हमेशा अपने कार्यों और विचारों से सकारात्मक रहें :-
हमेशा जब भी सोचें सकारात्मक सोचें क्योंकि हम वैसा ही बन जाते हैं जैसा हम सोचते हैं।यदि हम हर वक्त नकारात्मक ही सोचते रहेंगे तो एक दिन ऐसा आएगा कि ये नकारात्मकता हम पर पूर्ण रूप से हावी हो जायेगी और हम एक नकारात्मक व्यक्तित्व के स्वामी हो जायेंगे।
जबकि यदि हम सकारात्मक सोचना शुरू कर देंगे तो हम एक शांत ,प्यारे और अच्छे व्यक्तित्व वाले व्यक्ति के रूप में उभरेंगे।हम हमेशा इस बात पर नियंत्रण नहीं रख सकते कि दूसरे क्या करते हैं या कैसा सोचते हैं और न ही उन्हें बदल सकते हैं किन्तु थोड़े से प्रयास से और समर्पण से हम अपने आप को बदल सकते हैं अर्थात् अपने  रवैये , उम्मीदों, क्रियाओं और प्रतिक्रियाओं को बदल कर और नियंत्रित कर के हम एक प्रेरित ,खुशहाल और बेहतर जीवन जी सकते हैं ।
हम कैसे सकारात्मक रह सकते हैं :
हमें अपने लक्ष्य निर्धारित करने होंगे।लक्ष्य भी ऐसे जो प्राप्त किये जा सकें और ऐसी बातों पर केन्द्रित हों जो हम हासिल करना चाहते हैं।हमेशा सकारात्मक रहने पर ध्यान लगाएँ और इस प्रकार शीघ्र ही हमें अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के असंख्य रास्ते मिल जाते हैं ।सफल व्यक्तियों की जीवनी और उन के बारे में पढ़ कर और जान कर ,प्रेरणादायक पुस्तकें पढ़ कर हम अपने अन्दर सकारात्मकता का संचार कर सकते हैं।
हमें हमेशा ये याद रखना होगा कि हम खुद में विश्वास बनाए रखें।हमें हमेशा खुद से ये कहना होगा कि संसार में कुछ भी असंभव नहीं है और हम किसी भी कार्य को जो हमारे सामने आता है उसे कर सकते हैं।हमेशा संतुष्ट रहें ,क्योंकि जब हम ,जो कुछ भी हमारे पास है ,उस में संतुष्ट होते हैं तो ज्यादा प्रसन्न और सकारात्मक महसूस करते हैं।संतुष्टि हमारे लिए और भी अवसर बनाती है।
हमेशा अपने साथ हुए सुखद वाकयों को याद रखें।जब हम सुखद वाकयों को याद रखते हैं तो उनकी हमारे जीवन में बढ़ोतरी होने लगती है।कभी भी अपने मस्तिष्क को नकारात्मक सोचों और विचारों से न भरें और कभी भी कमियों का रोना न रोयें ।ऐसा करने से हमारे जीवन में नकारात्मकता का संचार होने लगता है।अपितु हमेशा यह सोचें कि हमारे जीवन में प्रेम ,सफलता और ख़ुशी प्रचुर मात्र में है।
जब हम अपने में विश्वास बनाए रखते हैं तो हमें हमेशा ,जीवन से जो हम चाहते हैं,उसके सकारात्मक पहलु  याद रहते हैं।किसी भी परिस्थिति में ,चाहे वो सुखद हो या दुखद ,कुछ न कुछ सीखने के लिए होता है।अतैव हमेशा मुश्किल परिस्थितियों में भी ये कोशिश करते रहना चाहिए कि हम उसमें से अच्छा और उपयोगी ढूंढ सकें।जो भी कार्य आप कर चुके हैं उस के लिए अपने आप की सराहना करना न भूलें।साथ ही साथ अपने आप से ये जरूर कहें कि अगली बार मैं इससे भी बेहतर कर के दिखाऊंगा।
जब हम दयालु और विनम्र होते हैं तो खुद को और भी जमीन से जुड़े हुए और सकारात्मक पाते हैं।कभी हिम्मत मत हारो।हमेशा कोशिश करते रहो ।एक न एक दिन सफलता अवश्य तुम्हारे कदम चूमेगी।सवेरे उठते ही हमेशा अपनी अच्छी आदतों और गुणों के बारे में सोचना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से हमारे अन्दर सकारात्मकता का संचार होता है।दूसरों को प्रोत्साहित करने और उनके साहस को बढाने में मदद करने से हमारा खुद का मनोबल बढ़ता है।
हमें हमेशा अपनी नकारात्मक सोचों को सकारात्मक सोचों से बदलते रहना चाहिए।सकारात्मक विचारों को सकारात्मक रूप से कार्यान्वित करना चाहिए  और अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कर्म जरूर करना चाहिए।हमेशा ऐसे लोगों के साथ रहें जो सकारात्मक सोच रखते हों क्योंकि उनके साथ रहने से हमारी सोच भी सकारात्मक हो जाती है।
हम केवल खुद को बदल सकते हैं औरों को नहीं इसलिए कभी भी इस बात पर नाराज न हों कि अन्य क्या कर रहे हैं।जब नकारात्मक सोच आप को अपनी गिरफ्त में लेने का प्रयास करे ,एक गहरी सांस लें और १० तक गिनें।आप को अच्छा महसूस होगा।इस प्रकार केवल सकारात्मक सोचने से,सकारात्मक कार्य करने से हम वो प्राप्त कर सकते हैं जो हम करना चाहते हैं ।