ख़ुशी भरा जीवन जीने के लिए :-

अपने स्वयं के साथ रहें ,अपना समस्त असंतोष और गुस्सा पीछे छोड़ें , खुद की उपलब्धियों के साथ संतुष्ट रहें और अपने जुनून का पीछा करें-

अपने स्वयं के साथ रहें :

एक जरूरी बात जो हमें अपने प्रारम्भिक जीवन में समझ लेनी चाहिए कि अक्सर हम लोग स्वयं का सम्मान नहीं करते।कोई भी नहीं करता।आत्मसम्मान का विचार एक सकारात्मक विचार है और यह वर्षों पुरानी इस कहावत के साथ बिलकुल सटीक बैठता है कि परोपकार घर से आरम्भ होता है।खुद का सम्मान करने का मतलब ये है कि हम स्वयं के साथ अच्छे  हैं और एक अच्छा व्यक्ति औरों के साथ भी केवल अच्छा ही रह सकता है।

हमेशा अपने दिन की योजना इस प्रकार बनाएं कि जिससे सब लोग प्रसन्न रहें और किसी को भी नाराजगी न हो।कुछ भी गलत होने पर विनम्रता बनाए रखें और चुप रहें।अक्सर लोग आपकी विनम्रता को आपकी कमजोरी समझ सकते हैं।पर चुप रह कर और विनम्र बने रह कर आप उनका विनम्र खंडन करते हैं।इस प्रकार आप अपना आत्म्सम्मान बरकरार रखते हुए ,उन्हें एक सम्मानजनक जवाब देते हैं।

संत लोग कहते हैं कि हमें किसी भी प्रकार से अपने आप की तुलना औरों से  नहीं करनी चाहिए।क्योंकि ऐसा करना खुद की कीमत को क्षीण करने के समान है।हम में से प्रत्येक अद्वितीय और विशेष है।केवल इस बात की जरूरत है कि हम अपनी विशेषताओं में पैनापन लायें,ताकि हम चमक सकें और सफल हों।

हमें अपने सपनों को जीना होगा क्योंकि जैसा कि किसी ने कहा है ,”उस क्षण जब आप अपने सपनों को जीते हैं इस कारण नहीं कि ये क्या सिद्ध करेगा या देगा,बल्कि इसलिए कि  यही सब आप करना चाहते हैं,लोगों की राय कोई मायने नहीं रखती।”अत: सबसे ज्यादा खुश केवल वे ही लोग हैं जो सरलता से केवल स्वयं के साथ ही जीते हैं।

अपना समस्त असंतोष और गुस्सा पीछे छोड़ें:

समय-समय पर ,हम सभी कठिन परिस्थितियों से गुजरते हैं जो हमें मानसिक अशांति में डाल देता है।इस प्रकार की अराजकता की स्थिति,हमारी स्वयं की इच्छा की कमी,अति संवेदनशील रिश्तों को संभालने की हमारी समर्थता या असमर्थता,पीढ़ी का अंतर,चोटिल आत्मसम्मान या विनम्रता की कमी के कारण होती है।और अंततः हमारी भावनाएँ असंतोष और गुस्से में बदल जाती हैं।

ये असंतोष और गुस्सा ,परिस्थितियों के प्रति,लोगों के प्रति ,समय के प्रति ,स्वयं के प्रति या मात्र खराब किस्मत के प्रति होता है।

मनुष्य के तौर पर,हम सभी अपने अतीत में रहने में एक प्रकार की ख़ुशी का अनुभव करते हैं और कल्पना करते हैं कि कैसे घटनाएँ ज्यादा बेहतर हो सकती थीं।

हम अपनी कल्पनाशीलता से ऐसी बातचीत बुनते हैं जो हमनें कभी नहीं की होतीं।हम एक और मौके के लिए लालायित रहते हैं ताकि हम भूतकाल की घटनाओं को घटने से रोक सकें।

इस प्रकार कर के हम केवल उस असंतोष के पंजों से अपने आप को छुडाने के रास्ते खोज रहे होते हैं,जिसको हम अपने भीतर पकडे रहते हैं।

उल्लेखनीय उद्धरण है,”यदि आप दास बनना चाहते हैं तो,अपने असंतोष को आश्रय दें।”

हम ये भूल जाते हैं कि लोगों और उन परिस्थितियों के प्रति असंतोष की भावना जो वर्तमान में बदली नहीं जा सकतीं ,हर गुजरते क्षण के साथ जटिल होती जाती हैं और भविष्य में अत्यधिक ज्वलनशील हो सकती हैं।

इस प्रकार की अवस्था हमारा वो कीमती वक्त भी नष्ट कर सकती है जिसको हम अन्यथा वर्तमान में रहने के लिए खर्च कर सकते थे।

क्षमा करने और भूल जाने का अभ्यास करें और इसकी प्रभावोत्पादकता और उपचारात्मक शक्ति को महसूस करें।आरम्भ में ये बहुत मुश्किल और महँगा जान पड़ेगा पर अंततः इसमें शक्ति है कि ये  मन की शान्ति का पोषण करे और प्यार,दया,मानवता और इस ब्रह्माण्ड के प्रति हमारी आशा को बहाल करे।

खुद की उपलब्धियों के साथ संतुष्ट रहें :

जब हम ख़ुशी की बात कर रहे होते हैं,तब हम अनिवार्य रूप से उदासी की भी बात कर रहे होते हैं क्योंकि दोनों ही दिन और रात की तरह एक दूसरे के पूरक हैं।दोनों एक दूसरे का अनुसरण बिना चूके करते हैं और इस ग्रह पर हमारे अस्तित्व को अर्थ देते हैं।

ख़ुशी मन की वो अवस्था है जो हमें उत्साह की भावना देती है और ये एहसास देती है कि संसार में सब कुछ ठीक है।

ये एक गुण है जो हमें हर तरह के नकारात्मक गुणों से मुक्त करता है और इस ग्रह पर हमारी तीर्थ यात्रा को सार्थक और सफल बनाता है।ये हमें सकारात्मक रूप से व्यवस्थित करता है ताकि हम खुद को सभी की भलाई के महान कार्यों में लगा सकें।

ख़ुशी सीधी हमारे सकारात्मक कृत्यों से आती है जो हमारे समाज में एक फर्क पैदा करती है।ख़ुशी का अर्थ खुद की उपलब्धियों के साथ संतुष्ट रहना और अन्य उपलब्धि हासिल करने वालों के साथ स्पर्धा न करना है।

एक सुखी जीवन वो होता है जब हम अपने जीवन से संतुष्ट होते हैं और केवल अपने साथ ही स्पर्धा में होते हैं।एक सुखी जीवन का अर्थ हमारी खुद की सफलता का जश्न मनाना और गुजरे दिनों के अंधकारमय पहलुओं को हमेशा के लिए अलविदा कहना है।

हम अपने आस-पास के लोगों को ख़ुशी प्रदान किये बिना खुश रहने का नहीं सोच सकते।ख़ुशी इस तथ्य को स्वीकार करने से आती है कि हम इस बड़े संसार का एक छोटा सा हिस्सा हैं और अन्य भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने कि हम हैं।

अपने जुनून का पीछा करें:

क्या आप जानते हैं रोजमर्रा की व्यस्त जिन्दगी के साथ-साथ ,हमें हमारे शौक और जुनून को आगे बढाने पर क्यों जोर दिया जाता है ?क्या आप जानते हैं कि दिन-भर की कड़ी मेहनत के बाद ,हमें केवल एक शिकायत रहती है कि हमारे पास खुद के लिए और अपने परिवार के लिए बिलकुल वक्त नहीं रहता?

तब खुद के शौक और जुनून को आगे बढाने के मुद्दे पर इतना कोलाहल क्यों ?याद कीजिये आपने कब अंतिम बार अपने गिटार को बजाने के जुनून को पूरा किया था ?या कब अंतिम बार आपने कैनवास पर चित्रकारी कर अपने शौक को पूरा किया था ?

जब हम किसी चीज के बारे में भावुक होते हैं तब उसे पूरा न कर पाने के बहानों की हमें जरूरत नहीं होती।हम सभी अपने जीवन में, अपने खाली समय में,कुछ न कुछ करना चाहते हैं।

संभवतः हममें से कुछ इसे अपने करियर के रूप में भी लेते हैं।हालांकि हममें से अधिकाँश में कुछ अनोखा कर सकने का साहस नहीं होता।लेकिन वास्तविक संतोष और संतुष्टि इस बात को समझने में कि क्या करना हमें खुश करता है और वास्तविकता में उस बात को पूरा करने के लिए समय निकालने में है।

इसलिए ताक़ पर रखी हुई उस पुस्तक को उठाएँ जिसे आप पढना चाहते हैं या उस कहानी को लिखें जिसे आप काफी समय से लिखना चाहते हैं क्योंकि जिन्दगी उन कामों को करने में है जो आपको जीवंत महसूस कराते हैं।कुछ रोमांचक करने के लिए होना ,जिन्दगी और काम के प्रति हमारे रवैये को बदल देता है।