विचारणीय-६

गलतियाँ हमेशा क्षम्य हैं,यदि व्यक्ति में उन्हें स्वीकार करने का साहस हो–ब्रूसली

अर्थात् ये मानव प्रवृति है कि अक्सर वह गलतियाँ करता है और फिर उन्हें छुपाना भी चाहता है।शायद ऐसा करने का मुख्य कारण है कि वह दूसरों के आगे शर्मिंदा नहीं होना चाहता और शायद एक डर भी कि उसकी गलती की उसको माफ़ी मिलेगी या नहीं।एक गलती दूसरी गलती को जन्म देती है और एक तरह गलतियों का सिलसिला चल निकलता है।पर यदि हम अपनी गलतियों को छुपाने की बजाय उन्हें स्वीकार करने का साहस रखें तो एक तो इसे हमारा पश्चाताप समझ कर हमारी गलतियों को माफ़ कर दिया जाएगा,दूसरा इससे हमें अपनी गलती सुधारने का मौका मिलेगा ताकि आगे चल कर हम कोई और गलती न करें।इसलिए हमेशा अपनी गलतियों को स्वीकारने का साहस रखें।

क्षमा का अर्थ है कि आपको एक नयी शुरुआत करने के लिए एक और मौका दिया जाता है–डेस्मंड टूटू

अर्थात् जब आपकी गलतियों के लिए आप को क्षमा कर दिया जाता है तो इसका अर्थ ये कदापि नहीं है कि आप ये सोच कर खुश हों कि आप तो गलती कर के आसानी से बच गए और फिर से गलतियाँ करना चालू कर दें बल्कि इसका अर्थ ये है कि आप परखें कि आपने क्या गलती की है और भविष्य में दुबारा उस गलती को न करें और एक नयी शुरुआत करें।

बगीचे केवल ये कहने भर से कि ‘ओह कितने सुन्दर हैं’ और फिर छाया में बैठ जाने भर से नहीं बनते–रुडयार्ड किपलिंग

अर्थात् कर्महीन व्यक्ति को कुछ नहीं मिलता केवल कर्मनिष्ठ व्यक्ति ही स्वर्ग का निर्माण कर सकता है।एक बगीचे की सुन्दरता को बनाने और उसे बनाए रखने के लिए माली कितनी मेहनत करता है,तब कहीं जा कर उसे छायादार,सुन्दर और मोहक बना पाता है।इसी प्रकार किसी काम को देखकर ये कह देना कि कितना  फायदे का काम है काश मैं भी ये काम कर सकता,काफी नहीं है।उसके लिए प्रयास भी करना होगा।यदि हम किसी उच्च पद आसीन व्यक्ति जैसे ,किसी विद्वान जैसे या किसी गुरू जैसे बनना चाहते हैं तो केवल यह कह भर देने से कि देखो कितना गौरवमयी पद है,कितने विद्वान व्यक्ति हैं या कितने तेजस्वी गुरू हैं,काम नहीं चलेगा।अपने लिए स्वर्ग जैसा माहौल निर्मित करने के लिए कड़ी मेहनत,त्याग और दृढ संकल्प की जरूरत है।

अनन्तता,एक परिमित (जिसकी कोई सीमा हो)बीज में मौजूद हैजब एक बीज बोया जाता है तो वो एक पेड़ बन जाता हैफिर उस पेड़ से एक फल और उस फल से फिर से बीज,फिर बीज से एक नया पेड़,इसलिए एक परिमित बीज में,विकसित होने के लिए अनंत क्षमताएं हैं–स्वामी सुखाबोधानन्दा

अर्थात् कभी भी अपने को कम कर के ना आंकें।आज आप बेशक कुछ कम हो सकते हैं पर आपकी दृढ इच्छाशक्ति ,मेहनत और विश्वास एक दिन आपको सर्वोच्च शिखर तक ले जा सकता है।आप किसी भी क्षेत्र में सफल हो सकते हैं।इसलिए बिना घबराये,अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाये जाएँ ताकि आप उन्नति को प्राप्त कर सकें और जीवन में विकसित हों।

कोई आज छाया में बैठा है क्योंकि किसी ने बहुत समय पहले एक पेड़ लगाया था।वारेन बुफ्फेट

अर्थात् हमेशा ऐसे कार्य करते चलो जिनका लाभ सम्पूर्ण मानव जाति को मिले।कभी भी कोई काम केवल अपने फायदे का सोच कर न करो।जब कोई पेड़ लगाता है तो ये सोच कर नहीं लगाता कि उसकी छाया उसी को मिलेगी बल्कि उसकी छाया तो अन्य लोग लेते हैं।इसी प्रकार हम सभी को परोपकार की भावना से काम करना चाहिए और जो कुछ भी हम करते हैं वो ये सोच कर करना चाहिए कि इससे दूसरों को कितना लाभ मिलेगा।