विचारणीय:७

मूर्ख पानी पर बनी लहरों के समान होते हैं क्योंकि जो कुछ भी वे करते हैं जल्दी से मिट जाता है ;जबकि नेक पत्थर पर नक्काशियों की तरह हैं,क्योंकि उनका छोटे से छोटा कार्य भी स्थायी होता है –होरेस

अर्थात् मुर्ख व्यक्ति बिना सोचे विचारे सब काम करते हैं,जिससे उन के सब काम खराब होते हैं।वे न केवल अपने आप को नुक्सान पहुंचाते हैं अपितु अपने साथ काम करने वालों को भी नुक्सान पहुंचाते हैं।ऐसे व्यक्तियों को कोई याद नहीं रखना चाहता और वे शीघ्र ही लोगों के मानस-पटल से ओझल हो जाते हैं।वहीँ नेकनीयती से काम करने वाला अपने सभी काम ईमानदारी और लगन से,सोच विचार कर करता है।इस तरह उन के द्वारा किये गए कार्यों का असर हमेशा के लिए रहता है।अपनी नेकनीयती के कारण वो लोगों के दिलों में स्थाई निवास करने लगते हैं।ऐसे व्यक्ति समाज में कोहिनूर हीरे के समान चमकते हैं।अत: हमेशा नेकनीयती से कार्य करना चाहिए।

जब हम जीवन में असली त्रासदी से मिलते हैं,हम दो तरह से प्रतिक्रिया कर सकते हैं –या तो आशा खोकर और आत्म-विनाशकारी आदतों में गिर कर,या इस चुनौती का उपयोग अपनी भीतरी शक्ति को पहचानने के लिए कर के-XIV दलाई लामा

अर्थात् प्रत्येक मनुष्य जीवन में मुसीबतों का शिकार होता है और ये हम पर निर्भर करता है कि हम उस मुसीबत का सामना किस प्रकार करते हैं।या तो हम बिलकुल ही नकारात्मक हो जाते हैं और आशा खो बैठते हैं।हताशा में पड़ कर न केवल हम परस्थिति को और भी जटिल कर देते हैं बल्कि कभी-कभी आत्म-हत्या जैसे विचारों के भी शिकार हो जाते हैं।वहीँ जब हम सकारात्मक रहते हैं और कठिनाइयों से लड़ने की ठान लेते हैं तो अपने अन्दर के बेहतर को निकाल पाते हैं।हम इस अनुभव से सीखते हैं,अपनी कमजोरियों को भविष्य के लिए दूर करते हैं और आत्म-विकास की दिशा में बढ़ते हैं।प्रत्येक मनुष्य को सकारात्मक रहते हुए कार्य करना चाहिए क्योंकि कठिनाइयों भरा वक्त पहाड़ की तलहट्टी के समान है यदि हम वहाँ नहीं रुके तो आगे पहाड़ की चढाई ही है अर्थात् सफलता ही है।

नदियाँ,तालाब,झीलें और धाराएँ –इन सभी के अलग-अलग नाम हैं,किन्तु सभी पानी धारण करती हैंठीक इसी प्रकार धर्म हैं-सभी सत्य धारण करते हैं-मुहम्मद अली

अर्थात् जिस प्रकार नदियों,तालाबों,झीलों के नाम अलग-अलग हो सकते हैं लेकिन उन में बहने वाला पानी एक ही है उसी प्रकार विश्व में अनेकों धर्म हैं जो विभिन्न नामों से पुकारे जाते हैं।इन सभी धर्मों की अपनी भाषा अपनी विचारधारा हो सकती है किन्तु सभी धर्मों के मूल में केवल एक ही बात है।सभी धर्म सत्य पर बल देते हैं।कहने का तात्पर्य यह है कि सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए क्योंकि सभी धर्म मूलतः एक ही तरह की शिक्षा अर्थात् प्रेम,विश्वास,परोपकार,सत्य की ही शिक्षा देते हैं।

वो कर सकता है जो सोचता है कि वो कर सकता है,और वो नहीं कर सकता जो सोचता है वो नहीं कर सकतायह एक निष्ठुर,निर्विवाद सिद्धांत है-पाब्लो पिकासो

अर्थात् किसी भी कार्य को करने के लिए पूरी लगन,मेहनत और आत्मविश्वास की जरूरत होती है।कोई भी कार्य एक बार में ही पूरा नहीं होता।हम गिरते हैं,उठते हैं,फिर गिरते हैं और फिर उठते हैं तब कहीं जा कर सफल होते हैं।कभी –कभी बिना प्रयास किये ही हम मान लेते हैं कि फलां काम हम से नहीं हो पायेगा।किन्तु ये सही नजरिया नहीं है।हम जैसा सोचने लगते हैं,वैसा ही मानने लगते हैं और वैसा ही होने लगता है।ये विश्वास की बात है।यदि हम सोचते हैं कि हम नहीं कर सकते तो हम कभी भी नहीं कर पायेंगे किन्तु यदि हम जानते हैं कि हम आज नहीं तो कल किसी कार्य को कर सकते हैं तो हम पायेंगे कि निकट भविष्य में वो कार्य हम कर लेते हैं।कहने का अर्थ है कि अपने ऊपर हमेशा विश्वास बनाए रखना चाहिए और तब संसार का कोई कार्य नहीं है जो हम न कर पायें।

अपने चेहरे को सूरज की चमक की ओर रखो और तुम्हें कभी छाया नहीं दिखाई देगी-हैलन कैलर

अर्थात् यहाँ सूरज की चमक से मतलब आशा,सकारात्मकता और विश्वास से है जो और कहीं नहीं है हमारे भीतर ही है।यदि हम अपना आत्म-विश्वास बनाए रखें,कभी भी निराश न हों और पूरे मन से प्रयत्न करते रहें तो कठिनाईयां,परेशानियां और दुःख जो छाया की भांति हमारे जीवन की ख़ुशी को ढक सकते हैं,कभी हमारे जीवन में नहीं आयेंगे अपितु हमारा जीवन खुशियों के प्रकाश से जगमगाता रहेगा।