सफल होने के लिए:२

शांत,विनम्र और संतुलित रहें:-

किसी ने ठीक कहा है “शांत और विनम्र रहिये और आप नरक को भी स्वर्ग में बदल सकते हैं।”वास्तव में हमें हमेशा स्वयं को ये याद दिलाते रहना चाहिए कि विनम्रता और शान्ति का विकल्प हमारे स्वयं के भीतर मौजूद होता है।

अच्छी तरह से सोचे हुए,सकारात्मक व आंकलित निर्णय या कृत्य के लिए हमारा शांत,विनम्र और संतुलित होना परम आवश्यक है।वो व्यक्ति,जो सम और विषम प्रत्येक परिस्थिति में विनम्र,शांत व संतुलित रहता है,हमेशा अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है और सफल होता है।

ऐसा इसलिए संभव है क्योंकि एक विनम्र,शांत व संतुलित मस्तिष्क किसी भी व्यक्ति की सोच-समझ को बनाए रखता है,जिससे उसकी किसी भी कार्य को करने या सही निर्णय लेने की या उनके प्रत्येक पहलुओं को समझने की क्षमता बनी रहती है।

यदि व्यक्ति विनम्र,शांत और संतुलित नहीं है तो इसका अर्थ ये है कि वह क्रोधित है।क्रोधावस्था की स्थिति में वह न केवल अन्यों को अपमानित करता है और उनके लिए परेशानियां खड़ी करता है,अपितु स्वयं के लिए भी सबसे बड़ा शत्रु साबित होता है।

एक अच्छा और खुशनुमा जीवन उसी क्षण समाप्त हो जाता है जब कोई स्वयं को क्रोधित होने का अवसर देता है।क्योंकि क्रोध हमारे विवेक को खा जाता है और हम जीवन में आगे बढने की बजाय वहीँ खड़े रह कर दूसरों को नुक्सान पहुँचाने का ही सोचते रहते हैं।और ऐसा कर के वस्तुतः स्वयं को ही नुक्सान पहुंचाते हैं।

हमें प्रत्येक सुबह स्वयं को यह याद दिलाते रहना चाहिए कि विनम्र,शांत और संतुलित रहने का अर्थ स्वयं से जुड़े रहना है,जिससे हमारा व्यक्तित्व बना रहता है और हम खुद को आत्म-नियंत्रित रख पाते हैं।

विनम्रता,शान्ति और मानसिक संतुलन,हमें शक्ति प्रदान करता है जिससे हम ऐसे कार्य कर पाते हैं जो सम्पूर्ण मानव समाज के लिए हितकर और अच्छे होते हैं।अंततः ये ही अच्छाई हमारे पास सफलता के रूप में लौट आती है।

जैसा कि हमारे गुरुजन हमें सिखाते हैं,जितना ज्यादा हम विनम्र,शांत और संतुलित होते जायेंगे,उतना ही ज्यादा हम सफलता के करीब होते जायेंगे।हमारा प्रभाव बढ़ने लगेगा और अच्छा करने की हमारी क्षमता भी बढ़ने लगेगी।

जब हम क्रोध करते हैं तो बदले में हमें भी क्रोध ही मिलता है।वहीँ शान्ति और विनम्रता हमें शान्ति,ख़ुशी और संतुलन का एहसास कराती है।जो व्यक्ति विनम्र,शांत और संतुलित नहीं रहता,शीघ्र ही सम्पूर्ण जगत उस का शत्रु हो जाता है।

इसलिए हमें चाहिए कि हम प्रत्येक परिस्थिति में विनम्र,शांत और संतुलित बने रहें, ताकि हम सम्पूर्ण जगत के प्यारे बने रहें और केवल यही तरीका है,जीवन में खुश रहने और सफलता पाने का।                                                                                                     ………………….. क्रमशः