैसे कि कुम्हार बनाता है उसी प्रकार बच्चे का भाग्य भी सदैव उसकी माँ की कृति होती है।

माँ के बलिदानों का प्रतिशोध कोई बेटा नहीं कर सकता,चाहे वह भूमंडल का स्वामी ही क्यों न हो।-प्रेमचंद

अर्थात् माँ को भगवान् के समान दर्जा दिया गया है।माँ अपने बच्चों के लिए क्या कुछ नहीं करती।वो अपने बच्चों में संस्कार भरती है।उनको जीवन की कठिनाइयों से लड़ना सिखाती है।खुद भूखा रह कर भी बच्चों का पेट भरती है।अर्थात् कौन सा ऐसा बलिदान है जो माँ अपने बच्चों के लिए नही करती।हम चाहे कितने भी अमीर क्यों न हो जाएँ पर हम माँ के द्वारा किये हुए इन बलिदानों का मूल्य कभी नहीं चुका सकते।आज हम जो कुछ भी हैं,जीवन में चाहे जितने सफल हैं,सब माँ के बलिदानों के कारण।इसलिए कहा है कि माँ के बलिदानों का प्रतिशोध कोई बेटा नहीं कर सकता,चाहे वह भूमंडल का स्वामी ही क्यों न हो।

माँ के ममत्व की एक बूँद अमृत के समुद्र से ज्यादा मीठी है।-जयशंकर प्रसाद

अर्थात् माँ की ममता ऐसी होती है जो अपने बच्चों को कठिनाइयों में नहीं देख सकती।वो अपने बच्चों को कठिनाइयों में पड़ने नहीं देती और उनको कठिनाइयों से बचाने के लिए दिन रात एक कर देती है।जब बच्चा कभी बीमार पड़ता है तो माँ सारी-सारी रात जाग कर उसकी तीमारदारी करती है।माँ खुद भूखा रह सकती है मगर अपने बच्चों को भूखा नही रहने देती।बच्चों पर आने वाली मुसीबतों को माँ अपने ऊपर झेल लेती है।माँ की ममता की एक बूँद अमृत के समुन्द्र से भी मीठी होती है जिसमे डूब कर बच्चा अपने हर गम,तकलीफें और मुसीबतें भूल जाता है।

वीर माताओं से देश का मुख उज्जवल होता है,जो देश-हित के सामने मातृस्नेह की धूल बराबर भी परवाह नहीं करतीं,उनके पुत्र देश के लिए होते हैं,देश पुत्र के लिए नहीं होता।-प्रेमचंद

अर्थात् जो माताएं वीर होती हैं वे अपने पुत्रों को भी वीरता का पाठ पढ़ाती हैं।वे अपने पुत्रों को देश हित के लिए अर्पित कर देती हैं।उनके पुत्र देश की रक्षा में सदा तत्पर रहते हैं।वे अपने किसी पुत्र के शहीद होने पर भी आंसू नहीं बहातीं और अपने सभी पुत्रों को देश के लिए कुर्बान करने के लिए तैयार रहती हैं और इच्छा करती हैं कि उनके और भी पुत्र होते जिनको वे देश हित में कुर्बान कर देतीं।ऐसी वीर माताओं के लिए देश सबसे ऊपर होता है।वे ये कामना नहीं करती कि देश उनके पुत्रों के लिए कुछ करें अपितु उनकी इच्छा होती है कि उनके पुत्र देश के लिए कुछ करें।ऐसी ही माताओं से देश का गौरव है।