वेश-भूषा से किसी को न आंकें:-

एक समय की बात है।एक जिज्ञासु छोटा चूहा था।उसने घर छोड दिया और देश भर में इधर-उधर भटकने लगा।एक दिन वह एक खेत में पहुँचा।वहाँ उस के सामने दो नारंगी रंग के जानवर थे।ऐसे जानवर उसने पहले कभी नहीं देखे थे।

एक बड़ा और सुन्दर था,जिसके चार पैर थे और जिसका शरीर मुलायम लाल रंग के रोवों से ढका था।उसके शानदार सफ़ेद गलमुच्छे थे जो उसको एक अलग ही प्रतिष्ठा दिला रहे थे।वह एक कोने में ऊँघ रहा था।

दूसरा जंतु अलग था।इसके दो पैर थे और ये शानदार लाल,हरे और पीले पंखों से ढका था।उसके सिर पर लाल पंखों का बहुत ही सुन्दर मुकुट था और उसकी तेज पीली चोंच थी।एक जोड़ी आँखें,जो उस चूहे को बड़ी ही निर्दयी महसूस हो रहीं थी,चूहे को घूर रहीं थीं।

“ओह,आ..प …….प कैसे हैं?”चूहे ने डरते-डरते शुरुआत की।जवाब में उस पंख वाले शैतान ने अपनी छाती बाहर फुला ली,कुकड़ू कू की एक कर्णकटु ध्वनि बाहर निकाली और अकड़ कर उस छोटे चूहे की ओर चला,जो अब तक डर के मारे लकवाग्रस्त हो गया था।उसने एक घबराहट भरी चीख़ निकाली और वहाँ से भाग निकला।

उसने घर की दिवार में एक छेद खोज निकाला और उसमें गोता लगा गया।अन्दर तीन बड़े चूहे थे जिन्होंने उसे बड़े विस्मय से घूरा।उन्होंने एक स्वर में उस से पूछा,”आप कहाँ से यहाँ आ गए?”

“मैं आ गया हूँ …….”,छोटा चूहा हाँफा,”बहुत दूर से!आप कौन हैं?”हम खेत के चूहे हैं और यहाँ रहते हैं,”उनमें से एक चूहे ने जवाब दिया।”तुम इतना डरे हुए क्यों हो?”उसने पूछा।

तब उस छोटे चूहे ने उन्हें उन जंतुओं के बारे में बताया जो उसे अहाते में मिले थे,एक रूपवान और हानिरहित और दूसरा चमकदार रंगीला और क्रूर।तीनों बड़े चूहे हंसने लगे।

“क्या तुम नहीं जानते?जिस जंतु को तुम क्रूर बता रहे हो वो एक मुर्गा है जो हमें कभी भी हानि नहीं पहुंचाता,किन्तु वो जिसे तुमनें अच्छा बताया,हमारा सबसे घातक दुश्मन है,एक बिल्ली!अगर वह तुम्हे देख लेती,तो तुम हमें ये कहानी बताने के लिए यहाँ नहीं होते।”

इसलिए जैसा कि उस दिन छोटे चूहे ने सीखा,केवल वेश-भूषा से किसी को न आंकें।हीरा अनमोल होता है लेकिन तराशे जाने से पहले पत्थर की भांति होता है।यदि हम उसे पत्थर समझ कर छोड़ दें तो हम उसकी असलियत कैसे जानेंगे कि जिसे हम पत्थर समझ रहे थे वो तो एक हीरा है।

इसी प्रकार किसी भी मनुष्य की वेश-भूषा से उसकी असली कीमत का आंकलन नहीं किया जा सकता।गांधी जी हमेशा साधारण वेश-भूषा में रहते थे किन्तु उन्होंने भारत को स्वतंत्र कराने की लड़ाई में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और राष्ट्रपिता कहलाये।इसी प्रकार लाल बहादुर शास्त्री जी साधारण से व्यक्ति दिखाई देते थे किन्तु वे देश के प्रधानमन्त्री बने।

कहने का अर्थ है कि असली सुन्दरता,गुण और प्रतिभा भीतरी होती है जो चिरस्थाई है,बाहर की सुन्दरता तो क्षणभंगुर है।इसलिए कभी भी बाहरी वेश-भूषा से किसी का आंकलन न करें।अपितु मन की सुन्दरता को परख कर ही किसी व्यक्ति के बारे में निर्णय लें।