सफलता की कुँजी:-

सफलता की कुँजी है -कठोर परिश्रम, दृढ संकल्प ,अपने काम के लिए तीव्र प्यार,प्रत्यक्ष से परे देखना और असफलताओं को स्वीकारना।

खुशी का राज है- कठिनाई।केवल कठोर परिश्रम और दृढ संकल्प के द्वारा ही कोई अपने सपनों को पूरा कर सकता है।बहुत सारे लोग ,जिनके पास सब कुछ होता है,आलसी हो जाते हैं ,जबकि बहुत से ,जिनकी जिन्दगी कठिनाइयों में बीती है ,शीर्ष पेशेवर बन जाते हैं।

यहाँ एक कहानी है,एक युवा और गरीब विद्यार्थी की जिसके पास एक उत्कृष्ट शैक्षणिक रिकॉर्ड था।वह एक बड़ी कंपनी में प्रबंधकीय पद के लिए साक्षात्कार देने गया।चेयरमैन ने साक्षात्कार के बाद जाना कि उस लड़के के पिताजी नहीं थे और उसकी पढाई का सारा खर्चा ,उसकी माताजी ,जो एक आया थीं ,उठाती थीं।

चेयरमैन ने कहा ,”जब तुम घर जाओ ,अपनी माताजी के हाथ साफ़ करना और तब मुझसे कल मिलना।”

सफाई करते समय,उस युवा ने गौर किया कि उसकी माता जी के हाथों में काफी छाले और जख्म थे,जो उसके द्वारा छुए जाने पर ,उसकी माताजी को बहुत दर्द दे रहे थे। यह पहली बार था,जब उस युवा को एहसास हुआ कि ये छाले और जख्म ,कीमत थी जो उसकी माँ ने उसकी पढाई के लिए अदा की थी।उसने अपनी माँ के दोनों हाथों को चूमा और रसोई में पड़े हुए बाकी सारे बर्तन धो डाले।

अगले दिन ,वह फिर से उस कंपनी के ऑफिस गया।उसकी आँखों में आंसू देख कर चेयरमैन सब कुछ समझ गया और बोला ,” मेरे प्रबंधक में जिस बात की मैं तलाश कर रहा था ,वह यही है।मैं एक ऐसे व्यक्ति को भरती करना चाहता था जो मेहनत के पैसों का मोल समझे और दूसरों की मदद की सराहना करे।”

इस कहानी से यही सीख मिलती है कि आत्मविश्वास दृढ संकल्प, और कठोर परिश्रम असफलता रुपी बीमारी को ख़त्म करने के लिए सबसे बेहतर औषधि हैं ,ये आपको एक सफल व्यक्ति बना सकती हैं।

दृढ संकल्प और कठोर परिश्रम के साथ-साथ अपने काम के प्रति तीव्र प्यार होना भी बहुत जरूरी है,क्यूंकि यदि अपने काम के प्रति तीव्र प्यार नहीं होगा तो न तो दृढ संकल्प पैदा होगा और न ही कठोर परिश्रम करने की इच्छा ही जागृत होगी।कभी आप ने सोचा है कि आप उस समय क्या करते हैं जब आपको कोई ऐसा काम करने को कहा जाता है ,जिसे आप पसंद नहीं करते ?सरलता से ,बस थोड़े समय के बाद ऐसे काम को भूल कर,फिर से ऐसे काम के साथ चले जाते हैं जिसके साथ आप व्यस्त होना पसंद करते हैं।

कई एक जीवन ,सही काम को लेने में नाकाम रहने और तब ऐसी परिस्थति की वजह से नाखुश होने के कारण ,बर्बाद हो जाते हैं।एक खुश और समृद्ध जीवन वो होता है जो हाथ में के कार्य के प्रति  सौ प्रतिशत निष्ठा और ध्यान रखते हैं।अर्थात् सम्पूर्ण प्रेम उस कार्य के प्रति रखते हैं जिसे आप कर रहे हैं।इस तरह का  दृष्टिकोण रखने का मतलब होता है,यक़ीनन सफलता और कई पुरूस्कार और प्रतिफल जो आपके अन्दर एक  पूर्ति की भावना पैदा करते हैं।

ये उतना ही सरल है जितना एक किताब को पढना या न पढना,इस के बावजूद कि आप इसे पसंद करते हैं या नहीं।जब आपकी  किसी विशेष बात में कोई दिलचस्पी नहीं है तो उस पर अपना वक्त बर्बाद करके क्या फायदा ?

आगे बढ़ना और हरे चारागाह (अर्थात् ऐसा कार्य जिसे करना आप पसंद करते हों) के लिए कोशिश करना ,ये हमेशा बेहतर विकल्प है।कहने का अर्थ ये है कि यदि आप ऐसा कर सकते हैं तो कोई ऐसा कारण नहीं है कि आप ऐसी नौकरी या कार्य लेने का न सोच सकें जो आपको भविष्य में सफलताओं की ऊंचाई तक ले जायेगी। .

आपका काम ,आपकी उसके प्रति पूरी भक्ति और प्यार के साथ, आपका सबसे मनोरंजक और संतोषजनक साधन बन जाएगा ,एक ऐसी जिन्दगी जीने के लिए जो न केवल आनंदमयी बल्कि परिपूर्ण करने वाली भी होगी।

इसी सन्दर्भ में सुप्रसिद्ध बहुज्ञ , लेखक, और राजनीतिक विचारक बेंजामिन फ्रेंक्लिन कह उठे थे ,”यदि जूनून आपको हांकता है ,विवेकबुद्धि को उसकी लगाम पकडे रहने दो।”

अर्थात् ,जुनून और प्यार द्वारा संचालित विवेकबुद्धि,निश्चित रूप से आपको,आपके अपने काम के प्रति प्यार में डाल सकती है और एक समय आएगा  जब आप काम में डूबे रहने वाले हो जाओगे और काम और खेल में फर्क करना भूल जाओगे।आपका ,आपके काम के प्रति जुनून आपको ऐसा महसूस करने पर विवश कर देगा जैसा कि अमेरिकन हास्य अभिनेता जॉर्ज बर्न ने कहा था ,”मैं किसी ऐसी बात के साथ असफल रहना पसंद करूँगा जिससे मैं प्यार करता हूँ ,बजाय उस बात के साथ सफल होने के जिससे मैं नफरत करता हूं।”

अब असफलता की बात करते हैं।असफल होना भी सफल होने की ही एक कुँजी है।असफलता क्या है और हमें इसका सामना क्यूँ करना चाहिए ?असफलता एक प्रक्रिया है ,जिसमें एक व्यक्ति किसी वांछित कार्य को निर्धारित समय सीमा में पूरा नहीं कर पाता।मुख्य कारण जिसकी वजह से हम असफलता का मुँह देखते हैं ,वो ये नहीं है कि हमारी उस कार्य में रूचि नहीं है ,बल्कि ये है कि हम में धीरज की कमी है।

सबसे  बड़ी समस्या है ,दृढ़ता की कमी जो अपनी इच्छा से बाहर कुछ काम करने के दायित्व से घिरी हुई हो।उदाहरण के लिए,अभिभावक अक्सर अपने बच्चों का कैरियर निर्धारित करते हैं और अधिकाँश बच्चे इस बोझ के साथ जीवन का सामना करने में असमर्थ होते हैं कि उनको मनमुताबिक कैरियर नहीं मिला ।असफलता के डर से,कई,अंततः खिन्न हो जाते हैं।

आजकल बच्चों में खिन्नता आम होती जा रही है।एक सर्वे के मुताबिक़ 13 साल से कम उम्र के बच्चों को समान मानसिक दबाव होता है जितना कि तीव्र अवसाद से पीड़ित व्यक्तियों को १९५० में होता था।इसी वजह से आत्महत्या के मामलों में भी तेजी से वृद्धि होती जा रही है।

हमें ये जानना होगा कि विष के महानतम व्यक्ति एक न एक बार असफल अवश्य हुए हैं,किन्तु उनके धीरज और दृढ़ता ने उन्हें जीवन में असीम ऊँचाइयों तक पहुँचाया।उदाहरण के लिए मार्क ज़ुक्करबर्ग,जो कि एक कॉलेज ड्रॉप आउट था ,ने सबसे बडी सोशल नेटवर्किंग साईट फेसबुक स्थापित की।इसी प्रकार बिल गेट्स का भी उद्दहरण दे सकते हैं।अपने ही देश में लाल बहादुर शास्त्री जी जैसे व्यक्ति थे जिन्होनें गरीबी के बावजूद प्रधानमन्त्री बनने तक का सफ़र तय किया।

अधिकाँश लोग ,जब सफलता उनके कदम चूमने ही वाली होती है ,हार मान लेते हैं।अत: कभी भी हार नहीं माननी चाहिए।अपितु जो प्रत्यक्ष है अर्थात् असफलता ,उस से परे देखना चाहिए।यदि हम उस अंतिम क्षण पर न घबरा कर ,उस क्षण के पार देख सकते ,तो हम देख पाते कि सफलता तो बस एक कदम की दूरी पर ही है।और ऐसा सोच कर यदि हम हार नहीं मानते तो सफलता का स्वाद चखने से हमें कौन रोक सकता था।

लंबी अवधि के नजरिए अर्थात् दूरदृष्टि,उर्ध्वगतिशीलता का सबसे सटीक कारक है।सफल व्यक्ति ,वर्तमान में बलिदान करते हैं जिसकी अदायगी सालों बाद ही हो पाती है।वो प्रत्यक्ष के परे देखते हैं और बुद्धि द्वारा निर्देशित होते हैं व स्थिर और केन्द्रित होते हैं। वो जानते हैं कि मेहनत के बल पर जिस सफलता के पेड़ को वो खड़ा कर रहे हैं उसके फलों का स्वाद आने वाली पीढियां खायेंगी।इसके ठीक विपरीत,असफल व्यक्ति तुरंत संतुष्टि पाना चाहते हैं और उसी के बारे में अधिक चिंतित होते हैं।वे सनकी,कल्पनावादी ,चंचल, अस्थिर और  अदूरदर्शी दृष्टिकोण वाले होते हैं।इसलिये सफलता प्राप्त करने का पहला कदम है – बुद्धि का विकास।

सभी महान नेताओं में एक विज़न था।महात्मा गाँधी जी ने सच्चाई और न्याय के लिए कार्य किया।नेल्सन मंडेला ने रंगभेद मुक्त साउथ अफ्रीका का सपना देखा था।मार्टिन लूथर किंग ने कालों के समान अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी थी।आपकी मार्गदर्शक शक्ति क्या है ?

अपनी दीर्घकालिक दृष्टि अर्थात् दूरदृष्टि को विकसित करो।उदाहरण के तौर पर ,आप अगले २०सालों में आप सबसे ज्यादा क्या चाहते हैं ?आप अपना जीवन किस तरह से बिताना चाहते हैं ?आपके लक्ष्य संगृहित होने चाहियें, न की वैयक्तिक.ऐसे आदर्शों के बारे में सोचो जो लोगों के दिलों को छू ले और उनको भी  शामिल होने के लिए प्रेरित करेगा।बड़ा सोचो और लोक-संग्रह के लिए,संसार की भलाई के लिए काम करो।भविष्य अमूर्त हो सकता है लेकिन आपकी कार्य योजना मूर्त है।

साथ ही साथ जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करें।सुझाव लेने के लिए तैयार रहें।स्वार्थ आपको रोकता है।अपनी निजी इच्छाओं से ऊपर उठें,एक उच्च इच्छा पालें।अपना दिमाग को खोलकर पहले मैं –पहले मैं करने की बजाय ,दिमाग की डिफ़ॉल्ट सेटिंग आपके बाद पर सेट करो।पहले दूसरों के लिए कुछ करो ,फिर अपने बारे में सोचो। मुनाफाखोरी से परोपकार करने की भावना पर स्थानांतरित हो जाओं।दूसरों के लिए करुणा महसूस करो।चीजों को उनके नजरिये से देखो।ब्रह्मांड से परे सोचो।प्रकृति के चमत्कारों पर आश्चर्य प्रकट करो कि किस दिव्य ताकत ने इस खूबसूरत ब्रह्माण्ड को बनाया ?

ऐसे गुणों का विकास करो जो आपको आपके लक्ष्य तक ले जाएँ .आत्मसंयम ,किसी भी उपलब्धि के लिए अत्यंत आवश्यक है।जब आप उच्च के लिए एक जुनून का पोषण करते हैं तो आप निम्न की ओर से उदासीन हो जाओगे।इसी  को वैराग्य कहते हैं।अलग ढंग और नए सिरे से सोचो।बुनियादी बातों पर वापस जाओ।सवाल करें ,जांच करें और प्रतिबिंबित करें।सबसे महत्वपूर्ण,अपने भीतर देखें।अपने साथ समय बिताएँ।

अत: कठोर कठोर परिश्रम करें,अपने दृढ संकल्प को बनाए रखें ,अपने काम से प्यार करें और असफलताओं से न डरें और इस प्रकार सफलता की ऊँचाइयों को छुएँ।क्योंकि यही सफलता की कुँजी हैं।