व्यर्थ के विचारों से खुद को मुक्त करने के लिए माफ़ करें और भूल जाएँ :-

अक्सर हम अपने गुजरे दिनों की दुखमयी कहानियों को याद करते रहते हैं और फिर उनका बयान करते रहते हैं जो हमारी अशांति का एक प्रमुख कारण है।

उदाहरण के लिए हम अक्सर शिकायत करते रहते हैं कि अमुख व्यक्ति ने मुझे ठीक से ट्रीट नहीं किया,अमुख व्यक्ति ने मेरी मदद नहीं की जब मुझे उसकी मदद की जरूरत थी।मेरे बच्चे मेरा कहना नही मानते आदि-आदि।

इस प्रकार हम बीते दिनों के दुखद अनुभवों का रोना रोता रहता है और अशांत रहता है।क्योंकि बीते दिनों के दुखद अनुभवों को याद करने से उनका दुःख बना रहता है।हालांकि जब हम ऐसा कर रहे होते हैं तो हम उस दुःख को न्योता नहीं दे रहे होते।

हम अपनी इस आदत के कारण खुद को व्यर्थ के दुःख में उलझाए रखते हैं और छड़ी का गलत सिरा पकडे रहते हैं।ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार एक उल्लू पेड़ की डाल पर उल्टा लटका हुआ खुद को सीधा करने के लिए जोर-जोर से मदद की गुहार लगाता रहता है।

फूल चुनें न की कांटे :

शान्ति प्राप्त करने के लिए हमें ये सीखना होगा कि हमारी ये भावनाएँ उस व्यक्ति की भांति हैं जो खुद ही अपने लिए काँटों का चयन करता है बजाय फूल चुनने के और इस प्रकार अपने ऊपर दुःख को थोप लेता है।

एक कांटे का डंक अभी निकलता नहीं और हम दूसरे अधिक उदासी भरे घटनाक्रम को आमंत्रित कर लेते हैं जो हमारे पुराने घावों को फिर से हरा कर देता है।यदि हम इसी तरह पुराने घटनाक्रमों की चुभती यादों को आमंत्रित करते रहेंगे तो हमारा मष्तिष्क इन्ही बातों से भरा रहेगा जो आगे चल कर नासूर बन जाएगा।

अगर हम शान्ति की कामना करते हैं तो हमें इन काँटों भरी चुभती यादों को जो हमें बार –बार याद आ कर दुखी करती हैं,प्रयास द्वारा जला डालना होगा और जीवन को पुष्प के समान सुखद बातों से सजाना होगा।

पिछली घटनाओं को पिशाच की भांति मानें :  

जैसा हम सोचते हैं या चाहते हैं वैसा ही प्राप्त करते हैं।जब हम पिछली बातों को याद करते रहेंगे तो वे बुरी आत्माओं की भांति हमें अपने वश में कर लेंगी।बीता समय भूतकाल या भूत होता है और इनके साथ भाईचारा करने से अर्थात् इनसे घिरे रहने से हमारा व्यवहार और तरीके भी इन्ही की भांति हो जाते हैं।

हमें ये याद रखना होगा कि भूतकाल की बुरी घटनाएँ एक पिशाच की भांति हैं और हमें इन से छुटकारा पाना होगा।हमें हमेशा आगे की ओर देखना होगा और अपनी जिन्दगी को अपने सिद्धांतों के अनुरूप ही अच्छा और रोशन करना होगा।क्योंकि हमारा भविष्य इस बात पर ही निर्भर करता है कि हम आज किस प्रकार सोचते और करते हैं।

बीती घटनाओं की यादें हमें पीछे कर देती हैं :

संसार एक रंगमंच है और हमें इस बात को हमेशा याद रखना होगा कि हमारे जीवन की घटनाएँ एक फिल्म की भांति हैं।प्रतिक्षण ये फिल्म आगे की ओर चलती रहती है।पर जब हम अपने जीवन की पुरानी घटनाओं को याद करते हैं तो हम उस फिल्म को रोलबैक करते हैं और बार –बार ऐसा करना जीवनरूपी फिल्म को देखने का सही तरीका नहीं है।

अत: हमें प्रसन्नतापूर्वक प्रतिक्षण गुजरने वाली घटनाओं का आनंद लेना चाहिये।क्योंकि यदि हम हमेशा गुजरे हुए कल की घटनाओं को बार-बार याद करते रहेंगे तो आने वाली घटनाओं की ख़ुशी को खो देंगे और पीछे रह जायेंगे।

हमें सभी घटनाओं को निर्लिप्त हो कर देखते रहना चाहिये जैसे-जैसे वो घटित होती हैं और जो अपरिहार्य रूप से बीत चुका है उसमें न तो खुद को फंसाना चाहिए और न ही कभी याद रखना चाहिए।

अतीत को अतीत ही रहने दो :

अक्सर हम अतीत की बातों को याद कर-कर के शिकायत करते रहते हैं कि फलां ने मेरे साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया ,फलां ने मेरी मदद नहीं की।पर हम ये नहीं सोचते कि ये पुरानी बात थी और तब से अब तक उन व्यक्तियों में भी और हम में भी काफी बदलाव आ गया है।

हो सकता है तब वैसा हमारे ही किसी बुरे कर्म के कारण हुआ हो या किसी परस्थिति वश ऐसा हुआ हो।अब हमें इस बदलाव को स्वीकार करना चाहिए।क्या बार-बार अतीत की बातों को याद करके हम अपने दर्द को बढ़ा ही नहीं रहे होते?क्या ये ये सिद्ध नहीं करता कि हम दर्द और बैचनी से प्यार करते हैं?अन्यथा हमें ये पता होता कि अपने इर्द-गिर्द दर्द के धागे बुनने से कोई फायदा नहीं होता।

हर कोई शान्ति और ख़ुशी चाहता है और हम भी चाहते हैं और इस के लिए हमें समझना होगा कि अतीत तो अतीत है और गुजर चुका है।अतैव हमें अपने भविष्य की और ध्यान देना चाहिए।उदासी को भगा के और और ख़ुशी के विभिन्न तरीके अपना कर हमें अपने वर्तमान को और भविष्य को सुखद बनाना चाहिए।

हंस की तरह जीवन से मोती चुनो:

क्या हमें कोवे की तरह जो हमेशा कूड़े के ढेर पर बैठा रहता है और गंदगी से अपना भरण-पोषण करता है,हमेशा अतीत की कडवी यादों के ढेर पर जो की मैल का ढेर ही है,बैठे रहना चाहिए या एक हंस की भांति जो हमेशा मोती चुगता है ,सद्गुणों को चुनना चाहिए और पुराने कडवे अतीत को भुला देना चाहिए?

अतीत से केवल ये सीखना चाहिए कि हम आगे अतीत की गलतियों को न दोहरायें न की बार –बार उन्हें रट कर फिर से वही गलती करें।हमें अतीत से केवल अनुभव प्राप्त कर आगे की ओर बढ़ना चाहिए।

समय निरंतर चलता रहता है :

हमें हमेशा ये ध्यान रखना चाहिए कि वक्त कभी नहीं रुकता।घटनाएँ एक के बाद एक होती रहती हैं और हमारे अतीत का हिस्सा बनती चली जाती हैं।यदि हम अपना वर्तमान समय अतीत के बारे में सोचने में नष्ट कर देंगे तो हमें बाद में पछताना पड़ेगा कि हमने अपना वर्तमान भी अपने हाथों से गवां दिया है।

हम पिछला वक्त तो अफ़सोस में निकाल देते हैं और वर्तमान समय उस बीते समय की घटनाओं को याद कर के नष्ट कर देते हैं।ऐसा न कर के और उन महत्वहीन व्यक्तियों और घटनाओं को याद न कर के हमें परमात्मा को याद करना चाहिए।क्योंकि ऐसा कर के ही हम प्रसन्न रह सकते हैं और अपने जीवन को सम्पूर्णता से जी सकते हैं।

किसी ने कहा है जैसा हम सोचते हैं वैसा ही बन जाते हैं।यदि हम अतीत की बुरी घटनाओं को ही याद करते रहेंगे और उन में ही जीते रहेंगे तो हम भी वैसे ही बन जायेंगे।हमें अपने कर्मों को अच्छा बना कर न केवल अपने वर्तमान को सुधार लेना चाहिए बल्कि अतीत के किये हुए बुरे कर्मों के दाग भी धो लेने चाहिये।कहीं ऐसा न हो की हम अतीत में उलझे रहें और समय निकल जाए।

इसलिए हमें अतीत की दुखमयी और खराब यादों को भूल जाना चाहिए और उन लोगों को जिनके द्वारा ये दुःख हमें मिले हैं,उन्हें माफ़ कर देना चाहिए ताकि व्यर्थ के विचार हमें तंग न करें और हम आने जीवन में आगे बढ़ सकें।