सफलता प्राप्त करने के लिए :-

अपने भय और असुरक्षा की भावना पर काबू पायें :

अक्सर व्यक्ति पुरानी यादों और बातों से घिरा रहता है और उन्हें याद कर-कर के पछताता रहता है।वो भयभीत रहता है कि अतीत की वो बुरी घटनाएँ कभी दोबारा न घट जाएँ।अक्सर लोग इस बात से भी भयभीत रहते हैं कि अन्य लोग उन्हें धोखा दे देंगे।उनके दिमाग में अक्सर ये प्रश्न घूमता रहता है कि फलाँ ने मुझे धोखा दे दिया तो क्या होगा?ये सभी एक तरह की बीमारी के ही लक्षण हैं जिसे हम असुरक्षा की भावना कह सकते हैं।

असुरक्षा की भावना से घिरना स्वाभाविक लग सकता है,पर ये हमारी भीतरी दुनिया के लिए कितना घातक है,हम इसका अंदाजा भी नहीं लगा सकते।लोग अक्सर विश्वासघात के डर में क्यों जीते रहते हैं?कभी सोचा है?ऐसा इसलिए है कि जब वे इसके शिकार होते हैं तो उन्हें चोट पहुँचती है और वो इस दर्द की भावना को बर्दाश्त कर सकने में खुद को सक्षम नहीं पाते जो उनको असुविधाजनक लगती है।

पर हमें ये बात ध्यान रखनी होगी कि चाहे लोग हमें कितना ही धोखा क्यूँ न दें,कितना ही विश्वासघात क्यूँ न करें या हमसे झूठ क्यूँ न बोलें,पर संसार में कोई भी इतना सक्षम नही है वो हमें हमेशा के लिए दुःख दे सके।केवल हम स्वयं ही अपने आप को हमेशा के लिए चोट पंहुचा सकते हैं।

हमारे भय और असुरक्षा की भावनाएँ अक्सर हमारे द्वारा ही निर्मित होते हैं और सबसे पहले हम ही इसे अनुभव करते हैं और बाद में अन्य इसे अनुभव करने लगते हैं।हमें ये निर्णय लेना होगा कि हम इस तरह की भावनाओं को जन्म नहीं लेने देंगे।यदि कोई हमें धोखा देता है तो हम उसे माफ़ कर देंगे और ख़ुशी-ख़ुशी आगे बढ़ जायेंगे।क्षमा कर देना आधी समस्याओं का हल है।कभी अन्यों पर शक न करो और न ही ये सोचते हुए जिन्दगी बिताओ कि अगर उन्होंने फिर से धोखा दिया तो क्या होगा।

हमारी यही शक्ति एक दिन उस तक पहुँच जायेगी और उसे अपने असली  स्वभाव का एहसास होगा कि उन्होंने आप के साथ कितना बुरा किया था।उन्हें इस डर के एहसास के साथ जीने दें कि पता नहीं अब आप उन्हें क्या जवाब देंगे और खुश रहें कि आप ने सही निर्णय लिया और आप असुरक्षा की भावना में नहीं पड़े और आगे बढे।आगे बढ़ें और सफलता की राह पर अग्रसर हों ,अपने सभी डरों और असुरक्षा की भावनाओं को पीछे छोड़ते हुए।

पलायनवाद आसान है,परन्तु विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के लिए साहस की जरूरत होती है:

अक्सर हम अपनी असुरक्षा की भावना से ग्रसित हो जाते हैं या जब हमें विपरीत परिस्थितियाँ चारों ओर से घेर लेती हैं,तो हम इन परिस्थितियों से भागने लगते हैं।हम अक्सर अपने इर्द-गिर्द एक सुविधा का वातावरण बना लेते हैं और फिर उस से निकलने का कभी प्रयास नहीं करते।किन्तु क्या आगे बढ़ने के लिए ये सही दृष्टिकोण है?

नहीं।हमें अपने भीतर एक साहस की भावना को पैदा करना होगा जिससे हम विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए घबराएँ नहीं और उनका डट कर सामना कर सकें।यदि हम ऐसा कर सके तो विपरीत परिस्थितियों को गुजर जाने में भी वक्त नहीं लगेगा और हम सफलता की अपनी मंजिल की ओर कदम सुगमता से बढ़ा सकेंगे।

सफलता केवल उन के ही कदम चूमती है जो हार मानने के लिए तैयार नहीं हैं :

हमारा मस्तिष्क एक बैंक की भांति है।रोज हम इसमें विचारों के बीज डालते हैं जो आगे चल कर हमारी यादें बन जाती हैं।हमें हमेशा कोशिश कर के अपने दिमाग में अच्छे विचार डालने चाहियें जिससे न केवल हमारा शरीर सुचारू रूप से काम कर सके अपितु हमारा आत्मविश्वास भी बढ़ सके।किसी भी नकारात्मक सोच को जमा होने से पहले ही नष्ट कर देना चाहिए ताकि आगे चल कर ये नासूर न बन जाएँ।

ये हमारा रवैया ही है जो हमारे भविष्य का निर्माण करता है।जब हमारा स्वयं के प्रति रवैया अच्छा होगा तो हम जीवन में बेहतर कर पायेंगे।कठिन परिश्रम और समर्पण ऐसे मूल्य हैं जो हमें सफल होने के लिए चुकाने पड़ेंगे।जीतना या हारना तो गौण है,सबसे महतवपूर्ण है कि क्या हमने अपना सबसे बेहतर उस कार्य को दिया या नहीं जो हम कर रहे हैं।

हमें हमेशा सकारात्मक रवैया रखते हुए ही प्रयास करने चाहिए क्योंकि केवल यही हमें मजबूती प्रदान करता है।हमें हमेशा ये ध्यान रखना चाहिए कि जब चीजें हमारे हिसाब से नहीं चल रही हों या उग्र दिखाई दे रही हों,तो इसका अर्थ अंत नहीं है।हमें हमेशा ये उम्मीद रखनी चाहिए कि बेहतर चीजें हमारा इन्तजार कर रही हैं।

हमें हमेशा अपने लक्ष्य पर,जो हमने स्वयं के लिए निर्धारित किया हुआ है,ध्यान लगाए रखना चाहिए और साथ ही साथ इस लक्ष्य की प्राप्ति के रास्ते में आने वाली बाधाओं और कठिनाइयों से संघर्ष के लिए भी तैयार रहना चाहिए।जब हम अपने दृष्टिकोण में,विचारों में स्पष्ट होंगे कि हम क्या चाहते हैं तो समर्पण,लगन से हम उसे प्राप्त कर सकते हैं।

याद रखें,सफलता केवल उन को ही प्राप्त होती है और उन के ही द्वारा संभाले रक्खी जा सकती है जो हमेशा प्रयत्न करते रहते हैं।सफलता कि ओर हमारी राह काँटों से और निराशा से भरी व कठिन परिश्रम से भरपूर  हो सकती है किन्तु अंत में सफल व्यक्ति ही पुरुस्कृत होते हैं।