विचारणीय:३९

मैं शेरों की एक सेना से,जिसका नेतृत्व एक भेड़ करती है,नहीं डरता हूँ;मैं डरता हूँ भेड़ों की एक सेना से,जिसका नेतृत्व,एक शेर करता है।-एलेग्जेंडर महान

अर्थात् कई ऐसे मनुष्य जो स्वभाव से काफी निडर होते हैं वो भी डरने लग जाते हैं और किसी अन्य  पर अपना प्रभाव नहीं छोड़ पाते यदि उनके झुण्ड का नेतृत्व कोई ऐसा व्यक्ति कर रहा हो जो प्रभाव हीन हो और कुछ भी कर पाने में सक्षम न हो।अपने नेता के स्वभाव के अनुसार ही उन का स्वभाव हो जाता है और वे कुछ भी कर पाने में अक्षम हो जाते हैं।

वहीँ यदि कई सारे प्रभावहीन और डरपोक व्यक्तियों का नेतृत्व कोई निडर और प्रतिभावान मनुष्य करता हो तो उसकी संगत में वे सभी डरपोक और प्रतिभाहीन व्यक्ति भी काफी कुछ बदल सकने का माद्दा रखते हैं।अपने नेता के गुणों को देख कर वे भी वैसे ही गुण अपनाने लगते हैं और कुछ भी कर पाने में सक्षम हो जाते हैं।कहने का तात्पर्य है कि हमें ऐसे व्यक्ति के साथ रहना चाहिए जिसके सानिध्य में रह कर हम भी जीवन में कुछ कर पायें और लोग हमसे प्रभावित हों।

यदि आपके कार्य दूसरों को प्रेरित करते हैं,ज्यादा स्वप्न देखने के लिए,और अधिक सीखने के लिए,और अधिक करने के लिए एवम् अधिक महान बनने के लिए तो आप उनके अधिनायक हैं।-जॉन क्विंसी एडम्स

अर्थात् जब हम स्वयं ऐसे कार्य करते हैं कि लोग हमसे प्रेरणा लें तब हम कह सकते हैं कि हम उनके नेता हैं।पर यहाँ प्रेरणा लेने का अर्थ गलत कार्यों से नहीं है।जब हमारे कृत्य हमें महान बनाते हैं तो लोग उनसे प्रेरणा लेते हैं-ज्यादा सीखने के लिए,अधिक करने और हमारी ही तरह महान बनने  के लिए,तो हम कह सकते हैं कि हमारा जीवन सफल हो गया।जो व्यक्ति दूसरों के लिए प्रेरणादायक होता है वास्तव में वही उनका अधिनायक भी होता है क्योंकि लोग ऐसे व्यक्ति का अनुसरण करते हैं और उसके नक्शेकदम पर चलते हैं।

एक आदमी की महानता,इस बात में नहीं है कि वह कितना धन प्राप्त कर लेता है,अपितु उसकी सत्यनिष्ठा और अपने आस-पास के लोगों को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने की उसकी क्षमता में है।-बॉब मारले

अर्थात् कोई भी व्यक्ति अपने धन के बल पर महान नहीं बन सकता क्योंकि धन तो आसानी से कमाया जा सकता है।धन के रौब में आदमी धनवान व्यक्ति से दब तो सकता है पर मन से उसका आदर सम्मान नहीं कर सकता।किसी भी व्यक्ति को महान उसके गुण बनाते हैं जो काफी तपस्या के बाद अर्जित होते हैं।जब व्यक्ति सद्गुणों से प्रेरित होता है,सत्यनिष्ठ होता है तब ही वो अन्यों को प्रभावित कर सकता है और अन्य लोग उसकी इज्जत और सम्मान करते हैं।पैसे के रौब द्वारा कमाया गया सम्मान पैसा ख़त्म होते ही समाप्त हो जाता है जबकि अपने सद्गुणों द्वारा अर्जित सम्मान व्यक्ति के मरने के बाद भी रहता है।यही व्यक्ति कि महानता है कि लोग उसके जाने के बाद भी उसको याद रखें और उसके नक़्शे क़दमों पर चलें।

एक अच्छा अधिनायक,जितना उसे मिलना चाहिए उससे कम श्रेय लेता है जबकि आरोप,जितना उसे  मिलने चाहियें,उससे ज्यादा लेता है।-अर्नाल्ड एच० ग्लासो

अर्थात् व्यक्ति जब अपने किये कार्यों का सम्पूर्ण श्रेय खुद न ले कर अपने साथ काम करने वाले सहयोगियों को दिलाता है और अपने किये गए कार्यों में हुई खामियों और उन कार्यों द्वारा उपजे आरोपों को खुद पर लेता है तभी वो अच्छा अधिनायक कहा जा सकता है।क्योंकि किये हुए कार्यों का श्रेय अपने सहयोगियों को दिला कर वो उनका मनोबल बढाता है और आरोपों से उन्हें बचा कर उनका मनोबल टूटने से बचाता है।साथ ही साथ आरोपों और खामियों को अपने ऊपर ले कर खुद को और भी अच्छा बनाने की दिशा में कदम भी बढाता है।

समस्त संसार में कुछ भी और अधिक खतरनाक नहीं है सिवाय विवेकशील मूर्खता और यथार्थ अज्ञानता के।-मार्टिन लुथर किंग ,जूनियर

अर्थात् ऐसे व्यक्ति जो वास्तविक रूप से अज्ञानता के शिकार हैं वे इस संसार का कुछ भी भला नहीं कर सकते।अपितु अपनी अज्ञानता के कारण वो इस संसार को मुसीबत में ही डाल सकते हैं।वहीँ ऐसे लोगों कि अपेक्षा वे लोग और भी खतरनाक हैं जो विवेकशील होते हुए भी मूर्खतापूर्ण कार्य करते हैं और संसार का अहित करते हैं।इसलिए विवेक पूर्वक समझदारी से कार्य करना चाहिए।