विचारणीय:

बस वही करो ,जो किया जाना चाहिए।जरूरी नहीं है ये ख़ुशी हो ,लेकिन ये महानता है। –जॉर्ज बर्नार्ड शॉ

अर्थात् कभी भी इसलिए की ऐसा करना हमें ख़ुशी देगा कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिसे करना आवश्यक न हो।बल्कि ऐसा काम करो जो जरूरी हो ,चाहे इसको करते हुए आप को कोई ख़ुशी न मिल रही हो पर इससे किसी का भला हो रहा हो सकता है।और इसी में महानता है कि खुद की ख़ुशी के बारे में न सोच कर वो कार्य करना जो जरूरी हो।

हम वो हैं जो हमारे विचारों ने हमें बनाया है;इसलिए आप क्या सोचते हैं,इस बारे में ध्यान रखें।शब्द गौण हैं।विचार रहते हैं;वे दूर तक सफ़र करते हैं। –स्वामी विवेकानंद

अर्थात् हम वैसा ही बन जाते हैं ,जैसा हम सोचते हैं।यदि हम बुरा सोचेंगे तो बुरे बन जायेंगे और यदि हम सब का भला और सब की ख़ुशी सोचेंगे तो वैसे ही बन जायेंगे।इसलिए हमेशा ध्यान रखना चाहिए की हमारे विचार पवित्र हों और हम अच्छा और सुखद सोचें।

उम्र भर लोग आपको बावला बनाते रहेंगे,आपका अनादर करेंगे और आपसे खराब व्यवहार करेंगे।वे जो करते हैं उससे भगवान् को निपटने दो ,क्योंकि आपके दिल की नफरत आपको भी भस्म कर देगी। –विल स्मिथ

अर्थात् कभी भी किसी भी परिस्थिति में अपने दिल में नफरत न पैदा करें।क्योंकि नफरत की आग आपकी सोचने की शक्ति को नष्ट कर देती है और आप पतन के गर्त में गिरते चले जाते हैं।

यदि एक अंधे व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी आँखें मिल जाएँ और वो देख सकने में सक्षम हो,तो ये सदका जरिया या निरंतर दान है ,क्योंकि उस व्यक्ति के मरने के बाद भी उसके दान का लाभ निरंतर दूसरे व्यक्ति को मिलता रहता है। –मौलाना वहीदुद्दीन खान

अर्थात् कभी भी इस बात से संतुष्ट न हों कि आपने कुछ नश्वर पा लिया है अर्थात् धन-सम्पदा अर्जित कर ली है जो नाशवान है ,बल्कि उस अनन्त ख़ुशी के लिए ,परमात्मा की प्राप्ति के लिए और मोक्ष प्राप्ति के लिए प्रयत्न करते रहें।अपना आत्मिक विकास करें और परमात्मा से एकाकार हों।

रक्षाबंधन का उद्देश्य हमारे जीवन से भय को दूर करना है।ये भय ही है जो हमारी अच्छाई और रचनात्मकता को विकृत करता है।यह हमारे व्यक्तित्व को सिकोड़ता है और दूसरे लोगों के प्रति हमारे व्यवहार को बुरी तरह से प्रभावित करता है। -श्री श्री रवि शंकर

अर्थात् जब हम भयभीत होते हैं तो कुछ भी करने से डरते हैं और इस प्रकार हम कुछ भी नया नहीं सोच पाते और हमारी रचनात्मकता प्रभावित होती है।जब हम भयभीत होते हैं तो हर किसी को शक की निगाहों से देखते हैं और इस प्रकार उन को घृणा की निगाहों से देखने लगते हैं।रक्षाबंधन एक ऐसा त्यौहार है जिसमें बहिन भाई की रक्षा के लिए उसके हाथ में धागा बांधती है और इस प्रकार उस के भय को दूर करती है।