विचारणीय :४

अपने स्वयं के मष्तिष्क में अपने खुद के लिए एक घर बनाएँ।इसे सजाने के लिए जिस की आपको जरूरत है ,वो आप पायेंगे –स्मृतियाँ ,मित्र ,जिन पर आप भरोसा कर सकते हैं ,सीखने का प्यार में  ….यह आपके साथ जाएगा जहाँ भी आप यात्रा करेंगे। –टेड विलियमस

अर्थात् हमारे साथ हर वक्त धन नहीं रह सकता।इतिहास गवाह है असंख्य लोगों ने विभिन्न तरीकों से धन का संचय  किया ,किन्तु अंत समय में भी धन उनके साथ नहीं गया और किसी किसी का तो धन ने जीवित ही साथ छोड दिया।पर हमारे मित्र ,हमारी अच्छी यादें ,और हमारी कुछ न कुछ सीखने की ललक कभी भी हमारा साथ नहीं छोड़ते और हमेशा ही हमारे साथ रहते हैं।

वे व्यक्ति जो कहते हैं कि ये काम नहीं हो सकता,उनको ,उन लोगों को बाधा नहीं पहुंचानी चाहिए जो वो काम कर रहे होते हैं। –जॉर्ज बर्नार्ड शॉ

अर्थात् संसार में ऐसे लोग बहुत हैं जो खुद तो कुछ करते नहीं और दूसरों को करने नहीं देते।वो किसी भी काम को करने से पहले ही कह देते हैं कि ये काम नहीं हो सकता।ऐसे लोगों को कम से कम उन व्यक्तियों के काम में रोड़ा नही अटकाना चाहिए जो ये काम कर रहे होते हैं।

स्वयं को खोलें,मुक्त जगह का सृजन करें ,बंधे हुओं को उनके बन्धनों से मुक्त करें। –अथर्ववेद

अर्थात् स्वयं को इन्द्रियों के गुलाम बनने से रोकें अपितु पहले स्वयं को ध्यान शक्ति के द्वारा इतना सबल बनाओ कि इन्द्रियाँ आपके नियंत्रण में रहें।इस प्रकार जब आप बंधन मुक्त हो जाएँ तो अन्यों की भी इन्द्रियों और विषयों के बंधन से छूटने में मदद करें।

मुक्ति केवल भगवान् के प्यार के माध्यम से ही आती है। –आदि ग्रन्थ

अर्थात् जब हम भगवान् से प्यार करते हैं जो सर्व शक्तिमान है तो हम अपने अन्दर से समस्त अवगुणों को त्याग देते हैं ।हम विषयों और अवगुणों से दूर हो जाते हैं और भगवान् के ही श्रीचरणों में हमारा ध्यान लगा रहता है ।हम मोह माया से भ्रमित नहीं होते और अंतत:मुक्त हो जाते हैं  अर्थात् मोक्ष को प्राप्त करते हैं।

तुम सत्य को जानोगे और सत्य तुम्हें स्वतंत्र कर देगा। –जॉन ८.३२

अर्थात् जगत मिथ्या है और भगवान् ही सत्य है।जो इस सत्य को जान लेता है वो फिर इस जगत के मोह में नहीं पड़ता ।उसका हर कृत्य भगवान् को समर्पित होता है और इस प्रकार वो मोक्ष को प्राप्त करता है अर्थात् स्वतंत्र हो जाता है।

गिरती सूखी पुरानी पत्ती पर नरम कोमल पत्ती उपहास करती है,गिरती पत्ती कहती है –“आज मेरी बारी है,कल तुम्हारी होगी,धीरज रखो,ओ मेरी प्यारी।” –कबीर दास

अर्थात् जो आया है उसे जाना ही होगा।मृत्यु शाश्वत है।इसके चंगुल से कोई भी बच नहीं सका है।इसी प्रकार बुढापा भी सब पर आता है।इसलिए कभी भी बूढ़े व्यक्ति का मजाक नहीं उडाना चाहिए क्योंकि आज अगर वो बूढ़े हैं तो कल को आप भी होंगे।