सच्चे मित्र एवं मित्रता:-
 

सच्चे मित्र प्रेम की मूरत है। सच्चा मित्र वह है जो हमारी भावनाओं को समझें। सच्चा मित्र वह है जो   उस वक्त हमारा साथ देता है जब सारी  दुनिया हमारा साथ छोड़ देती है। सच्ची मित्रता से बड़ी भावना इस संसार मे कोई नहीं है। सच्चा मित्र वही है जो हमारे  अंदर की अच्छाइयों को उभारने मे हमारी मदद करे।

सच्चा मित्र हमारे अच्छे समय को और  अच्छा और हमारे बुरे  समय को आसान बना देता है। सच्चा मित्र आपकी  परेशानियों को अपना बना लेता है ताकि आप अकेले इसे ना झेलें। सच्ची मित्रता जीवन मे अच्छाइयों को बढती है और बुराइयों का नाश कर देती है। सच्ची मित्रता के बिना जिंदगी एक मरुस्थल की भांति है। सच्चे मित्र हों तो हमें भय करने की आवश्यकता नहीं है। सच्ची मित्रता हमारे जीवन मे एक पुरस्कार की तरह है।

सच्ची मित्रता दो शरीर एक जान के समान है। सच्चा मित्र हमारी असफलताओं पर हमें सम्भालता है और हमारी सफलताओं को मनाता है। सत्य के रास्ते पर चलने वाला कभी नहीं भटकता। मित्र अपनी ही प्रतिमूर्ति है। सच्ची मित्रता मे संदेह का कोई स्थान नहीं है। सच्ची मित्रता गुलाब के फूल के समान है जिसकी खुशबू हर तरफ फैलती है। सच्ची मित्रता ही असली दौलत है। सच्चे मित्र कभी भी पीठ पीछे हमारी बुराई नहीं करते।

सच्ची मित्रता उस दीपक के समान है जो  हमारे जीवन के अन्धकार को प्रकाश मे परिवर्तित करती है। सच्चा मित्र वह है जो हमें ले कर कभी भी शर्मिंदा नहीं होता। सच्चे मित्र कभी भी दूसरे के आगे हमें नीचा नहीं दिखाते। सच्चे मित्र गुरु के समान हैं जो हमें अच्छी बातें सीखाते हैं,हमारी गलतियां हमें बताते हैं और उन्हें सुधारने मे हमें मदद करते हैं। सच्चे मित्र वटवृक्ष के समान होते हैं जो हमारे  ऊपर आने वाली सारी  परेशानी अपने ऊपर ले लेते हैं और हमें दुःख से छाया प्रदान करते हैं। जो  हमसे भी ज्यादा हमें समझे ,वही सच्चा मित्र है। मित्रता सबसे उत्तम उपहार है जो हम किसी को दे सकते हैं। सच्चा मित्र वही है जो तब भी हमारी पीड़ा और परेशानी समझ लेता है ,जब हम उसे छिपाने की कोशिश करते हैं।