सामाजिक अलगाव के दुष्प्रभाव और समाधान :-
कभी कभी हम इस भागदौड़ भरी जिंदगी मे काफी अकेलापन महसूस करते हैं ,अपने अंदर ऊर्जा की कमी महसूस करते हैं,जबकि हम हर दिन एक्सरसाइज करते हैं,अच्छा खाना खाते  हैं। ऐसा इसलिए होता है क्यूंकि हम अपने लिए वक्त नहीं निकाल पाते।हमारे पास अपने दोस्तों ,रिश्तेदारों से मिलने का भी वक्त नहीं होता। इस तरह के सामाजिक दुराव से हमारे अंदर अलग अलग वक्त पर अलग अलग तरह की बीमारियाँ   भी पैदा हो सकती हैं। इस सामाजिक अलगाव से हाइपरटेंशन ,सूजन और बूढ़े लोगों मे डायबिटीज की समस्या भी उत्पन हो सकती है।
सामाजिक अलगाव क्या है ?
ऐसी स्थिति जिसमे व्यक्ति विशेष समाज से हफ़्तों या महीनों के लिए अपने आप को अलग कर लेता है और अन्य व्यक्तिओं से संवाद बंद या बहुत काम कर लेता है, सामाजिक अलगाव है। सम्पूर्ण रूप से अलगाव बहुत ही खतरनाक है।
जहाँ सामाजिक वार्तालाप हमारे मस्तिष्क के विकास  आवश्यक है  जैसे की अलग अलग स्किल्स को ग्रहण करना,आदि वहीँ सामाजिक अलगाव इसके उलट काम करता है। बूढ़े लोग सामाजिक अलगाव की वजह से अकेलेपन और बेबसी के शिकार हो जाते हैं। उन को तरह तरह की मानसिक बीमारियां होने का खतरा रहता है। उनका ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है ,नकारात्मक सोच  और असुरक्षा की भावना बढ़ जाती है। उन्हें अपनी जिंदगी महत्वहीन लगती है।
जवानों मे सामाजिक अलगाव  की वजह से अवांछित  और अपने आप को नुक्सान पहुंचाने की भावना  घर कर जाती है। मस्तिष्क  बुरे बुरे ख्यालों से भर जाता है और आत्महत्या के बारे मे भी सोचने लगता है। वहीँ बच्चे सामाजिक अलगाव की वजह से सीखने  का मौका गवां  देते हैं। उनकी सामाजिक सोच सीमित हो जाती है।
कारण :
१. चिंता
२. आत्मविश्वास की कमी
३. कठोर होना,जिद्दी  होना
४. माफ़ न कर सकना
५. अपने आप को कम कर के आंकना
सामाजिक अलगाव को कैसे कम कर सकते हैं :

सकारात्मक सोच रख कर ,नकारात्मक सोच पर काबू पा कर  ,अपने आप को स्वीकार कर के ,अपनी अच्छी     तस्वीर बना कर हम स्वस्थ सामाजिक जीवन जी सकते हैं। अपनी समस्याओं को आपस मे चर्चा कर के, सलाहों को सुन कर ,सलाहों पर अमल कर के हम अपने तनाव को दूर कर सकते हैं और अपने मूड को अच्छा  कर सकते हैं। किसी भी विषय पर महारत हासिल कर के  जिससे हमें लोगों से बात करने ,उनसे अपने विचार साझा करने,उन्हें  प्रेरित करने  का अच्छा अवसर मिल सके।

नई -नई रण नीतियां बना कर जिससे हम समाज मे स्वीकारें जाएँ  और हमें अपने भय से छुटकारा मिले और  हम अच्छे  सामाजिक सम्बन्ध बना सकें। कोई सामाजिक गतिविधियाँ अपना कर जैसे की डांस,योग इत्यादि। इससे हमें अपने जैसे सोच वाले लोगों से  मिलने का मौका मिलता है और सामाजिक सम्बन्ध बनते हैं।

हम अपनी गलतियों से सीखते हैं। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसा सोच कर की हमेशा जिंदगी दूसरा चांस देती है अतः हम अपनी गलतियों को सुधार सकते हैं।  ऐसा विचार रखना चाहिये। अपने आस-पास अच्छे सकारात्मक सोच वाले लोगों को ला  कर हम सामाजिक अलगाव को कम कर सकते हैं।