हम कहाँ जा रहे हैं ?
पुराने समय में लोग जंगलों में रहते थे या गुफाओं में रहते थे ।वे अपने भोजन की पूर्ति कंद -मूल खा कर या जंगली जानवरों का शिकार कर के किया करते थे।तब कोई भी धर्म नहीं था और न ही कोई जाति थी और इसलिए तब आपस में कोई वाद-विवाद भी नहीं था।
आजकल के इस आधुनिक युग में जिन्दगी बहुत ही तेज रफ़्तार हो गयी है ।किसी के पास किसी के लिए वक्त ही नहीं है।इसलिए आजकल झगडे आम बात हो गए हैं ।धर्म और जाति के नाम पर लोग आपस में लड़ने लग गए हैं और यहाँ तक कि एक दूसरे का खून भी कर देते हैं ।धर्म के नाम पर आतंकवाद आज एक गंभीर समस्या बन गयी है।
पुराने समय में लोग सरल जीवन जीया करते थे।वे सादा पहनते ,सादा खाते और सीधा और सरल सोचते थे।लोग हमेशा एकजुट हो कर काम किया करते थे और समूह में बैठ कर ,जैसे कि चौपालों आदि में ,और अपनी समस्याएँ आपस में साँझा किया करते थे ।इस प्रकार उनकी समस्या का हल सुगमता से निकल जाया करता था।
आजकल ,लोग दिखावे में ज्यादा विश्वास रखने लगे हैं ।वे बहुत ज्यादा खर्च करते हैं और वो भी अपने पर ,वो पब में जाते हैं,डिस्को में जाते हैं और अपना समय नष्ट करते हैं।उनके पास खुद के लिए तो वक्त होता है पर उनके पास दूसरे के लिए वक्त नहीं होता।वे अपनी ही समस्याओं में घिरे रहते हैं और आपसी सहयोग से एक दूसरे की समस्याओं का समाधान नहीं करते।
हमारा मस्तिष्क ,हमारा सम्पूर्ण अस्तित्व जो बिलकुल शुद्ध हुआ करता था ,हमारी आत्मा जो पवित्र थी वक्त के साथ -साथ अपवित्र हो गयी है ।चालाकी और मौकापरस्ती ने हमारे दिलोदिमाग पर ,हमारी आत्मा पर कब्ज़ा कर लिया है।हम ऊँचाइयों को छूने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं।हम दूसरों का इस्तेमाल एक सीढ़ी की तरह करते  हैं और उन को अपने पैरों तले रौंदते -कुचलते सफलता की सीढ़ी चढ़ते हैं ।
पुराने अच्छे दिनों में लोग आग के चारों और बैठ जाते थे और अपने परिवार,सगे-सम्बन्धियों के साथ मिल बाँट कर खाते थे।सभी अपने विचार एक दूसरे से साँझा करते थे ।जबकि आजकल हर कोई अकेला ही खा रहा है ,अकेला ही रह रहा है और अकेला ही रहना चाहता है।पुराने अच्छे दिनों में हर कोई अपने बुजुर्गों का सम्मान करता था और उनको भगवान की तरह पूजता था ।आजकल हर कोई उन्हें कचरे की तरह समझता है और अपने ऊपर बोझ मानता है।जब तक वो कुछ कमाते रहते हैं तो उनकी इज्जत होती है पर जब वो कमाना छोड देते हैं तो उनकी उपयोगिता ख़त्म हो जाती है और उनको वृद्धाश्रमों में भेज दिया जाता है।
आज कल जिन्दगी बहुत ही भागमभाग वाली हो गयी है।किसी को भी किसी की परवाह नहीं है।हर कोई पैसे के पीछे भाग रहा है ,सफलता प्राप्त करने के लिए जोड़-तोड़ में लगा है बिना इस बात की परवाह किये कि वो क्या खो रहा है।
भागना छोडिये और सोचिये की हम क्या खो रहे हैं।हम खो रहे हैं प्रेम,विश्वास और अपनों के साथ बिताया हुआ मूल्यवान और गुणवत्ता से भरपूर समय।हम एक नरक में जी रहे हैं ,इसलिए रुकिए और सोचिये ………?????
हम कहाँ जा रहे हैं ?