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Archives for April, 2016

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दिव्य सन्देश:७

दिव्य सन्देश:७ दूसरों को ख़ुशी देना सबसे बड़ा दान -पुण्य का काम है। अर्थात् जब हम किसी को दान में धन या कोई वस्तु देते हैं तो ये दान हमेशा के लिए नहीं होता।जैसे ही धन ख़त्म होता है या वस्तु समाप्त होती है ,याचक फिर से मांगने लगता...

दिव्य सन्देश:६

दिव्य सन्देश:६ क्यूंकि विचार सभी कर्मों के बीज अर्थात् जन्मदाता हैं ,इसलिए मैं केवल अच्छे और शुद्ध बीज (विचार)बोाऊं (रखूं ) ,ताकि जो फल मिले वह भी सर्वश्रेष्ठ हो। अर्थात् सदा अपने मन को ,अपने कर्मों को ,अपने वचनों को पवित्र रखें ,क्योंकि जिस प्रकार खेत में अच्छे बीज...

दिव्य सन्देश:५

दिव्य सन्देश:५ गलतियां ध्यान ना देने की वजह से होती हैं  और फिर तनाव उत्पन्न होता है। अर्थात् सभी काम पूरी ईमानदारी ,लगन और एकाग्रता से करने चाहिए क्योंकि यदि हम ऐसा नहीं करेंगे तो कहीं न कहीं गलती होने का खतरा बना रहेगा और हमारा काम बिगड़ सकता...

दिव्य सन्देश:४

दिव्य सन्देश:४ चिंताग्रस्त व्यक्ति मृत्यु से पहले कई बार मरता है। अर्थात् जब हम चिंता करते हैं तो असंख्य रोगों को निमंत्रण दे देते हैं।चिंता के कारण हमें रात भर नींद भी नहीं आती।हमारी सोचने-समझने की शक्ति कमजोर हो जाती है और हमारा सारा ध्यान चिंता की तरफ लगा...

दिव्य सन्देश:३

दिव्य सन्देश:३ यदि समस्याएं आने पर आप घबरा जाते हैं तो इससे आपके दिमाग का सन्तुलन बिगड़ जाएगा। अर्थात् कभी भी समस्याएँ आने पर घबराएँ नहीं क्योंकि यदि हम घबराएंगे तो हमारी सोचने,समझने की शक्ति ख़त्म हो जायेगी,हमारे दिमाग की काम करने की शक्ति क्षीण हो जायेगी और हम...

दिव्य सन्देश :२

दिव्य सन्देश :२ मनोविकारों पर विजय प्राप्त करना ही आत्मा की सच्ची स्वतंत्रता है। अर्थात् हम सब इन्द्रियों के वश में बंधे रहते हैं और परिणाम स्वरुप विभिन्न विकारों के शिकार हो जाते हैं।पर जब हम जितेन्द्रिय हो जाते हैं अर्थात् अपनी इन्द्रियों को वश में कर लेते हैं तो...

दिव्य सन्देश :१

दिव्य सन्देश :१  जब तुम किसी की सेवा करो तब उसकी त्रुटियों को देख कर उससे घृणा नहीं करनी चाहिए। अर्थात् कमियाँ तो हम सब में होती हैं।इसलिए किसी और में कमी है तो कोई कारण नहीं है कि हम उससे घृणा करें।यदि हम किसी की सेवा करते हैं...

सच्चे मित्र एवं मित्रता

सच्चे मित्र एवं मित्रता:-   सच्चे मित्र प्रेम की मूरत है। सच्चा मित्र वह है जो हमारी भावनाओं को समझें। सच्चा मित्र वह है जो   उस वक्त हमारा साथ देता है जब सारी  दुनिया हमारा साथ छोड़ देती है। सच्ची मित्रता से बड़ी भावना इस संसार मे कोई नहीं है। सच्चा मित्र वही है जो...

आनंद

आनंद:- अपनी शक्तिओं को यदि काम करने मे लगाया जाए तो आनंद की प्राप्ति होती है।केवल न्याय ही वास्तविक आनंद है। केवल आनंद ही कल्याणकारी अनुभूति है। आनन्दित होने का स्थान यहीं है। आनन्दित  होने का समय अभी है। दूसरों के आनंद मे सहायक होना ही सच्चा आनंद है।...

मोक्ष कैसे पाएं

मोक्ष  कैसे पाएं :- श्रवण शक्ति को बढाओ : अपनी  श्रवणशक्ति को इतना बढ़ाओ कि आप  लोगों के  दुखो को सुन सकें ,अपनी बुराई को जज्ब कर सकें  ,हमेशा अच्छी -अच्छी बातें सुनें  और कभी भूल कर भी किसी की बुराई ना सुनें। क्यूंकि अच्छी-बातें ,सद्विचारों को सुन कर ही हम...
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