स्वयं की खोज के अपने रास्ते पर ,प्रश्न जो आपको पूछने की जरूरत है:-

नेताओं को आत्म जागरूकता की जरूरत है।नेतृत्व की विफलता का एक प्रमुख कारण आत्म जागरूकता की कमी है।इस ज्ञान को स्वीकार कर लिया गया है।इस विषय पर हजारों पुस्तकें,कार्यशालाएँ ,आश्रयस्थल और हस्तक्षेप  हैं जो बड़ी आत्म जागरूकता का वादा करती हैं।

आत्म जागरूकता और समझ हमारे जीवन को  वर्धित संतुष्टि और ख़ुशी की ओर ले जाती है।पर क्या इसे प्राप्त करना आसान है?हम कैसे अपने आप को बेहतर समझ सकते हैं?

स्वयं के बारे में जानना ,नाजुक और मुश्किल है।कुछ तरीके जिनके द्वारा हम ये समझ आरम्भ कर सकते हैं ,वो हैं साइकोमेट्रिक उपकरणों के द्वारा ,दोस्तों और सहयोगियों की प्रतिक्रियाओं के द्वारा आदि –आदि।

 तथापि,संभावना यह है कि हम अपने आत्म-मर्म का वास्तविक अनुभव और ज्ञान प्राप्त करने की बजाय ,केवल उस ढाल, यानि की एक झूठा व्यक्तित्व जो हमने निर्मित किया है,के बारे में समझ रहे हों।

कई बार,हम अपने इर्द-गिर्द आवरण बना लेते हैं ,हमारे वास्तविक स्व की रक्षा करने के साधन के रूप में और जाने-अनजाने एक झूठे व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं।

इससे ये समझना और स्वीकार करना और भी मुश्किल हो जाता है कि हम वास्तव में कौन हैं।हममें से अधिकाँश इस तरह की पहचान अपने प्रारंभिक जीवन के अनुभवों और हमसे  कैसे  व्यवहार किया गया ,के कारण बनाते हैं।और तब हम इस तरह के झूठे व्यक्तित्व को बिना इसको चुनौती दिए और परखे ,जीवन भर पकड़े रखते हैं।

जब हम एक भीतर की यात्रा शुरू करते हैं ,जो की केवल तब ही घटित होता है जब हम गंभीर साधक और चिंतनशील विचारक होते हैं,हम  सर्वप्रथम झूठे व्यक्तित्व की और धोखे और परिहार की इन अवचेतन परतों से मुठभेड़ करते हैं।

“जब तक आप अचेत को सचेत का हिस्सा नहीं बनायेंगे ,ये यह आपके जीवन को निर्देशित करेंगी और आप इसे किस्मत कहेंगे।“मनोविश्लेषक कार्ल जंग लिखते हैं।

जबकि हम सोच रहे होते हैं कि हम अपने आप को जानते हैं,हम सुरक्षा और प्रतिरोध के पीछे छुपे हो सकते हैं।.हम कहते रहें हम स्वयं की खोज के लिए खुले हैं लेकिन हम क्षमा याचना,तर्कसंगतता और बौद्धिकता के पीछे छुपे हो सकते हैं।

कोई जो आत्म खोज के लिए गंभीर है कह सकता है ,”मैं हमेशा सोचता था कि मैं एक शांत पुरूष हूँ –एक विचारशील,दयालु और समझदार व्यक्ति। मैं कभी क्रोधित नहीं होता था और हमेशा विनम्र और कोमल था।पर जब मैंने इस बात का अन्वेषण शुरू किया कि मैं कौन था ,मैंने इसके अन्दर पाया कि जो सुन्दरता थी वो वास्तव में ईर्ष्या,क्रोध ,डर और वो बातें थीं जो मुझे स्वीकार्य नहीं थी।पर इस ईर्ष्या,क्रोध,डर के पीछे मैंने मेरी प्यार ,आनंद और पूर्ति की काबीलियत भी पायी।“

हमारा सामाजिक अनुकूलन,प्रतिरक्षण प्रणाली और पहचान की झूठी भावना,हमारे असली व्यक्तित्व को छुपा सकता है।अत: बृहत आत्म जागरूकता के लिए हम क्या कर सकते हैं ?

हमें उन गतिविधियों और अनुभवों की ओर देखना चाहिए जो हमारे  भूतकाल में व्यक्तिगत रूप से हमारे लिए मायने रखते थे और ख़ुशी प्रदान करते थे।हमें ये सोचना चाहिए कि…………………………..

क्यों वे गतिविधियाँ और अनुभव हमारे लिए मायने रखते थे ?

हमारी कुछ स्वाभाविक शक्तियां और योग्यताएँ क्या हैं ?

हमारे बुनियादी मूल्य क्या हैं ?

हमारे लिए सही मायने में क्या महत्वपूर्ण है ?

हम सबसे ज्यादा किसको महत्व देते हैं ?

हमारे जीवन का मकसद क्या है ?

हमें कौन झुंझलाता है ?

क्योंकि वो सब जो हमें झुंझलाता है हमें खुद को पहचानने की तरफ ले जा सकता है।

और यदि हम इन सब प्रश्नों के अपने भीतर से उत्तर खोजेंगे तो कोई शक नहीं है कि हम स्वयं की खोज मुकम्मल कर सकें।