हमारे बुजुर्ग और हम  :-
हमारे बुजुर्ग एक बरगद के पेड़ की तरह होते हैं। जिस प्रकार बरगद का पेड़ अपनी शाखाओं को फैला कर हमें छाया ,सुख और शान्ति प्रदान करता है ,उसी प्रकार हमारे बुजुर्ग भी अपने प्यार ,देखभाल और संरक्षण को हमारे चारों ओर फैला देते हैं और हम उनकी छत्र-छाया में खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं। हमारे बुजुर्गों में हमारे दादा-दादी ,नाना-नानी ,माता-पिता और उनके मित्र शामिल होते हैं।
वे अपनी पूरी जिन्दगी हमारी देखभाल में बिता देते हैं। हमारी देखभाल में और पालन-पोषण में वे अपना सुख-चैन और अपनी इच्छाओं को कुर्बान कर डालते हैं। वे हर परिस्थिति में हमारी सुरक्षा करते हैं । हम उनका हाथ पकड़ कर चलते हैं। रात में उन से शिक्षाप्रद कहानियां सुनते हैं। हमारे बुजुर्ग हमें अच्छे नैतिक मूल्यों का ज्ञान देते हैं और हमें एक अच्छा ,सफल मनुष्य बनने में सहयोग करते हैं।
लेकिन :
एक सफल व्यक्ति बन जाने के बाद ,हममें से कुछ इस कदर स्वार्थी हो जाते हैं कि अपने बुजुर्गों को कचरे के ढेर की तरह समझने लग जाते हैं । वे उनको एक बोझ समझने लगते हैं और बुजुर्गों को घर के एक कोने में  सिमटा दिया जाता है।  
पर क्या हमारे बुजुर्ग इस तरह के व्यवहार के अधिकारी हैं ?:
क्या हमारे बुजुर्ग भी उसी प्यार,देखभाल और सुरक्षा के अधिकारी नहीं हैं जो उन्होंने हमें उस वक्त दी थी जब हमें उस की सबसे ज्यादा जरूरत थी?तब हम उन्हें वही प्यार ,देखभाल और सुरक्षा क्यों नहीं दे सकते ?
हमें अपने बुजुर्गों की देखभाल ,उन्हें श्रद्धेय ,बुद्धिमान संत और हमारे रीति-रिवाजों के रखवाले के रूप में समझ कर करनी चाहिए।इस प्रकार उनकी देखभाल कर के हम उनके द्वारा दिए जाने वाले ज्ञान के उपहार की इज्जत कर रहे होते हैं और इस प्रकार उनको बुद्धिमानी से और अच्छी तरह से उम्रदराज होने में मदद करते हैं।
ऐसा करने के लिए हमें उन के साथ  एक ऐसे रास्ते पर चलना होगा जो बुजुर्गों की जरूरतों और पसंद का ख्याल रखे और उन्हें विचारशील और सावधान निर्णय लेने में मदद करे।हमें उनकी सेहत का ,उनकी सामाजिक और आर्थिक जरूरतों का भी ख्याल रखना होगा।
कभी-कभी वो हमसे कुछ नहीं कहते पर हमें अपने आप से ही समझना होगा कि वो क्या चाहते हैं।अक्सर अधिकतर मामलों में उन्हें केवल हमारे प्यार और स्नेह की ही जरूरत होती है।
ऐसा हम किस प्रकार कर सकते हैं ?
सबसे महत्वपूर्ण है कि हम उन्हें आदर के साथ संबोधित करें ,जब भी हम उन से बात करते हैं।ऐसा करने से उनके अन्दर गर्व और ममता की भावना आती है।हमें हमेशा उनके द्वारा दी जाने वाली सलाह को सुनना चाहिए ।उन्होंने जिन्दगी को हमसे ज्यादा देखा और अनुभव किया है।जरूरी नहीं है कि हम उनकी सलाह के हिसाब से ही चलें पर अधिकतर समय उनके द्वारा दी जाने वाली सलाह ठीक ही होती है।
उन्हें बहुत प्रसन्नता होती है जब हम उनके दैनिक कार्यों में उनकी मदद करते हैं।हमें ये भी ध्यान रखना चाहिए कि हम उनसे विनम्रतापूर्वक पेश आयें।उस समय भी जब उनके द्वारा अनजाने में कुछ गलत हो जाए।हमें समय-समय पर ,जो उन्होंने हमारे लिए किया है ,उसके लिए धन्यवाद करना नहीं भूलना चाहिए।
हमें उन्हें टी०वी०  आदि देखने दे कर,उन्हें संगीत सुना कर या उन्हें विभिन्न मनोरंजक स्थलों पर ले जा कर उनका मनोरंजन कर सकते हैं जिससे वे उपेक्षित और अकेला न महसूस करें। यदि हम उनकी जिन्दगी के बारे में जानने में रुचि रखेंगे तो वे हमसे जुड़े हुए महसूस करेंगे।जब हम उनसे उनके अतीत के बारे में जानने की कोशिश करते हैं तो जो चमक उसे बताते हुए उनके चेहरे पर आती है उसे बयान नही किया जा सकता।उन्हें हमें अपने अनुभव ,कहानियां और यादें बताते हुए बेहद ख़ुशी मिलती है ।
हमें उन के साथ सहनशीलता बरतनी चाहिए।एक बुजुर्ग और छोटे बच्चे में कोई फर्क नहीं होता।बड़ी उम्र में अक्सर लोग बच्चा बन जाया करते हैं।वे अपनी तर्क शक्ति खो देते हैं और असहनशील हो जाते हैं ।इसलिए उनके साथ सहनशील रहते हुए उन के साथ  विनम्रता का व्यवहार करना चाहिए ।हमेशा ये याद रखना चाहिए कि जब हम बच्चे थे तो उन्होंने किस अच्छी तरह से हमारी देखभाल की थी ।उन्होंने बिलकुल फूल की तरह हमें रखा था और अब उन्हें भी ऐसी ही देखभाल की जरूरत है।
उनकी गैरमौजूदगी में भी हमें उन्हें आदर के साथ संबोधित करना चाहिए।हमें उन्हें बुड्ढा या बुड्ढी कह कर संबोधित नहीं करना चाहिए।