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Archives for May, 2016

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"अप्पो दीपो भवः "

 “अप्पो दीपो भवः- “ मनुष्य जीवन की माँग है कि उसे ख़ुशी चाहिए ,पुष्टि चाहिए ,प्रकाश चाहिए ,सहानुभूति एवं स्नेह चाहिए। भगवान बुद्ध ने कहा था “अप्पो दीपो भवः “,अर्थात स्वयं अपने ही दीपक को जलाओ। इस हृदय के दीपक को ,ज्ञान के दीपक को जलाना ही जीवन की...

आपके अंदर का नायक

आपके अंदर का नायक:- हम सभी के अंदर एक नायक होता है। यहाँ नायक का मतलब है  वो व्यक्ति जिसने जीवन मे कोई उल्लेखनीय कार्य किया हो जिससे ना केवल उसका अपितु अन्य का भी भला हुआ हो। नायक बनने के लिए सबसे पहले अपने आस पास के लोगों के...

वचनामृत:२

वचनामृत:२ धमकी देनेवाला सदा कायर होता है।शक्तिवान पुरूष कभी धमकी नहीं देता,वह तो जो चाहता है वह करके दिखा देता है।–बर्नार्ड शॉ  अर्थात् जिस प्रकार गरजने वाले बादल बरसते नहीं ,या ये कहावत है कि थोथा चना बाजे घना अर्थात् जिस में दम नहीं होता वो ही ज्यादा आवाज...

अस्तेय:किसी प्रकार से भी किसी के स्वत्व -हक़ का न छीनना ,न चुराना

अस्तेय:- किसी प्रकार से भी किसी के स्वत्व -हक़ का न छीनना ,न चुराना ‘अस्तेय ‘कहलाता है। अस्तेय सत्य का ही रूपांतर है। केवल छुप कर किसी वस्तु अथवा धन का हरण करना ही स्तेय  नहीं  हैं ,जैसा कि साधारण मनुष्य समझते हैं। भूख से तंग आकर उदर -पूर्ति के लिए...

गुरू को प्राप्त करने के लिए जरूरी लक्षण:-

गुरू को प्राप्त करने के लिए जरूरी लक्षण:-  मानव बन कर मुक्ति का मार्ग दिखाने के लिए सद्गगुरू के पास जाना चाहिए। पर गुरू को जाना कैसे जाये ?सद्गगुरू की प्राप्ति के लिए मानव के अंदर भी कुछ लक्षण होने चाहिएँ या विकसित किये जाने चाहिएँ। शरीरश्रमी :   ...

वचनामृत:१

  वचनामृत:१ मनुष्य के लिए जीवन में सफलता का रहस्य हर आने वाले अवसर के लिए तैयार रहना है।–डिजरायली अर्थात् हमें हर वक्त अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए तैयार रहना चाहिए।मनुष्य जीवन में अवसर आते ही रहते हैं।पर अक्सर हम उन्हें पहचान नहीं पाते या उस अवसर को भुना नहीं...

त्यागने योग्य

त्यागने योग्य:-  राग :   संसार मे मुख्य रोग है राग। राग से क्रोध की उत्पत्ति होती है। जिस प्रकार धुएँ से आग ,दर्पण के मैल से प्रतिबिम्ब और झिल्ली से गर्भ ढका रहता है ,वैसे ही राग से क्रोध आच्छादित है। यहाँ ये तीन दृष्टांत ,तीन प्रकार के...

दिव्य सन्देश:१२

दिव्य सन्देश:१२ दूसरों के लिए किये गए कार्य से आत्मशुद्धि होती है। इससे अहंकार कम होता है।  –विवेकानन्द  अर्थात् जब हम दूसरों के लिए कार्य करते हैं तो हमारे मन में दया भाव ,प्रेम भाव आदि शुभ लक्षण पैदा होते हैं।हम दूसरों की ख़ुशी में खुश और उनके दुःख से...

दिव्य सन्देश:११

दिव्य सन्देश:११ ऐसे व्यक्ति जो कभी गलतियाँ नहीं करते ,वही हैं जो कभी कुछ नहीं करते।– विविध अर्थात् हम जब कोई काम करते हैं या कोई बात करते हैं तो गलती की संभावना बनी रहती है क्योंकि कोई भी १०० प्रतिशत नहीं दे सकता।पर यदि हम कुछ करेंगे ही...

जानने योग्य बातें :

जानने योग्य बातें :- इन पाँच बातों का त्याग ज्ञानी और भक्त सभी साधकों को करना चाहिए : हमें प्रथम व्यर्थ चिंतन,द्वितीय व्यर्थ भाषण त्रितीय व्यर्थ दर्शन चतुर्थ व्यर्थ श्रवण और पंचम व्यर्थ भ्रमण से बचना चाहिए और इनका त्याग कर देना चाहिए क्योंकि इन व्यर्थ की बातों में...