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Archives for April, 2016 - Page 2

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संतोष

संतोष:-  संतोष ही सच्चा धन है।  वही सबसे धनवान है जो सबसे कम पर संतोष कर सकता है।संतोष आनंद को जन्म देता है और आनंद वह प्रसन्नता है जिसके भोगने पर पछताना  पड़ता।संतोष एक प्राकृतिक दौलत है जबकि ऐश्वर्य कृत्रिम ग़रीबी।यदि धनवानों मे न्याय होता और निर्धनों मे संतोष...

क्रोध से बचें क्यूंकि

क्रोध से बचें क्यूंकि:-   मनुष्य का सबसे बढ़ा शत्रु क्रोध है। क्रोध सदैव मूर्खता से शुरु होता है और पश्चाताप पर समाप्त होता है । क्योंकि क्रोध हमारे सोचने समझने की शक्ति को नष्ट कर देता है अत: क्रोध में आ कर हम जो कर जाते हैं बाद में...

ज्ञानवान मनुष्य के लक्षण

ज्ञानवान मनुष्य के लक्षण:-   ज्ञानवान मनुष्य हमेशा अच्छे कार्यों मे लगे रहते हैं। ज्ञानीजन कभी भी बुरे लोगों की संगति नहीं करते। ज्ञानी मनुष्य कभी भी क्रोध नहीं करते और न ही ज़रा ज़रा सी बात पर प्रसन्न होते हैं।  ज्ञानीजन अभिमान से कोसों दूर रहते हैं। उन्हें व्यर्थ गर्व करना...

निष्काम कर्म करें

निष्काम कर्म करें :- हर मनुष्य कोई न कोई काम करता है। पर इन कामों के पीछे कोई न कोई उद्देश्य होता है। कोई खूब धनवान होना चाहता है। वह हर समय पैसा कमाने की धुन मे लगा रहता है। कोई यश प्राप्त करने की इच्छा रखता है और...

सच बोलिए

सच बोलिए क्यूंकि : सत्य हमेशा दिल से निकलता है ,इसके लिए हमें कोई तैयारी नहीं करनी पड़ती।जबकि एक झूठ को छुपाने के लिए हज़ार झूठ बोलने पड़ते हैं।सच थोड़े समय के लिए दर्द देगा जबकि एक झूठ पकडे जाने पर उम्र भर का दर्द दे सकता है। सच बोलने...

मुस्कुराईए

मुस्कुराईए क्यूंकि:- शान्ति की शुरुआत मुस्कराहट से होती है। हमारी मुस्कराहट हमारी ख़ुशी का कारण हो सकती है। हमारे मुस्कुराने से जिंदगी हमें जीने लायक लगती है। समस्त संसार कितना कान्तिमय लगता है जब हम मुस्कुराते हैं। मुस्कुराहट एक ऐसा वक्र (curve) है जो समस्त समस्याओं को सुलझा  सकता है।जब हम मुस्कुराते हैं...

जिसने जीता खुद को -उसने जीता जग

 जिसने जीता खुद को -उसने जीता जग:- आजकल हर कोई एक दूसरे को नियंत्रित करने मे लगा है। कभी धन के बल पर ,कभी पद के बल पर तो कभी शक्ति के बल पर लोग एक दूसरे को दबाने की कोशिश करते रहते हैं। दूसरों को नियंत्रित करने वाला...
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